सुलतानगंज के सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका: लागू होगा ‘पढ़िए-समझिए-करिए-सीखिए’ मॉडल

नेतृत्व संवर्धन कार्यशाला
NEP Project Based Learning: नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत सुलतानगंज प्रखंड के स्कूलों में बच्चों के समग्र विकास (हॉलिस्टिक डेवलपमेंट) का खाका तैयार; विज्ञान और गणित को रुचिकर बनाने के लिए प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग को किया गया अनिवार्य.
मुख्य बातें:
सुलतानगंज, भागलपुर से शुभंकर की रिपोर्ट
NEP Project Based Learning: सुलतानगंज प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में अब स्कूली शिक्षा का पारंपरिक ढर्रा पूरी तरह बदलने जा रहा है. केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बच्चों के हॉलिस्टिक डेवलपमेंट (समग्र विकास) को लेकर एक व्यापक रोडमैप तैयार कर लिया गया है. अब शिक्षा का मुख्य फोकस बच्चों को केवल रटकर परीक्षा पास कराने और अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनमें विषय की वैचारिक समझ, तार्किक सोच, नवाचार (इन्नोवेशन) और व्यावहारिक ज्ञान की क्षमता विकसित की जाएगी. इसी कड़ी में ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कर नई शिक्षण पद्धति को लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है.
‘पढ़िए–समझिए–करिए–सीखिए’ मॉडल पर वर्कशॉप; विज्ञान-गणित के शिक्षकों को ट्रेनिंग
- नेतृत्व संवर्धन कार्यशाला: इस नई नीति को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए सुलतानगंज में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विज्ञान और गणित विषय के नामित शिक्षकों ने भाग लिया.
- प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर: कार्यशाला में शिक्षकों को “पढ़िए–समझिए–करिए–सीखिए” मॉडल की बारिकियों से अवगत कराया गया. इसका मुख्य उद्देश्य कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड केंद्रित पढ़ाई को हटाकर बच्चों की सीधी सहभागिता (एक्टिव पार्टिसिपेशन) को बढ़ाना है.
- माइक्रो इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट: कार्यशाला के दौरान प्रखंड तकनीकी सदस्य शंकर कुमार राम, प्रशांत शर्मा और संकुल समन्वयक सदाशिव कुमार व संजय कुमार ने शिक्षकों को ‘माइक्रो इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट’ तैयार करने और साक्ष्य आधारित आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के तकनीकी गुर सिखाए.
कमजोर बच्चों के लिए चलेगी ‘रिमेडियल क्लास’; किताबों से बाहर निकलेगा ज्ञान
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) तनु कुमारी ने रणनीति साझा करते हुए बताया कि प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित मूल्यांकन (असेसमेंट) किया जाएगा. जो बच्चे पढ़ाई में पीछे छूट रहे हैं या जिन्हें किसी खास टॉपिक में दिक्कत है, उनके लिए विशेष सुधारात्मक कक्षाएं (रिमेडियल टीचिंग) चलाई जाएंगी. इसके साथ ही ‘प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग’ (PBL) के तहत बच्चों को पाठ्यपुस्तकों के रटंत ज्ञान से बाहर निकालकर उनके दैनिक जीवन, परिवार, समाज और स्थानीय समस्याओं से जुड़े व्यावहारिक प्रोजेक्ट दिए जाएंगे ताकि खेल-खेल में उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो सके.
NEP Project Based Learning: सरकारी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू होगी पीबीएल व्यवस्था
शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किया है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विज्ञान एवं गणित के सभी शिक्षक अपने-अपने आवंटित विद्यालयों में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) को अनिवार्य रूप से लागू करेंगे.
इस नीति के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए विज्ञान और गणित जैसे कठिन माने जाने वाले विषय भी काफी सरल, सुलभ और रुचिकर हो जाएंगे. विभाग का मानना है कि इस दूरगामी पहल से न केवल सरकारी स्कूलों की साख बहाल होगी, बल्कि सुदूर इलाकों के बच्चे भी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर बन सकेंगे.
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By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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