गंगा घाट पर स्नान के दौरान डूबा 15 वर्षीय किशोर, परिजनों में कोहराम; 2 महीने में आधा दर्जन हादसे

डूबे युवक की तलाश जारी
Sultanganj Namami Gange Ghat: श्रावणी मेले से ठीक पहले सुलतानगंज के असुरक्षित गंगा घाटों ने फिर ली एक मासूम की जान; नमामि गंगे घाट पर परिवार के साथ आए किशोर के डूबने के बाद घाटों की सुरक्षा और एसडीआरएफ की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल.
मुख्य बातें:
सुलतानगंज, भागलपुर से शुभंकर की रिपोर्ट
Sultanganj Namami Gange Ghat: सोमवार को शहर के प्रमुख नमामि गंगे घाट पर गंगा स्नान करने आए एक 15 वर्षीय किशोर की गंगा की तेज और अनियंत्रित जलधारा में बह जाने से गहरे पानी में डूबने की दर्दनाक घटना सामने आई है. घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में कोहराम और चीख-पुकार मची हुई है. स्थानीय गोताखोरों की मदद से मंगलवार को दूसरे दिन भी नदी के विभिन्न हिस्सों में डूबे युवक की सघन तलाश जारी है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है. इस हादसे ने 30 जुलाई से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले से पूर्व प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है.
नवादा पंचायत का रहने वाला था किशोर; 2 महीने में डूब चुके हैं 6 लोग
- पीड़ित की पहचान: गंगा की तेज धारा में विलीन हुए अभागे किशोर की पहचान सुल्तानगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाली नवादा पंचायत के अठगामा गांव निवासी अनुज मंडल के 15 वर्षीय पुत्र रमण कुमार के रूप में की गई है. वह सोमवार को अपने परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए घाट पर आया था.
- हादसों का गढ़ बने घाट: परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि बीते महज दो महीनों के भीतर सुलतानगंज के विभिन्न घाटों पर डूबने की करीब आधा दर्जन (6) बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इनमें से कई मामलों में लोगों की अकाल मौत हो चुकी है, जबकि कुछ लापता लोगों का शव कई दिनों बाद भी बरामद नहीं किया जा सका है.
केवल ‘सर्च ऑपरेशन’ तक सीमित रहता है प्रशासन; न चेतावनी बोर्ड न डेंजर मार्क
स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट आरोप है कि हर साल विशेषकर सावन के पवित्र महीने और विभिन्न बड़े धार्मिक त्यौहारों पर यहाँ डूबने की घटनाएं आम बात हो गई हैं. लेकिन स्थानीय प्रशासन का रवैया बेहद उदासीन है. हादसों के बाद प्रशासन केवल ‘खोज अभियान’ (सर्च ऑपरेशन) चलाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है. घाटों पर गहरे पानी को चिन्हित करने के लिए न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई है, न लाल झंडे लगाए गए हैं और न ही पर्याप्त संख्या में चेतावनी बोर्ड या खतरे के संकेतक (Danger Marks) लगाए गए हैं.
Sultanganj Namami Gange Ghat: मेले से पहले सुरक्षा मजबूत करने की उठी मांग; 12 घंटे तैनात हो SDRF
30 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावणी मेला 2026 में देश-विदेश के लाखों कांवरिए और श्रद्धालु प्रतिदिन इसी उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाने सुल्तानगंज पहुंचेंगे. ऐसे में यदि वर्तमान समय रहते सुरक्षा तंत्र को अपग्रेड नहीं किया गया, तो सावन के दौरान किसी बहुत बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.
हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे युवा सामाजिक नेता सन्नी चौधरी ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग करते हुए कहा कि केवल सावन और भादो के दो महीनों को छोड़कर बाकी के 10 महीनों में घाटों को लावारिस छोड़ दिया जाता है. उन्होंने मांग की कि चौबीसों घंटे नहीं तो कम से कम हर दिन सुबह 6 से शाम 6 बजे तक (12 घंटे) एसडीआरएफ (SDRF) की एक हाई-टेक मोटरबोट और गोताखोरों की विशेष टीम को नमामि गंगे घाट और अजगैबीनाथ घाट पर स्थाई रूप से मुस्तैद रखा जाए, ताकि किसी भी डूबते हुए व्यक्ति की जान समय रहते बचाई जा सके.
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लेखक के बारे में
By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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