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नरकटियागंज में बाढ़–सुखाड़ से निपटने का विकल्प तैयार, अब अगस्त में ही गन्ने की बुवाई

Updated at : 30 Aug 2025 6:26 PM (IST)
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नरकटियागंज में बाढ़–सुखाड़ से निपटने का विकल्प तैयार, अब अगस्त में ही गन्ने की बुवाई

गन्ने का मायका कहे जाने वाले पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में गन्ने की खेती का स्वरूप बदल रहा है.

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नरकटियागंज. गन्ने का मायका कहे जाने वाले पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में गन्ने की खेती का स्वरूप बदल रहा है. बाढ़ और सुखाड़ की मार झेलते-झेलते अब यहां के किसानों ने नया विकल्प तलाश लिया है. पहली बार अगस्त माह में ही गन्ने की बुवाई शुरू कर दी गई है. आमतौर पर यह काम अक्टूबर या फरवरी में होता रहा है, मगर मौसम की चुनौतियों के बीच किसानों ने खेती का कैलेंडर ही बदल दिया है. अब गन्ने की खेती से किसान मालामाल होंगे और लागत भी शून्य आ सके प्रयास जारी है. मटियरिया गांव के किसान टुनटुन मिश्र ने न्यू स्वदेशी शुगर मिल्स के सहयोग से गन्ने की बुवाई शुरू की है. खेत में टेंचर विधि से बुवाई की गई और अंतरवर्ती फसल के तौर पर सरसों भी बोई जाएगी तैयारी जोर शोर से शुरू है. इससे गन्ने की फसल पर होने वाला खर्च सरसों की पैदावार से निकल जाएगा और किसान को शून्य लागत में मुनाफा मिलेगा.चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक के.एस. ढाका, एसीएम विपीन मिश्र, एरिया इंचार्ज संतोष सिंह व अशोक मिश्र खुद खेत में पहुंचकर बुवाई की प्रक्रिया में शामिल हुए. उनका कहना है कि यह प्रयोग क्षेत्र के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा. किसान टुनटुन मिश्र का कहना है मिल प्रबंधन और कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी की प्रेरणा से ही यह संभव हो पाया है. मैंने पुरानी तकनीक छोड़कर पहली बार टेंचर विधि अपनाई है. एक एकड़ में 600 क्विंटल गन्ने का लक्ष्य रखा है और जल्द ही इसे चार एकड़ तक बढ़ाऊंगा. उन्होंने मिल के कर्मियों के प्रति आभार जताया बोला कि गन्ने की बुवाई में और बेहतर खेती करने में सभी ने मदद की. चीनी मिल प्रबंधन का मानना है कि अगस्त में गन्ने की बुवाई होने से किसानों को मौसम का अतिरिक्त लाभ मिलेगा. खेत खाली पड़ा है तो इंतजार करने की बजाय गन्ना बो दिया जाए, यही संदेश अब क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है. कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी ने कहा ,किसानों को जागरूक किया जा रहा है. बारिश कम हुई है, लेकिन इसका फायदा उठाकर जल्दी बुवाई की जा सकती है. आने वाले दिनों में इसका बड़ा असर दिखेगा. किसान इसमें इंटर कॉप भी कर सकते है. कोट.. किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदानित दन पर बीज, कृषि संयत्र, फर्टीलाइजर और चीनी मिल के सहयोग से गोष्ठी का आयोजन कर किसानों का जागरूक किया जा रहा है. किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रशिक्षण के लिए बाहर भी भेजा जा रहा है. श्रीराम सिंह ईख पदाधिकारी गन्ना उद्योग विभाग

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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