बिहार के इस मंदिर में दी जाती थी इंसान की बलि, भारी संख्या में उमड़ती है भक्तों की भीड़
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 11 Oct 2024 1:08 PM
बिहार के पश्चिम चंपारण में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच आदिकाल से स्थापित नर देवी माता मंदिर की बड़ी महिमा है. आइये जानते हैं इस मंदिर के बारे में...
हर मंदिर की अपनी एक पहचान और विशेषता होती है जिस वजह से लोग श्रद्धा पूर्वक वहां जाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िले में है, जहां कभी इंसान की बलि दी जाती थी. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बसा यह मंदिर नर बलि की वजह से ही नर देवी मंदिर के नाम से विख्यात है. जिले के बगहा के तीन सिद्धपीठों में से एक नर देवी माता स्थान पर पड़ोसी देश नेपाल और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ जुटती है. लोगों में मान्यता है की वर्षों पहले यहाँ नर की बलि देने की परंपरा थी. लेकिन अब यहां भक्त या तो बकरे की बलि देते हैं या उनका कान काटकर छोड़ देते हैं. इसके अलावा यहाँ कबूतर और मुर्गा छोड़ने की भी परंपरा है.

क्यों कहते हैं इसे नर देवी स्थान
पश्चिम चम्पारण ज़िले के घने जंगलों के बीच स्थापित इस नर देवी माता मंदिर की बड़ी महिमा है. यहाँ भक्तों की भीड़ कभी कम नहीं होती है. सालभर हजारों की संख्या में लोग माता के पास आते रहते हैं. लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में सप्तमी के दिन से लाखों की भीड़ यहाँ माता से आशीर्वाद लेने आते हैं. ऐसी मान्यता है कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बसे देवी स्थान पर सैकड़ों वर्ष पूर्व नर की बलि दी जाती थी, जिस कारण इसका नर देवी नाम पड़ा.

जानें इतिहास
सैकड़ों साल पहले राजा जासर के पुत्र आल्हा–ऊदल ने इस मंदिर की स्थापना की थी. कहा जाता है कि राजा जासर माता के अनन्य उपासक थे. राजा जासर देवी मां को बलि के तौर पर अपना सिर काट कर चढ़ाते थे और सिर अपने आप वापस जुड़ जाता था. राजा के मृत्यु के बाद उनके पुत्र आल्हा और ऊदल ने इस मंदिर की स्थापना की और यहां माता रानी की पूजा अर्चना करने लगे.
अब बलि पूरी तरह प्रतिबंधित
मान्यता के अनुसार कभी इंसानों की बलि दिए जाने वाले इस मन्दिर सबसे खास बात यह है कि अब यहाँ बलि पूरी तरह प्रतिबंधित है. देवी मां के भक्तों द्वारा आज यहां जितने भी पशु बलि के लिए लाये जाते हैं उन्हें माता के समक्ष आजाद कर दिए जाता है. वहीं दूर से आने वाले देवी मां के भक्त नारियल चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगते हैं.
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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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