रोहिणी नक्षत्र के साथ खेतों में लौटी रौनक, धान की बुआई में जुटे भागलपुर के किसान

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 15 Jun 2026 11:24 AM

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Rohini Nakshatra Farming: रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश और प्री-मानसून की बारिश ने भागलपुर जिले के किसानों के चेहरे खिला दिए हैं. खेतों में नमी बढ़ने के साथ ही धान की बुआई और नर्सरी तैयार करने का काम तेज हो गया है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर बुआई और उपयुक्त बीज चयन से इस वर्ष बेहतर उत्पादन की उम्मीद है.

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भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट

Bhagalpur News : रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश और प्री-मानसून की बारिश के साथ भागलपुर जिले में खरीफ खेती की गतिविधियां तेज हो गई हैं. खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद किसान धान की नर्सरी तैयार करने और बिचड़ा गिराने में जुट गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से शाम तक किसानों की चहल-पहल खेतों में देखी जा रही है. जिला कृषि पदाधिकारी प्रेमशंकर प्रसाद ने बताया कि धान की अच्छी पैदावार के लिए उपयुक्त किस्म की समय पर बुआई बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि देरी से बुआई करने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. हालांकि कुछ निचले इलाकों में अधिक नमी और जलजमाव के कारण किसानों को खेत तैयार करने में कठिनाई हो रही है.

नौ प्रखंडों में धान खेती की तैयारियां तेज

भागलपुर जिले के जगदीशपुर, शाहकुंड, सन्हौला, सुलतानगंज, पीरपैंती, नाथनगर, सबौर, गोराडीह और कहलगांव क्षेत्र धान उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. इन इलाकों में प्री-मानसून की बारिश के बाद किसान खेतों की जुताई और बुआई की तैयारियों में जुट गए हैं.जगदीशपुर के किसान राजशेखर ने बताया कि समय पर हुई बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है. वहीं शाहकुंड के किसान शिरोमणि और नाथनगर के गुंजेश गुंजन ने कहा कि रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जो बिचड़ा गिराने के लिए अनुकूल मानी जाती है.

कम अवधि और मध्यम अवधि की किस्मों पर जोर

कृषि विभाग के अनुसार कम अवधि वाली प्रमुख किस्मों में सहभागी, सबौर दीप, हर्षित, अभिषेक, सीओ-51, स्वर्ण श्रेया, राजेंद्र भगवती, राजेंद्र कस्तूरी और प्रभात शामिल हैं.वहीं मध्यम अवधि की प्रजातियों में डीआरआर-42, डीआरआर-44, संभा सब-1, एमटीयू-1001, बीपीटी-5204, राजेंद्र श्वेता और सबौर अर्धजल प्रमुख हैं.

मृगशिरा नक्षत्र तक है बुआई का सुनहरा अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम अवधि की धान किस्मों की बुआई 8 जून से 21 जून तक मृगशिरा नक्षत्र में सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस अवधि में राजेंद्र कस्तूरी, आईआर-36, आईआर-64, राजेंद्र धान-202, सरयू-52, कामिनी कतरनी, सबौर श्री, भागलपुरी कतरनी और सबौर हर्षित धान की बुआई की जा सकती है.

बीजोपचार से मिलेगा रोगों से बचाव

पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक सुजीत कुमार पाल ने किसानों को बुआई से पहले बीजोपचार करने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि उपचारित बीज मिट्टी जनित रोगों से सुरक्षित रहते हैं और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है.उन्होंने कहा कि प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी, 2 ग्राम थीरम या 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरीडी से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए.

खेती के लिए शुभ माने जाते हैं ये छह नक्षत्र

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ मिश्रा के अनुसार रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, हस्त, चित्रा और स्वाति नक्षत्र कृषि कार्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इन नक्षत्रों में की गई खेती को परंपरागत रूप से शुभ और लाभकारी माना जाता है.उन्होंने बताया कि मृगशिरा नक्षत्र के दौरान बढ़ने वाली गर्मी खर-पतवार को कम करने में मदद करती है. यही कारण है कि अधिकांश किसान रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र में धान की नर्सरी तैयार करना पसंद करते हैं.

60 फीसदी किसानों ने डाल दी धान की नर्सरी

कृषि जानकारों के अनुसार जिले में लगभग 60 प्रतिशत किसान धान की नर्सरी डाल चुके हैं. यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहता है तो इस वर्ष धान उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है.

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