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बिहार बंगाली समिति ने बंगला मातृभाषा शहीद दिवस मनाया

Updated at : 19 May 2024 9:13 PM (IST)
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बिहार बंगाली समिति ने बंगला मातृभाषा शहीद दिवस मनाया

बिहार बंगाली समिति, बरारी शाखा की ओर से रविवार को रिफ्यूजी कॉलोनी में बंगला मातृभाषा शहीद दिवस मनाया गया.

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बिहार बंगाली समिति, बरारी शाखा की ओर से रविवार को रिफ्यूजी कॉलोनी में बंगला मातृभाषा शहीद दिवस मनाया गया. अध्यक्ष तरुण घोष ने कहा कि बंगला भाषियों की बहुलता की वजह से असम में बंगला को राजभाषा की दर्जा प्राप्त रहा. 1961 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बिमला प्रसाद चलीहा बंगला के स्थान पर असमिया को सरकारी भाषा का दर्जा देने का काम किया. इसी विरोध में बहुसंख्यक बंगाली समाज आंदोलन पर उतर गये. सरकार इसे दबाने के हर प्रकार कोशिश की. असम पुलिस के लाठीचार्ज व गोलीबारी में 11 आंदोलनकारी शहीद हुए. शहीदों की स्मृति में 19 मई को पूरे देश में मातृभाषा शहीद दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर सचिव असीम कुमार पाल, कोषाध्यक्ष अशोक चंद्र सरकार, तापस घोष, शांतनु गांगुली, दीपक कुमार मंडल, शैकत घोष, भगवान राजवंशी, हरेराम राजवंशी, रंजीत दास, विजय किशोर सरकार, सरिता सरकार, अनिता सिंह, अजय कुमार पाल, रतन राजवंशी, प्रियंका, भीम दास, सुब्रोत मालाकार आदि शामिल हुए

भागलपुर से चौथीराम यादव का गहरा संबंध था

माध्यम की ओर से हिंदी साहित्य के समीक्षक, आलोचक व साहित्यकार चौथीराम यादव के निधन पर कला केंद्र में श्रद्धांजलि सभा हुई. वक्ताओं ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि चौथी राम यादव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर रहकर सेवानिवृत हुए थे. भारतीय साहित्य में उनका विशिष्ट योगदान था. उन्हें साहित्य संबंधित साहित्य साधना सम्मान, सावित्री त्रिपाठी सम्मान, अस्मिता सम्मान, कबीर सम्मान अंबेडकर प्रियदर्शनी सम्मान, सत्राची सम्मान और लोहिया साहित्य सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया था. वह प्रख्यात साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी के शिष्य थे. श्रद्धांजलि सभा का संचालन शशि ने किया और अध्यक्षता किशन कालजयी ने की. अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए किशन कालजयी ने कहा कि भागलपुर से और भागलपुर के लोगों से चौथीराम यादव जी का गहरा संबंध था. वह कई बार यहां आ चुके थे. चौथीराम द्वारा साहित्य के क्षेत्र में अभी और योगदान की अपेक्षा थी. लेकिन उन्होंने जितना भी योगदान दिया वह भी एक मील का पत्थर है. डॉ योगेंद्र ने कहा कि चौथीराम यादव पर विशेष शोध की आवश्यकता है. रामशरण ने कहा कि चौथीराम यादव जी हाशिये पर रह रहे समाज के साथ हमेशा खड़े रहे. डॉ चैतन्य, कुमकुम, ललन, राहुल, दिव्यानंद, चंदन, राजकुमार, सार्थक, उज्जवल घोष, दिव्या गुप्ता आदि ने चाैथीराम यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

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