bhagalpur news. महर्षि मेंहीं परमहंस जयंती समारोह 30 को, कुप्पाघाट आश्रम में तैयारी जोरों पर

अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से महर्षि मेंहीं परमहंस का जयंती समारोह का आयोजन 30 अप्रैल गुरुवार को कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम परिसर में होगा.
अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से महर्षि मेंहीं परमहंस का जयंती समारोह का आयोजन 30 अप्रैल गुरुवार को कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम परिसर में होगा. इसे लेकर तैयारी आखिरी चरण में है. महासभा की ओर से देशभर से आने वाले सत्संगियों के लिए भोजन, आवास, रोशनी, पेयजल समेत अन्य मूलभूत सुविधा की व्यवस्था की जा रही है. महामंत्री दिव्य प्रकाश ने बताया कि सद्गुरु की 142वीं जयंती समारोह पर सुबह 5:00 बजे प्रभातफेरी निकाली जायेगी. शोभायात्रा में गुरु महाराज जी का चित्र भव्य रथ पर रखकर सिल्क सिटी के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुन: आश्रम परिसर पहुंचेगी. शोभायात्रा में गाजे-बाजे, बैंड पार्टी, चार पहिया वाहन एवं दो पहिया वाहन, सत्संग प्रेमी, बूढ़े-बच्चे, नौजवान, महिलाएं आदि शामिल होंगे. 6:00 बजे स्तुति विनती, ग्रंथ पाठ व आरती होगी. इसके बाद संत मेंहीं सदगुरु महाराज की तस्वीर पर पुष्पांजलि का कार्यक्रम होगा. पुष्पांजलि होने के बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा. 11:00 बजे दिन से सामूहिक भंडारा शुरू होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे. दोपहर 2:00 बजे भजन-कीर्तन, स्तुति विनती प्रवचन होगा. महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर संत व संतमत के विद्वान प्रकाश डालेंगे. गुरुसेवी स्वामी भगीरथ दास जी महाराज, स्वामी प्रमोद बाबा, विवेकानंद बाबा, निर्मला बाबा, स्वामी सत्यप्रकाश बाबा, स्वामी परमानंद बाबा प्रवचन करेंगे. आयोजन को लेकर महासभा के मनु भास्कर, स्वामी पंकज बाबा, स्वामी रमेश बाबा, स्वामी संजय बाबा, स्वामी नाथू बाबा, अमित कुमार, सूरज कुमार, बादल कुमार आदि लगे हैं. सद्गुरु मेंहीं परमहंस जी महाराज 101 वर्ष से अधिक मानव शरीर में रहे स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने बताया कि सद्गुरु मेंहीं परमहंस जी महाराज 101 वर्ष से अधिक मानव शरीर में रहे. भागलपुर शहर के गंगा तट स्थित कुप्पाघाट आश्रम महर्षि मेंही परमहंस जी की साधना पीठ अलग ही पहचान बनाए हुए है. महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने यहीं पर एक प्राचीन गुफा में वर्षों साधना कर मोक्ष को प्राप्त कर अपने मानव शरीर को सार्थक किया. पंकज बाबा एवं संजय बाबा ने बताया कि मार्च 1933 से नवंबर 1934 तक 18 माह तक कुप्पाघाट भागलपुर आश्रम स्थित प्राचीन गुफा में कठिन साधना की.
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