TMBU News: अनुसंधान आधारित महत्वपूर्ण निष्कर्षों का खजाना प्रदान करेगी संगोष्ठी

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TMBU News: अनुसंधान आधारित महत्वपूर्ण निष्कर्षों का खजाना प्रदान करेगी संगोष्ठी

टीएमबीयू के बिहार और झारखंड के लिए कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र के बैनर तले टीएनबी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को संपन्न हो गया.

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– टीएनबी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

वरीय संवाददाता, भागलपुर

टीएमबीयू के बिहार और झारखंड के लिए कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र के बैनर तले टीएनबी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को संपन्न हो गया. कार्यक्रम का विषय जलवायु तनावग्रस्त कृषि के लिए रणनीति : विकसित भारत @2047 ” रखा गया था. मौके पर दरभंगा विवि के कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी ने कहा कि संगोष्ठी अनुसंधान-आधारित महत्वपूर्ण निष्कर्षों का एक खजाना प्रदान करेगी. इसमें छन कर आने वाले निष्कर्ष मील का पत्थर साबित होंगे. वहीं, संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ रंजन कुमार सिन्हा ने पैनल चर्चा में विषय को प्रस्तुत किया. दीर्घकालिक दृष्टिकोण, डीबीटी से संबंधित हस्तक्षेपों और बिहार के 20 जिलों में जलवायु-लचीली कृषि के लिए उठाये जाने वाले कदमों के बारे में बताया. उन्होंने जैविक खेती की आवश्यकता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की समस्या एवं ” दृष्टिकोण और पुनरावलोकन की आवश्यकता को रेखांकित किया.

वर्ष 2047 तक खाद्यान्न उत्पादन को 302-320 मिलियन टन तक बढ़ाने की आवश्यकता : प्रो अनिल

प्रो बसंत कुमार झा ने पारंपरिक कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्व में लोग सरकार से किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा नहीं रखते थे. उन्होंने वर्ष 2047 तक कृषि उत्पादन में लगभग 75 फीसदी वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया. प्रो अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि वर्ष 2047 तक खाद्यान्न उत्पादन को 302-320 मिलियन टन तक बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने कृषि को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने और इसे विदेशी मुद्रा अर्जन का स्रोत बनाने की वकालत की. डॉ अजीत कुमार झा ने बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया कि लोगों को केवल कृषि पर निर्भर रहने की सलाह नहीं दी जानी चाहिए. बल्कि उन्हें अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी समायोजित करने के प्रयास किये जाने चाहिए.

बाल श्रम जैसी समस्या पर जागरूकता फैलाने की जरूरत पर दिया बल

प्रो आरपीसी वर्मा ने कहा कि न्यायिक कानूनों के सही कार्यान्वयन और जागरूकता की कमी के कारण बाल श्रम जैसी समस्या अभी भी बनी हुई है. जिन्हें प्रभावी रूप से रोके जाने की जरूरत है. कार्यक्रम को डॉ एमयू फारूकी, पूर्व कुलपति प्रो एनके यादव ””””इंदु, प्रो मनोज कुमार, प्रो देवाशीष, डॉ सुमन आदि ने कार्यक्रम को संबोधित किया. डॉ राजीव कुमार सिन्हा मुख्य रैपोर्टियर के रूप में रिपोर्ट प्रस्तुत किया. मौके पर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रो एसएनपांडे, सेमिनार के संयोजक प्रो संजय कुमार झा, डॉ रवि शंकर कुमार चौधरी, डॉ अंशुमान सुमन, डॉ राजेश, डॉ रितु आदि आदि मौजूद थे.

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