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दिनभर छाए रहे बादल, नहीं हुए सूर्य देव के दर्शन, ठंड ने बढाई मुश्किलें

Updated at : 20 Jan 2025 8:58 PM (IST)
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दिनभर छाए रहे बादल, नहीं हुए सूर्य देव के दर्शन, ठंड ने बढाई मुश्किलें

जिले में पिछले कई दिनों से सुबह-शाम से ही मौसम में आ रही अचानक बदलाव के चलते आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.

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बेतिया. जिले में पिछले कई दिनों से सुबह-शाम से ही मौसम में आ रही अचानक बदलाव के चलते आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. इस क्रम में सोमवार को जहां पूरे दिन सूर्य देव के दर्शन ही नहीं हो पाए, वहीं शाम होते ही बढ़ी ठंड व गलन ने आमजन जीवन पर विपरीत प्रभाव डाला. उधर जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में हाड़कंपाती ठंड के चलते लोगों का हाल बेहाल रहा. सुबह और शाम में घने कोहरे भी छाये रहे.वैसे एक सप्ताह पूर्व से ही मौसम की बेरूखी का सिलसिला जारी है. कहीं हल्की तो कहीं ज्यादा शीतलहर में बर्फीली हवा का नजारा सुबह से लेकर देर रात तक जारी रह रहा है. हालांकि इस दौरान कभी कभी दो तीन दिन सूर्य के दर्शन करीब दिन के मध्य में 12 से एक के बीच में होने से ठंड की गति कम रही है और सुबह शाम बर्फ सरीखी हवा से शरीर में कंपन की स्थिति बन जा रही है. इधर पछिया हवा का असर सोमवार को भी देखने को मिला. सुबह से ही सूर्य देव के दर्शन ही नहीं हो पाए. इस दौरान पूरे दिन सर्द हवाओं से लोग दो चार हुए. वहीं शाम होते ही ठंड व गलन ने अपनी रफ्तार पकड़ ली. खराब मौसम के चलते लोग बाग दिनभर घरों में ही दुबके रहे.

सुबह और शाम सड़कों पर छा जा रही वीरानगी

मकर संक्रांति के बाद से सर्द हवाओं के बीच ठंड और हाड़ कंपकंपाती कनकनी से आम लोगों का जीना दुश्वार हो गया है. लगातार ठंड को देखते हुए जिला व शिक्षा प्रशासन ने स्कूलों को बंद कर दिया है. इधर शादियों का मौसम भी शुरू है. लेकिन शादी-ब्याह और आपात कालीन कार्यों को छोड़कर कोई बेवजह कहीं आवागमन का जहमत नहीं उठा रहा. इस कारण सुबह और शाम में मुख्य मार्ग से लेकर शहरी और ग्रामीण सड़कों पर वीरानगी पसर जा रही है. शाम से पूर्व ही लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने में ही भलाई समझ रहे हैं.

घर और बाहर अलाव बना सहारा

शाम को अचानक बढ़ी ठंड व गलन ने लोगों को अलाव तापने पर मजबूर कर दिया. घर हो या सार्वजनिक स्थान लोग बाग अलाव से चिपके रहे. वैसे पूर्व में नगर प्रशासन की ओर से लगातार चौक-चौराहों पर अलाव जलवाये जाते रहे हैं. लेकिन पिछले सप्ताह से ही इस पर विराम लग गया है, जबकि खुद की व्यवस्था से लोग घरों और बाहर के चौक-चौराहों पर अलाव जला कर बैठने को विवश हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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