GI टैग मिलने के बाद मर्चा धान और चिउड़ा की देशभर में बढ़ी मांग, खेती के विस्तार की तैयारी

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धान की रोपाई करते किसान | Prabhat Khabar Network

धान की रोपाई करते किसान

पश्चिम चंपारण का खास मर्चा धान, अपनी अनूठी खुशबू और स्वाद के कारण अब देशभर में मशहूर हो रहा है। जीआई टैग मिलने से किसानों को बेहतर मूल्य और नए रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद जगी है।

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Bettiah News: पश्चिम चंपारण की पहचान बन चुका मर्चा धान और उससे तैयार होने वाला मर्चा चिउड़ा अब देशभर में अपनी अलग खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हो रहा है. काली मिर्च जैसे छोटे-छोटे दानों वाला यह धान पकने के बाद प्राकृतिक सुगंध बिखेरता है, जिसने इसे बिहार की सबसे विशिष्ट पारंपरिक धान किस्मों में शामिल कर दिया है. जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हुई है. इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद बढ़ गई है.

 पश्चिम चंपारण के 12 प्रखंडों में बढ़ेगी खेती

मैनाटांड़, गौनाहा, चनपटिया, लौरिया, रामनगर और सिकटा समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से मर्चा धान की खेती होती रही है. कृषि विभाग और राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रयासों से अब इस पारंपरिक धान की खेती का विस्तार किया जा रहा है. जीआई टैग मिलने के बाद जिले के 17 में से करीब 12 प्रखंडों में इसकी खेती बढ़ने की संभावना जताई गई है.

GI टैग से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

जीआई टैग मिलने के बाद अब केवल पश्चिम चंपारण में उत्पादित मर्चा धान और उससे बने उत्पाद ही इसी नाम से बाजार में बेचे जा सकेंगे. इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और ऑनलाइन विपणन के जरिए मर्चा चिउड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहचान बना सकता है.

स्वाद के साथ पौष्टिकता भी इसकी खासियत

मर्चा चिउड़ा दूध, दही, गुड़ और चीनी के साथ विशेष स्वाद देता है. इसके अलावा पुलाव, खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में भी इसका उपयोग किया जाता है. डायटीशियन श्वेता रानी के अनुसार इसमें कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई आवश्यक विटामिन पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह पौष्टिक आहार भी माना जाता है.


मानसून के साथ शुरू हुई बुवाई

मानसून सक्रिय होने के साथ जिले में मर्चा धान की नर्सरी और रोपाई का कार्य शुरू हो गया है. कृषि विभाग किसानों को शुद्ध बीज, वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दे रहा है. किसानों का कहना है कि यदि बाजार और सरकारी प्रोत्साहन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में मर्चा धान पश्चिम चंपारण का बड़ा कृषि ब्रांड बन सकता है.

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गणेश वर्मा

लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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