दलालों के चक्कर में युवक का कटा पैर, JLNMCH से आयुष्मान अस्पताल आना पड़ा महंगा
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Jul 2021 2:10 PM
भागलपुर जेएलएनएमसीएच अस्पताल में दलालों की सक्रियता बढ़ चुकी है. दलालों के चक्कर में पड़कर एक युवक को अपना पैर गंवाना पड़ गया. मामले का खुलासा होने के बाद अब तूल पकड़ चुका है. दलालों द्वारा सस्ता इलाज का भरोसा दिलाने के बाद उनके साथ एक निजी अस्पताल जाना युवक को महंगा पड़ा और उसे एक पैर गंवाना पड़ा.
भागलपुर जेएलएनएमसीएच अस्पताल में दलालों की सक्रियता बढ़ चुकी है. दलालों के चक्कर में पड़कर एक युवक को अपना पैर गंवाना पड़ गया. मामले का खुलासा होने के बाद अब तूल पकड़ चुका है. दलालों द्वारा सस्ता इलाज का भरोसा दिलाने के बाद उनके साथ एक निजी अस्पताल जाना युवक को महंगा पड़ा और उसे एक पैर गंवाना पड़ गया.
मामला सबौर थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव का है. यहां के 40 वर्षीय सुभाष कुमार के पैर में सड़क हादसे में गंभीर चोट आयी थी. घटना के बाद पुलिस ने सुभाष को जेएलएनएमसीएच में भर्ती कराया. सुभाष के अनुसार उसी दौरान उनके पास तीन दलाल आये और उन्हें बेहतर व सस्ता इलाज का भरोसा दिला कर एक निजी अस्पताल लेकर चले गये. सुभाष के अनुसार वहां उनसे विभिन्न कारण बता कर मोटी रकम ली गयी. फिर बताया गया कि उनका पैर काटना पड़ेगा और पैर काट दिया गया.
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में भरती मरीज सुभाष कुमार को जीरो माइल स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल ले जाने के मामले में सोमवार को जांच शुरू हुई. अधीक्षक डॉ एके दास ने विभागाध्यक्ष डॉ प्रो दिलीप कुमार सिंह से मामले की जानकारी ली. अधीक्षक ने कर्मी के खिलाफ सबूत मिलने की बात भी कही है.
सुभाष राजमिस्त्री का काम करते हैं. 31 मई को वह सड़क हादसे का शिकार हो गये थे. पुलिस ने उन्हें मायागंज मेडिकल अस्पताल पहुंचाया. इमरजेंसी से सुभाष को ट्रामा वार्ड भेजा गया. उनका आरोप है कि वह रात भर दर्द से चिल्लाते रहे, पर दर्द कम करने के लिए डॉक्टर और नर्स ने पहल नहीं की. इसी बीच अस्पताल का ही एक कर्मी दो लोगों के साथ आया. उन्हें आयुष्मान अस्पताल जाने की सलाह दी. जीरो माइल के पास स्थित उक्त आयुष्मान में सस्ता और बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया. दर्द से परेशान रहने के कारण वह उनकी बातों में आ गये.
सुभाष के अनुसार उक्त अस्पताल में इलाज पर एक लाख 75 हजार रुपये खर्च की बात बतायी गयी. आग्रह पर एक लाख 55 हजार रुपये पर माने. बात पैर को ठीक करने की थी, लेकिन डॉक्टर ने दायें पैर को काट दिया. इस दौरान चार यूनिट खून भी चढ़ाया गया. इसका चार्ज 30 हजार रुपया किया गया. अस्पताल में चार दिन रहे. वहां रूम चार्ज तीन हजार रुपया अलग से लिया जा रहा था. जब उनके पास के पैसे खत्म हो गये, तो घर भेज दिया गया. उस दौरान भी लगभग 86 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया. घर पर पैर से मवाद आने लगा, तो फिर उक्त निजी अस्पताल गये, तो वहां बिना पैसा इलाज करने से मना कर दिया गया. अंत में जेएलएनएमसीएच पहुंचे.
इस मामले में यह पेंच फंसा है कि सुभाष का मामला पुलिस केस था, फिर भी दलाल उसे लेकर बाहर चले गये. मायागंज अस्पताल में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं फिर कैसे मरीज को बाहर जाने की जरूरत पड़ी यह भी जांच का विषय है.
अधीक्षक ने सीसीटीवी के फुटेज की जांच की. उन्होंने कहा कि मंगलवार को मरीज सुभाष से लिखित शिकायत ली जायेगी. अधीक्षक ने कहा कि अगर अस्पताल में भर्ती कोई मरीज निजी क्लिनिक जाना चाहता है, तो उसको रेफर किया जाये, लेकिन उससे पहले मरीज और उसके परिजनों से लिखा कर लेना होगा.
अस्पताल में भर्ती मरीज सुभाष ने कहा की उसके साथ निजी हॉस्पिटल ने गलत किया है. जिस रोग को ठीक करने में 50 हजार भी खर्च नहीं होता, उसे ठीक करने में हमें अपनी जमीन बेचनी पड़ी. सोमवार को हमारे पास कोई भी पूछताछ करने नहीं आया है. हम तो सच्चाई ही कहेंगे.
दलाली के इस मामले की जांच की गयी है. इसमें कर्मी के खिलाफ सबूत मिला है. इसके आधार पर श्रवण के खिलाफ शोकॉज जारी किया गया है. इसमें जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी. किसी को छोड़ा नहीं जायेगा.
— डॉ एके दास, अस्पताल अधीक्षक
POSTED BY: Thakur Shaktilochan
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