Bhagalpur news हरियो पंचायत का आहुती व बड़ी खाल विकास से वंचित

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Bhagalpur news हरियो पंचायत का आहुती व बड़ी खाल विकास से वंचित

जिले के हरियो पंचायत का पहला वार्ड आहुती व दूसरा वार्ड बड़ी खाल इन दिनों उपेक्षा व बदहाली की मार झेल रहा है.

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भागलपुर जिले के हरियो पंचायत का पहला वार्ड आहुती व दूसरा वार्ड बड़ी खाल इन दिनों उपेक्षा व बदहाली की मार झेल रहा है. 1500 की आबादी वाले इन दोनों गांवों में विकास नहीं हुआ है. दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद यहां बाढ़ प्रभावित लोगों तक आपदा राहत की एक भी किस्त नहीं पहुंची है. प्रशासन और सरकार दोनों की उदासीनता ने ग्रामीणों को वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा है. गांव में शिक्षा की स्थिति दयनीय है. पूरे क्षेत्र में बच्चों की पढ़ाई के लिए केवल एक प्राथमिक विद्यालय है. माध्यमिक या उच्च शिक्षा का कोई विद्यालय नहीं है. नतीजतन बच्चों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है या फिर दूरदराज जाना पड़ता है. शिक्षा के इस संकट ने ग्रामीणों के भविष्य को अंधकारमय कर दिया है. गांव आज भी पूरी तरह सड़क विहीन है. बरसात में समस्या विकराल हो जाती है जब चारों ओर पानी भर जाता है. खेती-किसानी से जुड़े इन गांवों में सरकार से एक भी नलकूप नहीं लगाया है

किसान बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं. खेती पूरी तरह जोखिम में रहती है. गांव में आवागमन की स्थिति खराब है. यहां आने-जाने का एकमात्र साधन नाव है. वह भी निजी रूप से संचालित होती है और इसके लिए ग्रामीणों को पैसे चुकाने पड़ते हैं. सरकार ने नाव की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी है. राशन को लेकर लोगों में नाराजगी है. आहुती गांव के ग्रामीणों को राशन के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें परेशानी होती है. गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आज तक एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है. ग्रामीण खुले में शौच को मजबूर हैं. आहुती और बड़ी खाल के लोगों का आरोप है कि बीएलओ परशुराम मंडल नाम जोड़ने के एवज में खुलेआम 200 रुपये की वसूली करता है. पीने के पानी की गांव में समस्या है. आजतक एक चापाकल इस गांव में नहीं दिया गया है. बीडीओ ने कहा कि पैसे की वसूली की जांच करवायी जायेगी. ग्रामीणों का कहना है कि केवल जांच का भरोसा काफी नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि इस तरह की लापरवाही व भ्रष्टाचार पर रोक लग सके. यह इलाका बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, शौचालय और राहत की योजनाएं कागजों में सिमटी गयी है.

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Jitendra Tomar

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