एजी की ऑडिट रिपोर्ट पर रार, शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर

Updated at : 16 Sep 2018 8:52 AM (IST)
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एजी की ऑडिट रिपोर्ट पर रार, शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर

भागलपुर : सृजन घोटाले में महालेखाकार की हाल की विभिन्न विभागों की ऑडिट रिपोर्ट पर रार मची हुयी है. एजी ने घोटाले के बाद प्रभावित विभागों की ऑडिट में निकासी व व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) पर सीधे वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाया. बैंक में खाता खोलने से लेकर कैशबुक संधारण तक की जिम्मेदारी डीडीओ को […]

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भागलपुर : सृजन घोटाले में महालेखाकार की हाल की विभिन्न विभागों की ऑडिट रिपोर्ट पर रार मची हुयी है. एजी ने घोटाले के बाद प्रभावित विभागों की ऑडिट में निकासी व व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) पर सीधे वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाया. बैंक में खाता खोलने से लेकर कैशबुक संधारण तक की जिम्मेदारी डीडीओ को दी थी.
एजी की रिपोर्ट का अलग-अलग विभागों ने जवाब दिया था. जिला नजारत ने चार जुलाई को अपने जवाब में स्पष्ट किया कि, घोटाले की अवधि के दौरान कई बार ऑडिट हुआ. ऑडिटर एक-एक माह तक विभाग के सभी वित्तीय कागजात खंगालते थे. इस दौरान उन्होंने वित्तीय कामकाज को लेकर कोई विशिष्ट सुझाव अथवा आपत्ति नहीं दी गयी.
जिला नजारत द्वारा एजी की ऑडिट पर दिये जवाब को वित्त विभाग ने गंभीरता से लिया है. वित्त विभाग ने मामले में आगे की कार्रवाई से पहले जिला प्रशासन से यह सूचना मांगी कि, एजी की ऑडिट टीम वर्ष 2007 से 2017 के बीच कब-कब ऑडिट करने के लिए आयी थी. इस सूचना के आधार पर वित्त विभाग आगे की कार्रवाई करेगा.
यह थी नजारत की पहली प्राथमिकी: बैंक ऑफ बड़ौदा, भागलपुर के खाता से 23 फरवरी 2007 से सात अगस्त 2017 तक चेक से 14 करोड़ 80 लाख 38 हजार 296 रुपये 31 पैसे दिये गये. मगर खाता में 50 लाख 61 हजार 652 रुपये 68 पैसे ही बचे. इस खाता से निर्गत कोई भी चेक बाउंस नहीं किया, क्योंकि अवैध रूप से खाता में राशि दे दी जाती थी.
प्रशासन की जांच रिपोर्ट में उल्लेख हुआ कि, बैंक ने जिला प्रशासन को अंधेरे में रखने के लिए मांगे जाने पर जाली खाता विवरणी उपलब्ध कराकर जालसाजी को अंजाम दिया गया.
जांच रिपोर्ट में भी एजी के खिलाफ दिया गया था मंतव्य: तत्कालीन डीडीसी अमित कुमार के नेतृत्व में जिला नजारत की जांच रिपोर्ट में उल्लेख हुआ था कि, जिला नजारत शाखा का मार्च 2015 में महालेखाकार की टीम ऑडिट करने आयी थी. मगर उसमें भी किसी प्रकार का प्रतिकूल टिप्पणी या आपत्ति दर्ज नहीं की गयी.
उस समय भी खाते में वास्तविक राशि अनुपलब्ध रहने के कारण जमा राशि पर अर्जित ब्याज की राशि की हानि भी सरकारी खाते से हुआ. सरकारी राशि का अवैध हस्तांतरण के साथ बैंक पासबुक में भी फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर गबन को छुपाने का प्रयास हुआ.
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