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जीवनदायिनी के जीवन पर टनों कचरे का भार

Updated at : 22 Oct 2018 8:30 AM (IST)
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जीवनदायिनी के जीवन पर टनों कचरे का भार

भागलपुर : इस दुर्गा पूजा भी जिले में नमामि गंगे योजना की भद्द पिट गयी. शनिवार को भागलपुर के गंगा घाट पर भारी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ. शायद ही कोई प्रतिमा इको फ्रैंडली रंग से रंगी गयी थीं. अधिकतर में केमिकल का इस्तेमाल था. इस कारण सिर्फ एक दिन में भारी मात्रा में […]

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भागलपुर : इस दुर्गा पूजा भी जिले में नमामि गंगे योजना की भद्द पिट गयी. शनिवार को भागलपुर के गंगा घाट पर भारी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ. शायद ही कोई प्रतिमा इको फ्रैंडली रंग से रंगी गयी थीं. अधिकतर में केमिकल का इस्तेमाल था.
इस कारण सिर्फ एक दिन में भारी मात्रा में केमिकल गंगा में बहा और गंगा और भी ज्यादा प्रदूषित हो गयी. दूसरी ओर शहर में भी जगह-जगह कचरे का ढेर हो गया है.
सिर्फ होती है बात
भागलपुर में हर साल इको फ्रेंडली प्रतिमा व पर्यावरण संरक्षण की बात की जाती है, लेकिन यह बस बातों तक ही सिमट कर रह जाती है. हालात यह है कि विसर्जन समेत अन्य मौकों पर टनों कचरा गंगा में समाहित हो गया.
डॉलफिन जोन है यह
भागलपुर में गंगा को डॉलफिन के लिए संरक्षित किया गया है. कागजों पर इस पर बड़ी बात हुई. पर प्रतिमाओं के रंग से उनको क्या दिक्कत हुई होगी इस पर कोई विचार नहीं हुआ. जानकारों के अनुसार डॉलफिन को इससे भारी खतरा है.
श्रद्धालु भी हो रहे परेशान : गंगा स्नान के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग. इनको भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है. त्वचा संबंधी परेशानी होने लगती है.
घाट की स्थिति देख आ रहा था तरस
रविवार को विसर्जन घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर कचरे के अंबार से काफी परेशानी हो रही थी. हालांकि निगम की ओर कुछ घाटों पर सफाई तो करवायी जा रही थी, लेकिन ज्यादातर घाटों के हालात बद से बदतर ही नजर आये.
केमिकल से गंगा में स्नान करने वालों को कैंसर व त्वचा रोग का खतरा
हर साल केमिकल वाले पेंट के बदले नेचुरल पेंट की होती है बात लेकिन नहीं होता है इसका उपयोग
बचा लें गंगा को : डॉ सुनील
मंदार नेचर क्लब के सचिव डॉ सुनील अग्रवाल के अनुसार प्रतिमाओं में यूज होने वालेे केमिकल पेंट के कारण गंगा के दूषित होने के साथ इसका सीधा असर जलीय जीव पर पड़ता है. इससे जलीय जीवों के स्कीन के खराब होने के साथ छोटे जलीय जीवों के मरने का खतरा बना रहता है. काश की लोग सचेत हों और गंगा व जलीय जीवों को बचा लें.
कैंसर भी हो सकता है : डॉ पंकज
जेएलएनएमसीएच के असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ पंकज कुमार के अनुसार यह लोगों के लिए भी बहुत खतरनाक हैं. पेंट के कारण गंगा में स्नान और गंगा का पानी पीने वाले लोगों को कैंसर और त्वचा रोग का खतरा बन रहता है.
क्यों खतरनाक हैं रंग
  • केमिकल व सजावटी सामान पानी में कई दिनों तक नहीं घुलते.
  • यह जलीय जीवों व आम लोगों की सेहत पर असर डालते हैं.
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