वरीय संवाददाता, भागलपुर
लोकमाता पुण्यश्लोका अहिल्या देवी होल्कर के त्रिशताब्दी जयंती समारोह समिति के तत्वावधान में आनंदराम ढांढनिया सरस्वती विद्या मंदिर में सेमिनार आयोजित किया गया. मौके पर मुख्य वक्ता होल्कर राष्ट्र सेविका समिति की सह कार्यवाहिका सुनीता हल्देकर ने कहा कि लोकमाता अहिल्या देवी ने स्कूली शिक्षा ग्रहण नहीं की थी. बावजूद लोकमाता को हिंदू धर्मग्रंथों के साथ-साथ भारत पर विशेष ज्ञान प्राप्त था. अहिल्या देवी की त्रिशताब्दी जन्मोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करने हुए सुनीता हल्देकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की भी चर्चा की.सनातन संस्कृति शिव बनकर शिव की आराधना का संदेश देती है
आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर होने वाले पंच परिवर्तन की जानकारी देते हुए महिला कल्याण और राष्ट्र के लिए महिलाओं की योगदान की चर्चा की. अहिल्या देवी शिव की भक्त थीं. आठ वर्ष की अवस्था में उन्होंने खेल-खेल में रेत से बनाए गये शिवलिंग की रक्षा के लिए संघर्ष कर लिया था. वे वसुधैव कुटुम्बकम के लिए जागरण करती थीं. वहीं, अध्यक्षीय भाषण में डॉ रोमा यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति शिव बनकर शिव की आराधना का संदेश देती है. डॉ मीरा सिंह ने विषय प्रवेश कराया. चालन सारिका सरोज ने व धन्यवाद ज्ञापन बबीता मोदी ने किया. मौके पर डेजी साह, मोनू सिंह, कुमारी शशांकी, माया देवी, लक्ष्मी साह सहित संदीप कुमार, आशीष कुमार, भाजपा नेता संतोष कुमार,सज्जन अवस्थी आदि मौजूद थे.
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