बिहार के इकलौते टाइगर रिजर्व से खुशखबरी, 20 साल में 10 गुना बढ़ी बाघों की संख्या

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प्रतीकात्मक तस्वीर

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी सफलता की कहानी सामने आई है। जहां 2006 में सिर्फ 8 बाघ थे, वहीं 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 84 होने का अनुमान है। यह वृद्धि बेहतर सुरक्षा, शिकार पर रोक और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।

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Valmiki Tiger Reserve: बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अच्छी खबर सामने आई है. वर्ष 2006 में जहां यहां केवल 8 बाघ थे, वहीं 2026 में उपलब्ध वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार उनकी संख्या बढ़कर 84 हो गई है. पिछले दो दशकों में दर्ज हुई यह वृद्धि संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

वर्ष 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना में VTR में 54 बाघ दर्ज किए गए थे. इसके बाद भी बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

नेपाल से जुड़े कॉरिडोर का मिला फायदा

करीब 899 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है. यह नेपाल के चितवन नेशनल पार्क और परसा वन्यजीव अभयारण्य से प्राकृतिक कॉरिडोर के माध्यम से जुड़ा हुआ है.

वन विभाग के अनुसार बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, शिकार पर प्रभावी रोक, कैमरा ट्रैप, ई-पेट्रोलिंग, ड्रोन निगरानी और वन्यजीवों के अनुकूल आवास विकसित किए जाने से बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली है.

बढ़ाए गए घास के मैदान

बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रिजर्व में ग्रासलैंड का क्षेत्र लगभग 2 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 हजार हेक्टेयर किया गया है.

इससे हिरण, सांभर, हॉग डियर और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जिससे बाघों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध हो रहा है.

जैव विविधता का बड़ा केंद्र

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है.

यहां तेंदुआ, स्लॉथ भालू, गौर (भारतीय बाइसन), जंगली कुत्ता, जंगली सूअर, नीलगाय, चीतल, सांभर, हॉग डियर, घड़ियाल, मगरमच्छ और अजगर सहित 60 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं.

इसके अलावा यहां 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी दर्ज की गई हैं, जिससे यह पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

मानसून में क्यों बंद रहता है VTR?

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 29 जून से 30 सितंबर तक जंगल सफारी, साइकिल सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं.

वन विभाग के अनुसार इस दौरान जंगल में मानवीय हस्तक्षेप कम रखा जाता है, ताकि बाघों सहित अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सके. मानसून के दौरान प्राकृतिक आवास बेहतर होने से शावकों के पालन-पोषण और वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं. VTR में पर्यटन गतिविधियां 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू होंगी.

संरक्षण में स्थानीय लोगों की भी अहम भूमिका

वन विभाग का कहना है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी, नियमित गश्ती, तकनीक आधारित निगरानी और संरक्षण कार्यक्रमों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाया है. यही कारण है कि पिछले 20 वर्षों में यहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है.

फैक्ट फाइल

विवरणजानकारी
स्थापना1990
कुल क्षेत्रफललगभग 899 वर्ग किमी
वर्ष 2006 में बाघ8
वर्ष 2022 में बाघ54
वर्ष 2026 (उपलब्ध आंकड़े)84
स्तनधारी प्रजातियां60 से अधिक
पक्षी प्रजातियां300 से अधिक
प्रमुख वन्यजीवबाघ, तेंदुआ, गौर, स्लॉथ भालू, जंगली कुत्ता, सांभर, चीतल, नीलगाय, हॉग डियर, घड़ियाल, मगरमच्छ, अजगर

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गणेश वर्मा

लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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