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Bihar: तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय में अब पहले वाली बात नहीं, परीक्षा में देरी व आंदोलन बन गई पहचान

बिहार का तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय एक समय रिजल्ट समय पर देने के लिए प्रसिद्ध रहा.लेकिन आज बदहाली का शिकार है. विश्विद्यालय शिक्षा जगत में अपने प्रसिद्धी के लिए जाना जाता था. यहां से पढ़े छात्र आज देश-विदेश में काम कर रहे हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी
तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी
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आरफीन, भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय एक दशक पहले जहां परीक्षा से लेकर रिजल्ट समय पर देने के लिए प्रसिद्ध रहा है. अब उन्हीं चीजों के लेटलतीफी के लिए चर्चित हो रहा है. समय से परीक्षा नहीं होती है, अगर समय पर हो भी जाये. कॉपी मूल्यांकन शुरू नहीं हो पाती है. ऐसे में रिजल्ट प्रकाशन में देरी होती है. इससे छात्रों की मुश्किलें बढ़ती जाती है.

वर्तमान में पार्ट वन परीक्षा समाप्त होने से एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है. लेकिन छह दिन बीतने के बाद भी कॉपी का मूल्यांकन कार्य शुरू नहीं हो सका है. विवि से पूर्व के परीक्षा की कॉपी मूल्यांकन कार्य का बकाया भुगतान नहीं किया गया था. इसे लेकर संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों ने कॉपी जांच का बहिष्कार कर दिया.

विवि प्रशासन को पांच दिन लग गये फाइल पर भुगतान के आदेश करने में

पूर्व के परीक्षा की कॉपी मूल्यांकन का बकाया भुगतान के लिए विवि प्रशासन को फाइल पर आदेश करने में पांच दिन लग गये. प्रभारी कुलपति प्रो हनुमान प्रसाद पांडे ने सात जून को मुजफ्फरपुर में संबंधित फाइल पर आदेश दिया. ऐसे में विवि प्रशासन के कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है.

कॉपी मूल्यांकन कार्य शुक्रवार से होगा शुरू :

शिक्षक नेता डॉ आनंद मिश्रा ने कहा कि विवि प्रशासन ने उनकी मांगों को मान लिया है. इसलिए शुक्रवार से कॉपी मूल्यांकन का कार्य नियमित रूप से शुरू होगा. इसे लेकर सभी शिक्षकों को सूचना दे दी गयी है. उन्होंने कहा कि गुरुवार को बचे शिक्षक मूल्यांकन केंद्रों पर योगदान देंगे.

नहीं मिल रही है डिग्री :

टीएमबीयू मुख्यालय पहुंचे छात्र संतोष कुमार का कहना है कि वह जमुई के रहने वाले हैं. उनकी नौकरी लगी है. डिग्री के प्रमाण पत्र के लिए पिछले दो माह से चक्कर लगा रहे हैं. बोला जाता है कि कोई हस्ताक्षर करने वाला अधिकारी नहीं है. कुलपति नहीं हैं. मुंगेर से आये सुनील कुमार का कहना है कि उन्हें अपना प्रमाण पत्र लेने के लिए कई माह से विवि का चक्कर लगा रहे हैं.

कभी नहीं होता था सेशन लेट, विश्वविद्यालय की थी अपनी गरिमा

टीएमबीयू अपने समय के लिए जाना जाता था. पहले के दौर में समय पर परीक्षा, कक्षाएं व अन्य कार्यक्रम आयोजित होते रहते थे. पूरा विवि कैंपस में ज्ञान का फैलाव था. पूर्व के छात्रों के अनुसार टीएमबीयू के हरेक स्थल पर पढ़ाई की ही चर्चा होती थी. यहां के शिक्षक अपने गरीमा के कारण जाने जाते थे. शिक्षकों की सेवा छात्र का भविष्य गढ़ने मेें होता था.

छात्रों के पास पैसे नहीं भी रहने पर शिक्षक उन्हें अपने बच्चे की तरह पढ़ाते थे. अपने घरों पर बुला कर नि:शुल्क पढ़ाते थे. पूर्व के छात्रों से बातचीत करने पर पता चला कि टीएमबीयू में ससमय पर रिजल्ट आता था, किसी भी बात को हंगामा नहीं होता था. गुरु-शिष्य की परंपरा निभायी जाती थी. कोई बड़ा मुद्दा भी हो, तो उसे बातचीत के जरिये समाधान कर दिया जाता था.

कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं अधिकारी

सूत्रों के अनुसार विवि की वर्तमान स्थिति को लेकर अधिकारी खुद भी स्थिति बता नहीं पा रहे है. इतना जरूर है कि दबी जुबान में विवि के स्थिति को काफी खराब बता रहे हैं. विवि में छात्रों से लेकर विकास की योजना ठहर गयी है. जरूरी व महत्वपूर्ण काम नहीं हो पा रहा है. छात्रों से जुड़ी समस्या का निदान त्वरित गति से नहीं हो पा रहा है.

डिग्री लेने के लिए भी जूझ रहे छात्र

विवि में पिछले पांच माह से डिग्री लेने के लिए छात्र-छात्राएं जूझ रहे हैं. कारण है कि डिग्री पर प्रभारी कुलपति का हस्ताक्षर नहीं है. जबकि प्रतिदिन दूर-दराज से छात्र-छात्राएं डिग्री लेने के लिए विवि का चक्कर लगा रहे हैं. बताया जा रहा है कि पांच हजार से अधिक डिग्री विवि में बनकर तैयार है. उधर, रजिस्ट्रार डॉ निरंजन प्रसाद यादव ने कहा कि कुलपति ने डिग्री पर हस्ताक्षर किया है. लेकिन कितने डिग्री पर हस्ताक्षर किया है. रजिस्ट्रार संख्या नहीं बताया.

बोले एक्सपर्ट

विवि में फैले अव्यवस्था के कारण गिरावट आ रहा है. मूल रूप से ऊपर के अधिकारी इसके लिए जिम्मेवार है. विवि के नियमित शिक्षक कॉपी मूल्यांकन कार्य में अपना दायित्व समझ कर शामिल हो. नियमित शिक्षक कॉपी मूल्यांकन कार्य में शामिल होते हैं. इस तरह की परेशानी नहीं आयेगी. समय से कॉपी की जांच होगी और रिजल्ट भी समय पर आयेगा. पहले के पीजी शिक्षक भी इंटर परीक्षा तक की कॉपी का जांच दायित्व समझ कर करते थे. लेकिन अब यह सब समाप्त हो चुका है.

— प्रो क्षमेंद्र कुमार सिंह, पूर्व प्रभारी कुलपति टीएमबीयू

Posted By: Thakur Shaktilochan

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