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Bhagalpur News. शहर में बनेगा एलपीजी शवदाह गृह, कोयंबटूर की एजेंसी को एक रुपये में दी जमीन

Updated at : 27 Dec 2025 9:36 PM (IST)
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Bhagalpur News. शहर में बनेगा एलपीजी शवदाह गृह, कोयंबटूर की एजेंसी को एक रुपये में दी जमीन

भागलपुर में बनेगा एलपीजी शवदाह गृह.

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-यूडीएचडी ने 33 वर्षों की अवधि के लिए लीज पर देने की दी है सैद्धांतिक मंजूरी

ब्रजेश, भागलपुर

शहर में आधुनिक एलपीजी (गैस) आधारित शवदाह गृह बनेगा. नगर विकास एवं आवास विभाग (यूडीएचडी) ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है. निर्माण की जिम्मेदारी तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन को सौंपी गयी है. करीब एक एकड़ भूमि ईशा फाउंडेशन को एक रुपये की टोकन राशि पर 33 वर्षों के लिए लीज पर देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है. शवदाह गृह का निर्माण और संचालन फाउंडेशन द्वारा किया जायेगा.

दो स्थान चिह्नित, एक पर होगी अंतिम मुहर

नगर निगम भागलपुर ने शवदाह गृह के लिए भूतनाथ मंदिर रोड और बरारी में जमीन चिह्नित कर विभाग को ब्यौरा भेजा है. संबंधित प्रक्रिया के तहत किसी एक स्थान का अंतिम चयन कर लीज की औपचारिकताएं पूरी की जायेंगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा.

लकड़ी का प्रयोग कम, प्रदूषण भी नहीं

शहर में विद्युत शवदाह गृह होने के बावजूद अधिकांश लोग पारंपरिक रूप से लकड़ी से शवों को अंत्येष्टि करते हैं. जिससे वायु प्रदूषण के साथ वन संपदा का भी हनन होता है. ईशा फाउंडेशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर के योग और ध्यान आश्रम के अतिरिक्त तमिलनाडु में लगभग 15 शवदाह गृह की स्थापना की गयी है, जो गैस आधारित है और पर्यावरण के दृष्टिकोण से अनुकूल है. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य में छह जिलों में गैस आधारित शवदाह गृह की स्थापना की जायेगी, जिसमें भागलपुर भी शामिल है.

पर्यावरण और सुविधा पर दिया विशेष जोर

गैस आधारित शवदाह गृह से प्रदूषण कम होता है, समय बचता है (लगभग 10-15 मिनट), और यह पर्यावरण के अनुकूल है. लकड़ी पर निर्भरता घटेगी. सुविधाजनक अंतिम संस्कार किया जा सकेगा.

जानें, कैसे काम करता है यह

ईंधन: यह प्राकृतिक गैस या प्रोपेन पर चलता है.प्रक्रिया: शरीर को एक विशेष कक्ष (रिटॉर्ट) में रखा जाता है, जहां उच्च तापमान (लगभग 1300 डिग्री सेल्सियस) पर दहन होता है.

प्रदूषण नियंत्रण: इसमें प्रदूषण कम होता है और निकलने वाली हवा को फिल्टर करने के लिए चिमनी प्लांट भी लगाये जाते हैं.समय: यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत कम समय (10-15 मिनट) लेता है.

पर्यावरण के अनुकूल: लकड़ी की कटाई नहीं होती और हानिकारक गैसें कम निकलती हैं, जिससे प्रदूषण घटता है.

कोट

नगर विकास विभाग से गैस आधारित शवदाह गृह के लिए जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट मांगी गयी थी. बरारी और भूतनाथ मंदिर मार्ग में जगह चिह्नित की ब्यौरा भेज दिया गया है.

आदित्य जायसवाल, योजना शाखा प्रभारीनगर निगम भागलपुर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KALI KINKER MISHRA

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By KALI KINKER MISHRA

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