ePaper

Corona Effect: पंडितजी को डरा रहा कोरोना, श्राद्ध कराने में भी कर रहे ना-ना, पुरोहित ढूंढने झारखंड तक जा रहे लोग

Updated at : 08 May 2021 1:30 PM (IST)
विज्ञापन
Corona Effect: पंडितजी को डरा रहा कोरोना, श्राद्ध कराने में भी कर रहे ना-ना, पुरोहित ढूंढने झारखंड तक जा रहे लोग

मंदिर व धार्मिक स्थलों पर ताला लगने व शादी-विवाह सीमित होने के बाद पंडितजी की रोजी-रोटी पर ग्रहण लग गया है. कोरोना से लगातार हो रही मौत के बाद परिजनों को श्राद्ध कराने में मशक्कत करनी पड़ रही है. पंडितजी को कोरोना इतना डरा रहा है कि श्राद्ध कराने में ना-ना करने लगे हैं.

विज्ञापन

दीपक राव,भागलपुर: मंदिर व धार्मिक स्थलों पर ताला लगने व शादी-विवाह सीमित होने के बाद पंडितजी की रोजी-रोटी पर ग्रहण लग गया है. कोरोना से लगातार हो रही मौत के बाद परिजनों को श्राद्ध कराने में मशक्कत करनी पड़ रही है. पंडितजी को कोरोना इतना डरा रहा है कि श्राद्ध कराने में ना-ना करने लगे हैं.

कर्मकांड के लिए गायत्री मत व आर्य समाज की शरण में जा रहे लोग :

सनातन मार्गी भी कम समय में कर्मकांड पूरा कराने के लिए गायत्री मत व आर्य समाज की शरण में जाने लगे हैं. शहर के लोगों को श्राद्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के पंडितजी की शरण में जाना पड़ रहा है. उन्हें मुंहमांगा दक्षिणा देने की सिफारिश कर रहे हैं, ताकि श्राद्धकर्म पूरा हो और मृत आत्मा को शांति मिल सके.

पंडितजी के लिए गोड्डा, बांका व मुंगेर तक पहुंच रहे लोग

कोरोना से हुई मौत के बाद पंडितजी श्राद्ध कराने से कतरा रहे हैं. उन्हें डर है कि उनके परिजनों को भी कोरोना का संक्रमण हो जायेगा. पंडितजी बड़ी मुश्किल से मिल रहे हैं. कम से कम समय में कर्मकांड पूरा कराने के लिए लोग जुगाड़ लगा रहे हैं. पंडितजी को ढूंढ़ने के लिए लोग गोड्डा, बांका व मुंगेर तक जा रहे हैं.

Also Read: विश्व प्रवासी पक्षी दिवस आज, बिहार के इस जिले में हर साल एक लाख प्रवासी पक्षियों का लगता है जमावड़ा
कहते हैं विभिन्न मत से जुड़े पंडितजी

सनातन मार्ग में मृत्यु के 10वें दिन क्षौर कर्म होता है, 11वें दिन श्राद्धकर्म, 12वें दिन कर्म कांड पूरा होता है और 13वें दिन पूजा-पाठ से संपन्न होता है. पंडितजी का दक्षिणा 9100 होता है. इसके अलावा अन्य खर्च होता है. पंडितजी कोरोना से डर रहे हैं. ऐसे में यजमान अधिक से अधिक दक्षिणा का प्रलोभन देकर कर्मकांड कराना चाहते हैं. सनातन मार्ग के लोगों के लिए यह बेहतर नहीं है कि कम समय में कर्मकांड कराने के लिए दूसरे मार्ग में जायें.

पंडित वेदानंद झा, बूढ़ानाथ मंदिर

लगातार बढ़ता जा रहा श्राद्ध के लिए बुलावा

गायत्री परिवार में श्राद्ध के लिए कर्मकांड अधिक से अधिक दो दिन और कम से कम एक दिन में पूरा हो जाता है. पहले दिन तर्पण और दूसरे दिन पिंडदान व पंचदान होता है. इसके बाद मृतक की आत्मा को शांति मिलती है. अभी कोरोना से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं. पहले इस समय में एक-दो लोगों के श्राद्ध के लिए कॉल आता था. अभी पांच से छह लोगों का कॉल आ रहा है. गायत्री मत में 2500 रुपये दक्षिणा लगता है.

विंदेश्वरी प्रसाद सिंह, कर्मकांडी, गायत्री परिवार

केस स्टडी-1

पटेल नगर, सिकंदरपुर में मुकेश प्रसाद सिंह का निधन कोरोना से हो गया था. श्राद्ध कराने के लिए पंडितजी को ढूढ़ने में काफी परेशानी हुई. गोड्डा से गायत्री मत के पंडितजी को लाना पड़ा, इसके बाद ही श्राद्ध कर्म पूरा हो सका.

केस स्टडी- 2

बाल्टी कारखाना हुसैनाबाद में विनोद प्रसाद के बड़े भाई का निधन हो गया. श्राद्ध कराने के लिए पंडितजी को ढूंढ़ना चुनौती बन गया. लगातार प्रयास के बाद गायत्री मत से श्राद्ध कर्म कराने का विचार हुआ, ताकि कम से कम समय में संपन्न कराना था. चंपानगर में एक व्यक्ति के फुआ सास का निधन हो गया. उनके यहां आर्य समाज से श्राद्ध कर्म पूरा कराया गया. आर्य समाज में कम समय व कम खर्च में पूरा कर्मकांड हो जाता है.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन