बबरगंज निवासी सिपाही ने की आत्महत्या

Updated at : 30 Nov 2018 6:45 AM (IST)
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बबरगंज निवासी सिपाही ने की आत्महत्या

भागलपुर : बबरगंज थाना के ठाकुर नगर काॅलोनी स्थित मिरजान हाइस्कूल के पास हजारी पासी लेन निवासी संतोष दास के बेटे विदुर दास (22) ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली. जून 2018 में बिहार पुलिस में बतौर सिपाही नियुक्त होने के बाद विदुर ने पहले जहानाबाद जिला में प्रशिक्षण प्राप्त किया. उसके बाद उसे […]

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भागलपुर : बबरगंज थाना के ठाकुर नगर काॅलोनी स्थित मिरजान हाइस्कूल के पास हजारी पासी लेन निवासी संतोष दास के बेटे विदुर दास (22) ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली. जून 2018 में बिहार पुलिस में बतौर सिपाही नियुक्त होने के बाद विदुर ने पहले जहानाबाद जिला में प्रशिक्षण प्राप्त किया.
उसके बाद उसे औरंगाबाद जिला भेज दिया गया. वह जोंडिस (पीलिया) बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित था. मेडिकल ग्राउंड पर भी जब पुलिस लाइन से उसे छुट्टी नहीं मिली तब वह दुर्गापूजा के पहले ड्यूटी छोड़ कर भाग आया था. पुलिस ने मृतक के पिता का फर्द बयान दर्ज कर शव काे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
पिता संतोष दास ने बताया कि वह मार्बल के कारिगर हैं और हर रोज की तरह गुरुवार को भी वह बूढ़ानाथ मंदिर में चल रहे मार्बल लगाने के लिये गये थे. वहीं उनका छोटा बेटा विभिषण स्कूल गया था. घर पे केवल उनका बड़ा बेटा विदुर और उनकी पत्नी अहिल्या देवी ही थे. दोपहर करीब 12 बजे उन्हें सूचना मिली कि विदुर ने फांसी लगा ली है और वे लोग उसे लेकर मायागंज अस्पताल आ रहे हैं.
इसके बाद वह सीधे मायागंज अस्पताल पहुंच गये. जहां डाक्टरों ने उसे विदुर को मृत घोषित कर दिया. पिता ने बताया कि विदुर ने 2016 में भी सिपाही बहाली परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ था. पर वह फिजिकल टेस्ट में पास नहीं हो पाया था. इसके बाद दोबारा 2017 में सिपाही बहाली परीक्षा उत्तीर्ण कर फिजिकल टेस्ट भी पास कर लिया. जून 2018 में विदुर ने जहानाबाद जिले में अपना योगदान दिया. जहां करीब दो महीने के बाद ही उसे प्रशिक्षण के लिये औरंगाबाद जिला भेज दिया गया.
औरंगाबाद जाने के कुछ ही दिनों बाद से विदुर की तबीयत खराब रहने लगी. पुलिस केंद्र के डाॅक्टर ने उसे खान-पान की वजह से हुए इंफेक्शन की बात कहकर दवा दी थी. कई दिनों तक दवा खाने के बाद भी विदुर ठीक नहीं हुआ. अपने वरीय अधिकारियों से तबीयत खराब होने की बात कहकर बार-बार छुट्टी मांगता रहा. पर अधिकारी उसे छुट्टी नहीं देते थे.
तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद विदुर वहां से अपने बबरगंज थाना क्षेत्र के सकरुल्लाचक स्थित घर आ गया. एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान पता चला कि विदुर गंभीर रूप से जौंडिस (पीलिया) बीमारी से ग्रसित है. तबीयत खराब होने के बाद वह बार-बार खुद को कोसता रहता था कि उसने ऐसे विभाग में क्यों नौकरी ली जहां उसकी जान पर बन आयी. पिता ने आशंका जतायी कि इसी बात से परेशान होकर विदुर ने अपनी जान दे दी.
मां ने फांसी से लटका देख शोर मचाया
मायागंज अस्पताल पहुंचे विदुर के पड़ोसियों और दोस्तों ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे विदुर की मां अहिल्या देवी ने निर्माणाधीन घर के पहले तल पर स्थित खपड़ैल घर के कमरे में पंखे के हुक से बंधे फांसी पर विदुर को लटका देखा था. इसके बाद उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुला लिया. तब तक विदुर का बड़ा बहनोई व पड़ोसी कक्कू फंदे से उसे उतार चुका था. उस वक्त विदुर की सांसें चल रही थी. कक्कू की बाइक पर विदुर को बैठा कर उसके बहनोई उसे मायागंज अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां डाक्टरों ने विदुर को मृत घोषित कर दिया.
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