ePaper

बाबूजी की नौकरी पर बेटे-बेटियों के ठाठ

Updated at : 19 May 2025 6:28 PM (IST)
विज्ञापन
बाबूजी की नौकरी पर बेटे-बेटियों के ठाठ

चिलचिलाती धूप हो या झमाझम बारिश. कड़कड़ाती ठंड हो या शीतलहर का मौसम. मौज तो जिले के अधिकारी पदाधिकारी के बेटे बेटियों की ही है. ना तो उन्हें सन प्रोटेक्शन की जरूरत पड़ती है और न ही वे बारिश में भींगते हैं.

विज्ञापन

बेतिया. चिलचिलाती धूप हो या झमाझम बारिश. कड़कड़ाती ठंड हो या शीतलहर का मौसम. मौज तो जिले के अधिकारी पदाधिकारी के बेटे बेटियों की ही है. ना तो उन्हें सन प्रोटेक्शन की जरूरत पड़ती है और न ही वे बारिश में भींगते हैं. पापा के ऑफिस की गाड़ी में सवार होकर आने के कारण लाड़लों को ठंड भी नहीं लगती. यह नजारा दिखता है शहर के प्रसिद्ध स्कूलों में. जहां जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी पदाधिकारी के बच्चे पढ़ते हैं. क्योंकि स्कूल जाने के समय और स्कूल से आने के समय बच्चों के पापा को सरकार द्वारा आवंटित गाड़ी पहुंचाने और लाने जो जाती है. गाड़ियों पर बकायदा जिला प्रशासन या पुलिस का बोर्ड भी लगा रहता हैं. कुल मिलाकर यूं कहें तो बच्चों के स्कूल में अधिकारी पापा बनकर नहीं, बल्कि अधिकारी बनकर ही जाना पसंद करते हैं. – लगा रहता है बोर्ड, साथ जाते हैं अर्दली बात सिर्फ गाड़ियों की नहीं है, गाड़ियों के साथ-साथ संसाधनों का भी भरपूर सदुपयोग किया जाता है. भाड़े की सरकारी गाड़ी उसमें सरकारी तेल भाड़े का ड्राइवर और कोई अर्दली या बॉडीगार्ड. जहां अर्दली और बॉडीगार्ड का कार्य बेटे बेटियों के लिए गाड़ी का गेट खोलना और उनके बैग को टांग कर क्लासरूम तक पहुंचाना होता है. अधिकारी पदाधिकारी का स्कूल जाना या उनके बिना ही गाड़ियों का जाना, ये सारी गतिविधियां प्रतिदिन एक निर्धारित समय पर स्कूल परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरे और संबंधित सड़कों पर लोगों के मकान के बाहर लगे कैमरे के माध्यम से आमलोगों को भी दिखता है. जबकि विभागीय नियम कानून के मुताबिक सरकारी गाड़ियों का निजी उपयोग नहीं करना है. जब अधिकारी गाड़ी में नहीं है, तो उसे पर लगे बोर्ड को कवर कर देना है. – सोशल मीडिया का है जमाना, हो सकती है फजीहत अधिकारी पदाधिकारियों के इस कार्य को सोशल मीडिया के जमाने में अगर किसी नगरवासी द्वारा वीडियो या फोटो लेकर वायरल कर दिया जाता है. तो यह उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की फोटो या वीडियो को अगर राज्य के वरीय अधिकारी जैसे गृह सचिव या डीजीपी को सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर भेज देने से संबंधित पदाधिकारी के लिए परेशानी भी खड़ी हो सकती है. बोले डीएम : ऐसा मामला अब तक मेरे संज्ञान में नहीं है. ऐसी शिकायत मिलने पर जांच करवाई जाएगी और दोषी पाये जाने की अवस्था पर कार्रवाई भी होगी. सरकारी वाहनों का विभाग द्वारा निजी उपयोग करने का कोई प्रावधान नहीं है. दिनेश कुमार राय, डीएम, पश्चिम चम्पारण

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SATISH KUMAR

लेखक के बारे में

By SATISH KUMAR

SATISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन