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4.52 करोड़ की अवैध निकासी प्रकरण : सेवानिवृत्त बीडीओ चंद्रशेखर झा की 100% पेंशन कटौती बरकरार

Updated at : 26 Feb 2026 12:25 AM (IST)
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4.52 करोड़ की अवैध निकासी प्रकरण : सेवानिवृत्त बीडीओ चंद्रशेखर झा की 100% पेंशन कटौती बरकरार

पीरपैंती प्रखंड में पदस्थापन काल के दौरान 4.52 करोड़ रुपये (चार करोड़ 52 लाख 88 हजार 246 रुपये) की अवैध निकासी के आरोपों में घिरे सेवानिवृत्त बीडीओ चंद्रशेखर झा की 100 प्रतिशत पेंशन कटौती का दंड राज्य सरकार ने बरकरार रखा है.

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सृजन घोटाला : राज्यपाल के आदेश से रिव्यू रिप्रजेंटेशन खारिज, दंडादेश यथावत रखने का निर्णय

पीरपैंती प्रखंड में पदस्थापन काल के दौरान 4.52 करोड़ रुपये (चार करोड़ 52 लाख 88 हजार 246 रुपये) की अवैध निकासी के आरोपों में घिरे सेवानिवृत्त बीडीओ चंद्रशेखर झा की 100 प्रतिशत पेंशन कटौती का दंड राज्य सरकार ने बरकरार रखा है. पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (रिव्यू रिप्रजेंटेशन) पर विचार करने के बाद अनुशासनिक प्राधिकार ने पूर्व में पारित दंडादेश को यथावत रखते हुए इसे प्रकाशित करने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के प्रावधानों के तहत की गयी है. संकल्प ज्ञापांक 22606 दिनांक 05.12.2025 के माध्यम से पूर्व में शत-प्रतिशत पेंशन कटौती का दंड दिया गया था, जिसकी फिर से पुष्टि कर दी गयी है.

क्या है पूरा मामला

डीएम ने श्री झा के विरुद्ध आरोप-पत्र गठित किया गया था. आरोप है कि उनके पीरपैंती में प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यकाल के दौरान विभिन्न मदों के बैंक खातों से 4,52,88,246 रुपये की अवैध निकासी की गयी. इसके अलावा उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने उक्त जमा-निकासी प्रकरण में संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की, जो घोर लापरवाही को दर्शाता है.

त्नी के नाम फ्लैट बुकिंग के मिले साक्ष्य

इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने कांड दर्ज किया था. विधि विभाग के आदेश द्वारा अभियोजन की स्वीकृति भी प्रदान की गयी. अभियोजन स्वीकृति आदेश में उल्लेख है कि जांच के दौरान अभिलेखीय साक्ष्य व गवाहों के बयानों से यह पाया गया कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर के खाते में ट्रांसफर की गयी. साथ ही निजी लाभ के लिए पत्नी के नाम पर फ्लैट बुकिंग के भुगतान सहित अन्य वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य भी मिले. मामला वर्तमान में सक्षम न्यायालय में विचाराधीन है.

पूर्व में भी मिल चुका है दंड

श्री झा को पूर्व में जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास के पदस्थापन काल के आरोप वर्ष 2014-15 के लिए वर्ष 2023 में निंदन व कालमान वेतन में निम्नतर अवनति का लघु दंड दिया गया था. सरकार ने इसे भी सेवा अवधि में घोर कदाचार का संकेत माना है.

सेवानिवृत्त बीडीओ ने प्रजेंटेशन में क्या कहा

अपने प्रजेंटेशन में श्री झा ने कहा था कि नियम-43 (बी) के तहत कार्रवाई किए बिना नियम-139 में सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती. आरोप चार वर्ष से अधिक पुराने हैं. केवल अभियोजन स्वीकृति के आधार पर पेंशन रोकना उचित नहीं है, क्योंकि अभी दोष सिद्ध नहीं हुआ है. पूर्व में दिया गया दंड लघु दंड था, जिससे पूरी सेवा को असंतोषजनक नहीं माना जा सकता.

सरकार का पक्ष

विभागीय समीक्षा में यह पाया गया कि बिहार पेंशन नियमावली, 1950 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नियम-43 (बी) की कार्रवाई के बाद ही नियम-139 लागू किया जा सकता है. नियम-139 (ग) के अनुसार यदि कार्यकाल में घोर कदाचार के पर्याप्त साक्ष्य हों या सेवा पूर्णतः असंतोषजनक पायी जाये, तो राज्य सरकार पेंशन स्वीकृति आदेश का रिव्यू (पुनरीक्षण) कर सकती है.

इन आधारों पर दंडादेश को रखा गया यथावत

–4.52 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप गंभीर है.

–सीबीआइ द्वारा अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है.

–पूर्व में भी सेवा अवधि में अनियमितताओं के लिए दंड दिया गया है.

–रिव्यू प्रजेंटेशन में कोई नया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया.

राजपत्र में होगा प्रकाशन

राज्यपाल के आदेश से जारी संकल्प में निर्देश दिया गया है कि इस निर्णय को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाये. इसकी प्रति सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाये. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव उमेश प्रसाद ने संकल्प पत्र जारी कर दिया है. इसकी प्रति सीबीआइ के डीआइजी और भागलपुर के डीएम को भी भेजी गयी है.

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NISHI RANJAN THAKUR

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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