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जप, तप, साधना, आराधना का अवसर है पर्युषण महापर्व, कर सकते हैं आत्मशोधन

Updated at : 01 Sep 2024 9:29 PM (IST)
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जप, तप, साधना, आराधना का अवसर है पर्युषण महापर्व, कर सकते हैं आत्मशोधन

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा एवं तेरापंथी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को नयाबजार स्थित उपासना

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श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा एवं तेरापंथी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को नयाबजार स्थित उपासना केंद्र में पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ, जाे कि नौ सितंबर तक चलेगा. दिल्ली से पधारीं उपासिका मंजू नाहटा और भारती रांका द्वारा खाद्य संयम दिवस के उपलक्ष्य पर किये गये प्रवचन का लाभ आगंतुकों को मिला.

उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है. पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है. इसमें आत्मा की उपासना की जाती है. जैन धर्म की त्याग प्रधान संस्कृति में पर्युषण पर्व का अपना अपूर्व एवं विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है. यह एकमात्र आत्मशुद्धि का प्रेरक पर्व है. पर्युषण महापर्व जप, तप, साधना, आराधना, उपासना, अनुप्रेक्षा आदि अनेक प्रकार के अनुष्ठानों का अवसर है. अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर ले जाता है. तो जरूरी है प्रमादरूपी नींद को हटा कर इन आठ दिनों तक विशेष तप, जप, स्वाध्याय की आराधना करते हुए अपने आपको सुभाषित करते हुए अंतरात्मा में लीन हो जायें, जिससे हमारा जीवन सार्थक व सफल हो जायेगा.

जैन एकता का प्रतीक है पर्युषण पर्व

उपासिका मंजू नाहटा और भारती रांका ने आगे कहा कि पर्युषण पर्व का शाब्दिक अर्थ है आत्मा में अवस्थित होना. परि उपसर्ग व वस् धातु इसमें अन् प्रत्यय लगने से पर्युषण शब्द बनता है. पर्युषण यानी ‘परिसमन्तात-समग्रतया उषणं वसनं निवासं करणं’. पर्युषण का एक अर्थ है कर्मों का नाश करना. पर्युषण पर्व जैन एकता का प्रतीक पर्व है. जैन लोग इसे सर्वाधिक महत्व देते हैं. संपूर्ण जैन समाज इस पर्व के अवसर पर जागृत एवं साधनारत हो जाते हैं.

दूसरी तरफ श्वेतांबर जैन परंपरा में भाद्र व शुक्ला पंचमी का दिन समाधि का दिन होता है, जिसे संवत्सरी के रूप में पूर्ण त्याग-प्रत्याख्यान, उपवास, सामायिक, स्वाध्याय और संयम से मनाया जाता है.

दशलक्षण पर्व भाद्र शुक्ल पंचमी पर नौ से

सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक जैन ने बताया कि दिगंबर परंपरा में दशलक्षण पर्व भाद्र शुक्ल पंचमी नौ सितंबर और समापन 18 सितंबर अनंत चतुर्दशी को होगा. पर्युषण महापर्व में सभा अध्यक्ष विनोद बैद, महामंत्री अभिषेक बोथरा, संदीप बैद, संपत बैद, अशोक कोठारी, हंसराज बैद, चैनरूप बैद, गणेश बोथरा, टीकम चंद बेताला, विनीत बैद, मुकेश बैद, राजेश बैद, उज्जैन मालू, पंकज बोथरा, प्रिया बोथरा, पीहू सेठिया, शोभा बैद, रानू सेठिया, सरोज बोहरा, अनिता बैद, सपना मालू, मनीषा सेठिया, मानक बेताला, राजू बैद का योगदान रहा.

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