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Bhagalpur News. 354 को 16 ग्रेस मार्क्स देकर किया पास, महालेखाकार ने विवि प्रशासन से पूछा किस नियम के आधार पर दिया गया ग्रेस मार्क्स

Updated at : 19 Jan 2026 11:59 PM (IST)
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Bhagalpur News. 354 को 16 ग्रेस मार्क्स देकर किया पास, महालेखाकार ने विवि प्रशासन से पूछा किस नियम के आधार पर दिया गया ग्रेस मार्क्स

ग्रेस मार्क्स देकर किया था पास, पूछा गया सवाल.

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प्री-पीएचडी परीक्षा. नियम ताक पर रख पीएचडी में एंट्री मामले में पांच साल बाद टीएमबीयू प्रशासन कटघरे में

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में प्री-पीएचडी (पैट) की परीक्षा में 354 असफल परीक्षार्थियों को 16 ग्रेस अंक दिये जाने का मामला पांच वर्षों बाद फिर से उठने लगा है. सरकार के ऑडिट विभाग की तरफ से ग्रेस अंक दिये जाने के मामले में विवि से जवाब मांगा गया है. इस बाबत महालेखाकार ने विवि प्रशासन को दिसंबर में ही पत्र भेजा है. पूछा कि किस नियम के आधार पर 16 ग्रेस मार्क्स दिया गया है. क्या ग्रेस अंक देने का प्रावधान है. बता दें कि वर्ष 2021 में विवि प्रशासन ने पैट परीक्षा में 354 असफल विद्यार्थियों को ग्रेस अंक देकर पास किया था. फिलहाल इस मामले में विवि के अधिकारी कुछ बोलने से बच रहे हैं. उस समय धांधली का आरोप लगाकर विभिन्न छात्र संगठनों ने आंदोलन भी किया था. इसकी शिकायत लोकभवन व उच्च शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारी से की गयी थी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया. वर्ष 2021 में पैट परीक्षा के संचालन को लेकर कमेटी गठित की गयी थी. उस समय विवि के पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो हनुमान प्रसाद पांडे थे. उन्होंने पैट परीक्षा के संचालन को लेकर पूर्व प्रतिकुलपति प्रो रमेश कुमार की अध्यक्षता में कमेटी गठित की. कमेटी की निगरानी में परीक्षा का आयोजन, कॉपी का मूल्यांकन व रिजल्ट जारी किया गया. बताया जा रहा हैं कि विभिन्न विषयों को लेकर करीब 450 सीट पीएचडी के लिए निर्धारित था. लेकिन विवि से निर्धारित सीट के अलावा 354 विद्यार्थियों पैट परीक्षा में सफल घोषित किया गया. उस समय सवाल उठा था कि 16 ग्रेस अंक ही क्यों दिया गया था. इससे कम या ज्यादा अंक नहीं दिया गया.

किस अधिकारी के फैसले पर नया नियम लागू हुआ

विवि के पूर्व अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि पैट परीक्षा 2021 में बनी कमेटी के अध्यक्ष रहे पूर्व प्रतिकुलपति प्रो रमेश कुमार ने नियम को ताक पर रखते हुए 16 ग्रेस अंक देने की नयी व्यवस्था लागू की. ताकि विवि के पूर्व पदाधिकारी के रिश्तेदार व शिक्षक के बच्चे जो कम नंबर आने से फेल हो गये थे. उन्हें 74 अंक आया था. उन्हें 16 ग्रेस अंक देकर पास कराना था.

अधिकांश ने कर ली है पीएचडी

विवि से मिली जानकारी के अनुसार 2021 पैट परीक्षा में जो 16 ग्रेस अंक से पास किया था. इसमें ज्यादातर ने पीएचडी कर ली है. उन्हें डिग्री तक मिल चुकी है. कुछ का वाइवा होने वाला है, तो कुछ विद्यार्थी का पीएचडी अंतिम दौर में है.

छात्र संगठनों ने कहा

छात्र संगठन आइसा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण कुशवाहा ने कहा कि पैट परीक्षा 2021 का पहली लिस्ट जारी किया था. इसमें मूल छात्र पास थे. लेकिन 16 ग्रेस अंक देकर मेधा सूची जारी की गयी. मूल विद्यार्थी बाहर हो गये. जबकि 16 अंक मिलने वाले विद्यार्थी पास हो गये. छात्र नेता ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये. उस समय गड़बड़ी करने वाले अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई की जाये. एबीवीपी के छात्र नेता कुणाल पांडे ने कहा कि विवि प्रशासन इसकी अविलंब जांच कराये.

एक्सपर्ट ब्यू

विवि के पूर्व सीनेट सदस्य प्रो विलक्षण रविदासनियम का खुला उल्लंघन है. किस परीक्षा नियम में 16 ग्रेस अंक देने का प्रावधान है. उस समय परीक्षा बोर्ड ने मनमाना रूप से मेरिट वाले विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी किया है. उस समय भी 16 ग्रेस अंक दिये जाने का विरोध जमकर किया गया था. पैट परीक्षा ऑल इंडिया स्तर पर आयोजित की जाती है. इसमें बिहार से बाहर के विद्यार्थी भी शामिल होते हैं. क्या बीपीएससी परीक्षा में एक नंबर से फेल करने पर ग्रेस अंक दिया जाता है. नियम में इसका प्रावधान ही नहीं है. सरकार मामले रिपोर्ट मांगने से अच्छा है कार्रवाई करे.

कोट

सरकार से पत्र आया था. वर्ष 2021 का मामला है. पूर्व कुलपति प्रो हनुमान प्रसाद पांडे व पूर्व प्रतिकुलपति प्रो रमेश कुमार के कार्यकाल का है. इसका जवाब उस समय लोकभवन को भेजा गया था.

प्रो रामाशीष पूर्वे, रजिस्ट्रार

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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