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मायागंज व सदर अस्पताल में सीटी स्कैन जांच बंद, मरीज हो रहे परेशान

Updated at : 08 Jun 2024 9:18 PM (IST)
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मायागंज व सदर अस्पताल में सीटी स्कैन जांच बंद, मरीज हो रहे परेशान

मायागंज व सदर अस्पताल में सीटी स्कैन जांच बंद, मरीज हो रहे परेशान

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– सदर अस्पताल के मशीन का एयर कूलिंग सिस्टम व मायागंज अस्पताल के मशीन का यूपीएस खराब – दोनों अस्पतालों में 75 से अधिक मरीजों की जांच प्रभावित, कई मरीज जांच कराने गये निजी केंद्र वरीय संवाददाता, भागलपुर जिले प्रमुख सरकारी अस्पताल मायागंज व सदर में शनिवार को मरीजों की सीटी स्कैन जांच बंद रही. दोनों मशीनों में खराबी आने के कारण जहां गंभीर मरीजों को जांच के लिए निजी जांच केंद्र जाना पड़ा. वहीं कम गंभीर मरीजों मशीन ठीक होने का इंतजार करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल में शनिवार को सीटी स्कैन जांच कराने हबीबपुर से आये जावेद इकबाल ने बताया कि डॉक्टर ने छाती का सीटी स्कैन जांच कराने को कहा है. मशीन खराब होने के बाहर के निजी जांच केंद्र पर 6600 रुपये की मांग की जा रही है. मालूम हो कि सदर अस्पताल में इसका रेट महज 1350 रुपये हैं. इधर, मायागंज अस्पताल में इंडोर में भर्ती महिला मरीज के परिजन विकास कुमार ने बताया कि मां को ब्रेन स्ट्रोक आया है. यहां पर सीटी स्कैन जांच बंद है. डाॅक्टर के कहने पर जल्दबाजी में निजी सेंटर जांच के लिए जा रहे हैं. बता दें कि दोनों अस्पतालों के सीटी स्कैन सेंटर पर रोजाना औसतन 75 मरीजों की जांच होती है. इनमें मायागंज अस्पताल में रोजाना औसतन 25 व सदर अस्पताल में औसतन 50 मरीजों की जांच होती है. जांच बाधित रहने के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है. बिना रिपोर्ट के डॉक्टर दवा भी नहीं दे रहे हैं. सोमवार से शुरू हो सकती है सीटी स्कैन जांच : मायागंज अस्पताल में बीते पांच दिन से जांच बंद है. रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ सचिन कुमार ने बताया कि मशीन की मरम्मत का काम जारी है. इसका यूपीएस जल गया है. सोमवार से जांच शुरू होगी. बता दें कि पांच दिन में करीब 250 मरीजों की जांच प्रभावित रही. इधर, सदर अस्पताल के प्रभारी डॉ राजू ने बताया कि मशीन का एयर कूलिंग सिस्टम खराब हाे गया है. एजेंसी के इंजीनियर ने कहा है कि साेमवार से चालू हाे जायेगा. मायागंज अस्पताल में एक अतिरिक्त मशीन की जरूरत : मायागंज अस्पताल का सीटी स्कैन मशीन को 2016 में इंस्टाल किया था. इस मशीन में आये दिन खराबी आती रहती है. इस मशीन के खराब होने से मरीजों के इलाज में काफी परेशानी होती है. जबकि बिहार के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन मशीन का संचालन किया जा रहा है. एचओडी डॉ सचिन कुमार ने बताया कि निजी एजेंसी को सिर्फ जगह देने की जरूरत है. सरकार को एक भी पैसा खर्च नहीं करना होगा. यह प्रक्रिया पूरी हो जाये तो अस्पताल के पास एक अतिरिक्त मशीन होगी. एक खराब होने के बाद दूसरा चालू रहेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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