Bihar School Uniform News: अब बैंक खाते में पैसे के बदले छात्रों को मिलेगी रेडिमेड स्कूल ड्रेस, पोशाक योजना में बदलाव की तैयारी

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सांकेतिक तस्वीर , AI Generated Image

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Bihar School Uniform News: बिहार के सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री पोशाक योजना के तहत डीबीटी की जगह दो-दो सेट सिली हुई पोशाक देने की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव पर जीविका से सहमति मांगी है. यदि योजना लागू हुई तो लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा. जानिए खबर विस्तार से…

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बेतिया से रवि रंक की रिपोर्ट

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Bihar School Uniform News: बिहार के सरकारी विद्यालयों में संचालित मुख्यमंत्री पोशाक योजना के स्वरूप में बड़ा बदलाव हो सकता है. शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री बालक/बालिका पोशाक योजना के तहत डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) की जगह विद्यार्थियों को दो-दो सेट सिली हुई पोशाक उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) से सहमति मांगी है.

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डीबीटी के बजाय तैयार पोशाक देने की योजना

Image credit: pexels. Com

शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी पात्र छात्र-छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाले दो सेट सिले हुए पोशाक उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके लिए जीविका की सहमति मांगी गई है. वर्तमान में मुख्यमंत्री बालक/बालिका पोशाक योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तथा बिहार शताब्दी मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के बैंक खाते में निर्धारित राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है.

लाखों विद्यार्थियों को मिलता है योजना का लाभ

विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 82.47 लाख तथा वर्ष 2025-26 में 96.12 लाख छात्र-छात्राओं को पोशाक योजना का लाभ मिला. प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधे सिली हुई पोशाक उपलब्ध कराई जा सकती है.

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

शिक्षा विभाग का मानना है कि केंद्रीकृत व्यवस्था के जरिए विद्यार्थियों को समय पर मानक गुणवत्ता की पोशाक उपलब्ध कराना आसान होगा. साथ ही डीबीटी व्यवस्था में राशि के उपयोग से जुड़ी निगरानी संबंधी चुनौतियों को भी कम किया जा सकेगा.

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समय पर वितरण सबसे बड़ी चुनौती

जानकारों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो माप लेने, सिलाई, आपूर्ति और समय पर वितरण जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करना बड़ी चुनौती होगी. हालांकि यह मॉडल सफल होने पर स्कूल शिक्षा की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में नई व्यवस्था स्थापित हो सकती है.

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