'गन्ने का कैंसर' खत्म करने की तैयारी! बिहार में तैयार होंगे ढाई लाख रोगमुक्त CO-0238 पौधे

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सिर्फ डिजिटल के लिए...गन्ने के कैंसर पर नरकटियागंज चीनी मिल का बड़ा वार, किसानों की लखपति बनाने वाली CO-0238 को मिला नया जीवन

रोगमुक्त बीज का निरीक्षण करते कार्यपलक अध्यक्ष व अन्य

जानलेवा लाल सड़न रोग की चपेट में आई CO-0238 गन्ना प्रजाति को बचाने के लिए नरकटियागंज चीनी मिल ने नई उम्मीद जगी है. मिल वैज्ञानिक टिश्यू कल्चर तकनीक से ढाई लाख रोगमुक्त पौधे तैयार कर रही है, जिन्हें किसानों में वितरित किया जाएगा.

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Narkatiaganj Sugar Farming: कभी उत्तर बिहार के गन्ना किसानों की पहली पसंद रही CO-0238 गन्ना प्रजाति अब फिर से खेतों में लौटने की तैयारी में है. रेड रॉट (लाल सड़न) जैसे गंभीर रोग की वजह से लगभग खत्म होने लगी इस किस्म को बचाने के लिए न्यू स्वदेशी चीनी मिल, नरकटियागंज ने बड़ा कदम उठाया है.

मिल पहली बार टिश्यू कल्चर तकनीक से ढाई लाख रोगमुक्त CO-0238 पौधे तैयार करा रही है. इन पौधों का वितरण चरणबद्ध तरीके से 5 हजार चयनित किसानों के बीच किया जाएगा.

हर किसान को मिलेंगे 500 रोगमुक्त पौधे

मिल प्रबंधन के अनुसार प्रत्येक किसान को करीब 500 रोगमुक्त पौधे दिए जाएंगे. किसान पहले इन पौधों से अपने खेत में बीज नर्सरी तैयार करेंगे. इसके बाद अगले पेराई सत्र में इसी स्वस्थ बीज से बड़े स्तर पर गन्ने की खेती की जाएगी.

इस योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में रोगमुक्त CO-0238 बीज का विस्तार करना है, जिससे उत्पादन और चीनी रिकवरी दोनों में सुधार हो सके.

रेड रॉट ने लगभग खत्म कर दी थी लोकप्रिय किस्म

CO-0238 को उत्तर भारत की सबसे सफल गन्ना प्रजातियों में माना जाता रहा है. यह कम समय में तैयार होती है, प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन देती है और इसकी चीनी रिकवरी भी अन्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है.

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रेड रॉट (लाल सड़न) रोग के बढ़ते प्रकोप ने इसकी खेती को बुरी तरह प्रभावित किया. किसानों के बीच इसे "गन्ने का कैंसर" भी कहा जाने लगा, जिसके कारण यह किस्म तेजी से खेतों से गायब होने लगी.

अगले वर्ष से तैयार होंगे 10 लाख पौधे

न्यू स्वदेशी चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि गन्ना उद्योग विभाग के सहयोग से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए यह पहल शुरू की गई है.

उन्होंने कहा कि फिलहाल 2.5 लाख रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा रहे हैं. अगले पेराई सत्र से हर वर्ष 10 लाख रोगमुक्त गन्ना बीज तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.

उनके अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल रेड रॉट ही नहीं, बल्कि गन्ने की अन्य प्रमुख बीमारियों पर भी प्रभावी नियंत्रण करना है.

किसानों और चीनी मिलों दोनों को मिलेगा फायदा

मिल के कार्यपालक उपाध्यक्ष राजीव त्यागी और गन्ना महाप्रबंधक के.एस. ढाका ने बताया कि रोगमुक्त बीज उपलब्ध होने से किसानों को अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता वाला गन्ना मिलेगा.

वहीं चीनी मिलों को अधिक चीनी रिकवरी वाला गन्ना मिलने से उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी. यदि यह प्रयोग सफल रहा तो पश्चिम चंपारण सहित उत्तर बिहार के गन्ना क्षेत्र में CO-0238 किस्म की दोबारा बड़े पैमाने पर वापसी हो सकती है.

गन्ना आयुक्त ने बताया सराहनीय पहल

गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार के आयुक्त अनिल झा ने कहा कि इस पहल से किसान स्वयं रोगमुक्त बीज तैयार कर सकेंगे. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और चीनी मिलों को भी गुणवत्तापूर्ण गन्ना मिलेगा.

उन्होंने कहा कि नरकटियागंज चीनी मिल का यह प्रयास पूरे बिहार के गन्ना किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.

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सतीश कुमार पांडेय

लेखक के बारे में

By सतीश कुमार पांडेय

सतीश कुमार पांडेय ने वर्ष 2000 में जी न्यूज से पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने चर्चित दस्यु सरगनाओं की रिपोर्टिंग की. बाद में आज और दैनिक जागरण में कार्य किया. वर्ष 2016 से वें प्रभात खबर में कार्यरत हैं. इन्हें क्राइम, प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा खेती-किसानी से जुड़ी खबरों में विशेष रुचि रही है.

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