बचाव पक्ष ने कोर्ट में दिया समय आवेदन

भागलपुर: कांग्रेस नेता दिवेश सिंह हत्याकांड मामले में मेयर दीपक भुवानियां व पार्षद संजय कुमार सिन्हा की अग्रिम जमानत आवेदन पर बुधवार को बहस होना था. दोनों के जमानत आवेदन पर बहस शुरू होने के पहले बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता कामेश्वर पांडे ने मामले में समय आवेदन दाखिल किया. सुनवाई के लिए […]
भागलपुर: कांग्रेस नेता दिवेश सिंह हत्याकांड मामले में मेयर दीपक भुवानियां व पार्षद संजय कुमार सिन्हा की अग्रिम जमानत आवेदन पर बुधवार को बहस होना था. दोनों के जमानत आवेदन पर बहस शुरू होने के पहले बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता कामेश्वर पांडे ने मामले में समय आवेदन दाखिल किया. सुनवाई के लिए 01 जुलाई की तारीख दी गयी.
श्री पांडे ने कहा कि इस मामले में बदले सिनेरियो में पता चला है कि आइजी व एसएसपी का तबादला हो गया है. न्यूज पेपर से पता चला है कि यह केस सीआइडी के हवाले हो गया है. श्री पांडे ने कोर्ट से समय के लिए समय आवेदन दिया. सुनवाई के समय अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता विरेश प्रसाद मिश्र व सूचक के अधिवक्ता डॉ राजेश कुमार तिवारी उपस्थित थे. परिसर में दोनों पक्ष के लोग उपस्थित थे. वहीं सीआइडी को मामले की जांच सौंपे जाने बचाव पक्ष के लोग राहत की सांस ली है.
पुलिस को मिला पत्र सीआइडी को सौंपे कांड
दिवेश सिंह हत्याकांड की जांच अब सीआइडी करेगी. इस आशय का पत्र भागलपुर पुलिस को मिल चुका है. डीआइजी संजय सिंह ने इसकी पुष्टि की. पुलिस को भेजे गये पत्र में निर्देश दिया गया है कि जल्द ही इस कांड को सीआइडी को सौंपे ताकि अनुसंधान शुरू किया जा सके. उधर, पुलिस मुख्यालय का निर्देश मिलते ही कोतवाली पुलिस केस से जुड़े रिकार्ड को अप-टू-डेट करने में जुट गयी है. मेयर-पार्षद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ जितने भी साक्ष्य पुलिस ने जमा किये, उसे सूचीबद्ध किया जा रहा है. निबंधन विभाग के कारगुजारियों की भी जानकारी सीआइडी को दी जा रही है. कैसे इस मामले में निबंधन विभाग ने पुलिस को गलत सूचना दी और टाइटिल शूट चलने के बाद भी विभाग ने विवादित जमीन की रजिस्ट्री कर दी.
सीआइडी में कैसे गया केस जांच हो : दिनेश
दिवेश सिंह के बड़े भाई दिनेश सिंह ने कहा कि दिवेश हत्याकांड का मामला फिर से सीआइडी में कैसे गया, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. एक बार सीआइडी इस केस को लौटा चुकी है. उस समय सीआइडी ने कहा था कि इसमें जांच पूरी हो चुकी है और सारे अभियुक्तों के बारे में पता भी चल चुका है. यहीं नहीं, एसएसपी के स्तर से रिपोर्ट आठ तक जारी हो चुका है. ऐसे में सीआइडी जांच के लिए कुछ नहीं बच जाता है. यह कहते हुए सीआइडी ने केस को लौटा दिया था. उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं. इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेंगे. केस को सीआइडी में फिर से भिजवा दिया गया है. लेकिन इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. राज्य सरकार नहीं चाहती है कि इस केस के आरोपी पकड़े जाये और उन्हें सजा मिले. 26 मई 2014 को केस की समीक्षा के दौरान आइजी ने इसमें आरोपी मेयर दीपक भुवानिया और वार्ड पार्षद संजय सिन्हा की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था. उसके बाद से दोनों आरोपी भूमिगत हो गये. इसी बीच आइजी, एसएसपी का तबादला हो गया. तबादला होते ही इस केस में डीजीपी की ओर से नया आदेश जारी हो गया.
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