Bhagalpur News. ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था का तीखा विरोध, चेंबर और निगम को ठहराया जिम्मेदार

Published by :KALI KINKER MISHRA
Published at :25 Apr 2026 10:02 PM (IST)
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Bhagalpur News. ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था का तीखा विरोध, चेंबर और निगम को ठहराया जिम्मेदार

ट्रेड लाइसेंस की कुव्यवस्था के लिए निगम व चेंबर को जिम्मेदार ठहराया.

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-व्यवसायी प्रतीक झुनझुनवाला ने नगर निगम व इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज को पत्र भेजकर उठायी मांग

व्यवसायी प्रतीक झुनझुनवाला ने वर्तमान ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था, प्रशासनिक रवैये तथा प्रतिनिधि संस्थाओं को पत्र लिखा है. उनपर निष्क्रियता का आरोप लगाया है. नगर निगम प्रशासन एवं इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज को पत्र भेजा. पत्र के जरिये ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था का तीखा विरोध किया और चेंबर व नगर निगम दोनों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वर्तमान व्यवस्था कानूनी, संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है तथा इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है.

प्रमुख आपत्ति के तौर बताया है कि ट्रेड लाइसेंस की वैधता अप्रैल से मार्च तक होती है, इसके बावजूद जिस प्रकार से लाइसेंस शिविर और वसूली की प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह अनावश्यक आर्थिक बोझ और भ्रम उत्पन्न करती है.

ट्रेड लाइसेंस नियामक, न कि प्रतिबंधात्मक

पत्र में स्पष्ट किया है कि ट्रेड लाइसेंस एक नियामक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना है. इसे व्यवसाय को नियंत्रित, बाधित या दंडित करने के साधन के रूप में उपयोग करना असंवैधानिक है. टर्नओवर आधारित शुल्क पूर्णतः अवैध और मनमाना है. ट्रेड लाइसेंस शुल्क को व्यापार के टर्नओवर से जोड़ना अनुचित है. कानूनी रूप से अस्थिर है. नियामक शुल्क को छुपे हुए कर में बदल देता है. संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करता है. यदि कोई वर्गीकरण किया जाना हो, तो वह केवल व्यवसाय के प्रकार, जोखिम या प्रभाव के आधार पर होना चाहिए, न कि आय या टर्नओवर के आधार पर.

नवीनीकरण की बाध्यता पर सवाल

सभी प्रकार के व्यवसायों के लिए हर साल ट्रेड लाइसेंस नवीनीकरण की बाध्यता पर भी सवाल उठाया गया है. कम जोखिम वाले व्यवसायों के लिए यह केवल अनुपालन का बोझ है, जिसका कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं है. उन्होंने मांग की है कि ट्रेड लाइसेंस केवल खतरनाक या उच्च-जोखिम वाले व्यवसायों तक सीमित होना चाहिए, न कि सभी पर लागू किया जाये. एक गंभीर समस्या यह भी सामने आयी है कि यदि किसी व्यापारी ने पहले लाइसेंस लिया था, फिर वर्षों तक व्यवसाय बंद रहा और बाद में पुनः शुरू किया. तो ऐसे मामलों में नया लाइसेंस लेना होगा या पुराना नवीनीकरण होगा. बीच के वर्षों का शुल्क कैसे निर्धारित होगा.

इस विषय में कोई स्पष्ट नीति नहीं होने से मनमानी वसूली और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है.

सीलिंग की धमकी असंवैधानिक

नगर निगम द्वारा दुकानों को सील करने की धमकी पर भी गंभीर आपत्ति जताई है. सीलिंग एक कठोर और दंडात्मक कार्रवाई है, जो सीधे आजीविका पर प्रभाव डालती है, और इसे सामान्य प्रवर्तन उपाय के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. प्रतीक झुनझुनवाला ने दोनों संस्थाओं से मांग की है कि ट्रेड लाइसेंस शुल्क को तर्कसंगत और कानूनी आधार पर पुनर्निर्धारित किया जाये. टर्नओवर आधारित शुल्क व्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जाये. सीलिंग जैसी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाये. स्पष्ट और पारदर्शी नीति एवं दिशा-निर्देश जारी किए जाएं.

चैंबर व्यापारियों के पक्ष में सक्रिय और स्वतंत्र भूमिका निभाएं.

उन्होंने कहा कि अंधेर नगरी चौपट राजा की यह स्थिति तब बनती है जब नियम मनमाने हों और संस्थाएं मौन रहे. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता, और ठोस कार्रवाई अपेक्षित है. अन्यथा, यह मुद्दा आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई, सार्वजनिक आंदोलन और संस्थागत बदलाव का रूप ले सकता है.

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