जिले में डेडीकेटेड मैनपावर व टीम की कमी : आयुक्त

Updated at : 02 Jul 2014 11:41 AM (IST)
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जिले में डेडीकेटेड मैनपावर व टीम की कमी : आयुक्त

भागलपुर: प्रमंडलीय आयुक्त मिन्हाज आलम की बिहार में डेपुटेशन की समय सीमा पूरी हो चली है. चार जुलाई को वे अपने मूल कैडर केरल लौट जायेंगे. केरल जाने से पूर्व उन्होंने प्रभात खबर से खुल कर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने भागलपुर के अपने कार्यकाल पर विस्तार से चर्चा की. अपने कार्यो के संबंध में […]

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भागलपुर: प्रमंडलीय आयुक्त मिन्हाज आलम की बिहार में डेपुटेशन की समय सीमा पूरी हो चली है. चार जुलाई को वे अपने मूल कैडर केरल लौट जायेंगे. केरल जाने से पूर्व उन्होंने प्रभात खबर से खुल कर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने भागलपुर के अपने कार्यकाल पर विस्तार से चर्चा की. अपने कार्यो के संबंध में बताया, तो यह भी बताया कि कहां-कहां कमी रह गयी.

खास कर शहर की बदहाल व बेतरतीब यातायात व्यवस्था को लेकर बार-बार उनके द्वारा निर्देश देने के बाद भी उस पर अमल नहीं हो पाने पर उन्होंने अफसोस जताया. उन्होंने स्वीकार किया कि डेडीकेटेड (समर्पित) मैनपावर व पदाधिकारी-कर्मचारियों की टीम की कमी के कारण कई निर्देश ठंडे बस्ते में चले गये. उन्होंने कहा कि बैठकों में जो निर्देश दिये गये, उनका पूरी तरह से अनुपालन नहीं किया गया. इसके लिए डेडीकेटेड टीम के साथ रिसोर्स पर्सन की भी कमी को कारण बताया. कहा कि मजिस्ट्रेट व फोर्स भी यहां पर्याप्त नहीं है. कार्य संपादित (इंप्लीमेंट) करने वाले पदाधिकारी भी ओवरलोडेड हैं. इस वजह से वे अपने मूल काम को समय नहीं दे पाते हैं. आयुक्त ने कहा कि यातायात सुदृढ़ीकरण में कुछ कमी रह गयी, लेकिन इसे भविष्य में दूर किया जा सकता है. इसके लिए टीम को डिटरमाइंड होना होगा और टीम भावना के साथ काम करना होगा.

फूड पार्क के लिए जमीन दिलाना बड़ी उपलब्धि
प्रमंडलीय आयुक्त ने बताया कि जिला में फूड पार्क की स्थापना की घोषणा के बाद कहलगांव में चिह्न्ति भूमि पर बियाडा द्वारा कब्जा नहीं दिला पाने के कारण फूड पार्क का यहां से जाना तय था. बाद में उन्होंने इस मामले में विशेष दिलचस्पी लेकर फूड पार्क की स्थापना के लिए कंपनी को निजी जमीन की खरीद करायी. जमीन की रजिस्ट्री हो चुकी है और अब जल्द ही फूड पार्क की स्थापना होगी. इससे यहां के लोगों को बहुत फायदा होगा. उन्होंने कहा कि बुनकरों के लाभ के लिए उठाये गये कदम व उनके बिजली बिल के इश्यू का निराकरण कराना भी उनकी उपलब्धि में शामिल है. हालांकि उन्हें इस बात का मलाल है कि बुनकरों की सुविधा के लिए पुरैनी कलस्टर को चालू कराने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की, लेकिन वह चालू नहीं हो पाया. उनकी इच्छा है कि वह चालू हो जाये. अगर ऐसा हुआ तो यहां का बिजनेस डेवलप हो सकेगा और बुनकरों को भी अधिक से अधिक फायदा मिलेगा.

बिहार में काम करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण
केरल कैडर के आइएएस श्री आलम ने बताया कि बिहार में काम करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. पांच साल के कार्य अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि यहां हर लेवल पर स्टाफ की कमी है. उन पर ज्यादा बोझ है. सरकारी सर्विस की क्वालिटी व समय में सुधार की बात करने वाले श्री आलम ने कहा कि लोगों को न्याय व समय पर गुणवत्तापूर्ण सर्विस देना यहां बड़ी चुनौती है.

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