राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को अब पीपीपी मोड में देने की तैयारी

Updated at : 29 Sep 2019 3:04 AM (IST)
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राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को अब पीपीपी मोड में देने की तैयारी

भागलपुर : राजकीय श्री यतींद्र नारायण अष्ट्रांग आयुर्वेदिक कॉलेज नाथनगर को राज्य सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर ले जाने की तैयारी में है. 16 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयुष प्रक्षेत्र के विकास कार्य की समीक्षा के दौरान यह निर्णय लिया गया. इस सूचना के बाद नाथनगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश […]

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भागलपुर : राजकीय श्री यतींद्र नारायण अष्ट्रांग आयुर्वेदिक कॉलेज नाथनगर को राज्य सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर ले जाने की तैयारी में है. 16 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयुष प्रक्षेत्र के विकास कार्य की समीक्षा के दौरान यह निर्णय लिया गया. इस सूचना के बाद नाथनगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है. इस निर्देश के खिलाफ लोग कोर्ट जाने की तैयारी में हैं.

नामांकन आरंभ कराने आये अधिकारी, लेकिन सिर्फ औपचारिकता : आयुर्वेदिक कॉलेज नाथनगर में नामांकन आरंभ कराने के लिए पटना से शिक्षक को यहां प्रतिनियुक्ति किया गया. इनको यहां नामांकन शुरू करवाना था. छह माह इनके यहां आये हो गये, लेकिन अब तक कोई पहल तक नहीं हुई. अब सरकार ने इस शिक्षक की प्रतिनियुक्ति नाथनगर में तीन दिन कर दिया है.
कॉलेज के लिए पद हुआ था सृजित, अब तक नहीं हुई नियुक्ति : कॉलेज की व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार ने रिक्त पदों को ब्योरा लिया. पत्र के माध्यम से इसे जल्द से जल्द भरने का निर्देश भीजारी किया. यह तेजी भी किसी काम का नहीं हुआ. आज तक यहां एक भी व्यक्ति को नियुक्त नहीं की जा सकी. अंत में मामला ठंडे बस्ते में चला गया.
मुफ्त इलाज के बदले देना होगा शुल्क : आयुर्वेदिक कॉलेज में अभी इलाज के साथ दवा भी मरीजों को मुफ्त दी जा रही है. इलाके के गरीब लोग इस कॉलेज में रोजाना इलाज कराने आते हैं. व्यवस्था पीपीए मोड पर जाती है, तो इलाज से दवा तक के लिए शुल्क देना होगा. यहां तैनात डॉक्टर दवा तो लिख देंगे, लेकिन संभावना है कि महंगी दवा बाजार से खरीदनी पड़े.
अस्पताल में मुफ्त सेवा बंद हो सकती है.
आज तक नहीं बना चुनावी मुद्दा : आयुर्वेदिक कॉलेज आज तक चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है. करीब 15 साल में यह सरकार संस्था का सफर निजीकरण तक चला गया. चुनाव में तो यह मुद्दा बना ही नहीं, जो नेता चुनाव जीत कर सामने आये. इन लोगों ने भी कॉलेज को लेकर आज तक कोई सवाल उचित प्लेटफार्म पर नहीं उठाया.
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