भागलपुर में मानसून की बेरुखी से धान की खेती पर संकट, किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी सलाह

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भागलपुर में मानसून की बेरुखी से धान की खेती पर संकट, किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी सलाह

मानसून की बेरुखी से धान की खेती पर संकट

Bhagalpur Weather Update: भागलपुर में मानसून की कमजोर सक्रियता से धान की बुआई प्रभावित हो रही है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को सिंचाई और धान की बुआई को लेकर जरूरी सलाह दी है. जानिए 4 से 8 जुलाई का मौसम पूर्वानुमान.

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भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur Weather Update: भागलपुर में मानसून की सुस्त चाल अब किसानों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बन गई है. मानसून के दस्तक दिए 20 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक जिले में वैसी बारिश नहीं हुई है, जिसकी खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती के लिए जरूरत होती है. खेत सूखे पड़े हैं और बड़ी संख्या में किसान अब तक धान का बिचड़ा तक नहीं गिरा पाए हैं.

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बारिश पूरे जिले में समान रूप से नहीं हो रही. कहीं कुछ देर के लिए तेज बारिश हो जाती है, तो कुछ किलोमीटर दूर स्थित गांवों में एक बूंद पानी भी नहीं गिरता. इस असमान बारिश ने किसानों की योजना बिगाड़ दी है और मौसम विभाग के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.

बारिश नहीं होने से धान की खेती पर बढ़ा संकट

भागलपुर और आसपास के इलाकों में खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान मानी जाती है. सामान्य तौर पर इस समय तक अधिकांश किसान बिचड़ा तैयार कर खेतों में लगाने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं. लेकिन इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है.

कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं. यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो धान की रोपाई में देरी होगी, जिसका असर उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर पड़ सकता है.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को दी अहम सलाह

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किसानों को मौजूदा मौसम को देखते हुए जरूरी सलाह दी है.

उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे इंतजार करने के बजाय मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का बिचड़ा खेतों में गिरा सकते हैं. बिचड़ा तैयार करने वाले खेत में आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करते रहें, ताकि नमी बनी रहे.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि किसान सबौर मोती धान और सबौर सोना जैसी किस्मों की सीधी बुआई भी कर सकते हैं. इससे बारिश में देरी होने की स्थिति में भी खेती का काम पूरी तरह प्रभावित नहीं होगा.

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Bhagalpur Weather Update: 4 से 8 जुलाई के बीच बारिश के आसार

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 4 से 8 जुलाई के बीच दक्षिण बिहार के जिलों में मौसम बदल सकता है.

इस अवधि में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है. वहीं बांका, गया, रोहतास और कैमूर के कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है.

मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. सुबह के समय हवा में नमी 70 से 75 प्रतिशत तथा दोपहर में 30 से 40 प्रतिशत रहने का अनुमान है. दक्षिण-पूर्व दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.

अब बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीद

भागलपुर के किसानों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं. यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित होता है और अच्छी बारिश होती है, तो धान की खेती को गति मिल सकती है. लेकिन यदि मानसून की यही बेरुखी जारी रही तो खरीफ सीजन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का उपयोग कर खेती की तैयारी जारी रखें, ताकि बारिश शुरू होते ही रोपाई का काम तेजी से किया जा सके.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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