बारिश में झील बना मंझौल का शताब्दी मैदान, करोड़ों खर्च के बाद भी जलनिकासी व्यवस्था फेल

Author Vikash Kumar|Edited by Yuvraj Ratan
Updated:
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मंझौल स्थित शताब्दी मैदान में जमा बारिश का पानी

Begusarai News : मंझौल का शताब्दी मैदान भारी बारिश में झील बन गया है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जलनिकासी की व्यवस्था न होने से खेल गतिविधियां ठप पड़ गई हैं. स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

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Begusarai News : अनुमंडल मुख्यालय मंझौल स्थित जयमंगला स्कूल के पीछे बना शताब्दी मैदान एक बार फिर सरकारी विकास योजनाओं की हकीकत बयां कर रहा है. लगातार हो रही बारिश के बाद पूरा मैदान जलमग्न हो गया है. करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए इस खेल मैदान में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यह झील का रूप ले चुका है. इससे खिलाड़ियों, मॉर्निंग वॉक करने वालों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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वर्षों से हो रहा विकास कार्य, फिर भी नहीं बनी जलनिकासी व्यवस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले करीब 25 वर्षों में पंचायती राज संस्थाओं, विधायक निधि, सांसद निधि तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मैदान के विकास पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए. इस दौरान दर्शक दीर्घा, सभा मंच, मिट्टी भराई और अन्य निर्माण कार्य कराए गए, लेकिन वर्षा जल की स्थायी निकासी की व्यवस्था नहीं बनाई गई. इसका परिणाम यह है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में पूरा मैदान पानी से भर जाता है.

वॉलीबॉल और क्रिकेट मैदान पूरी तरह डूबे

वर्तमान में वॉलीबॉल, क्रिकेट सहित अन्य खेलों के मैदान पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं. मैदान के एक छोर से दूसरे छोर तक जलभराव होने से सभी खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं. खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशना पड़ रहा है.

हर साल दोहराई जाती है समस्या

स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि हर वर्ष बरसात के दौरान सामने आती है. कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया.

अधिकारियों और एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं पर लगातार राशि खर्च होने के बावजूद जलनिकासी जैसी बुनियादी आवश्यकता की अनदेखी की गई. उनका कहना है कि योजना तैयार करने वाले अधिकारियों, तकनीकी स्वीकृति देने वाले इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों की लापरवाही का खामियाजा अब खिलाड़ी और आम लोग भुगत रहे हैं.

स्थायी जलनिकासी प्रणाली विकसित करने की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शताब्दी मैदान में वैज्ञानिक तरीके से स्थायी जलनिकासी प्रणाली विकसित कराने की मांग की है. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित इस खेल मैदान का उपयोग पूरे वर्ष खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के लिए हो सके, इसके लिए जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है.


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