शहर में दो वर्षों से लेकर पांच वर्षों तक लटकी पड़ी है कई विकास योजनाएं

नगर निगम द्वारा बेगूसराय शहर का वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक बजट तैयार किया जा रहा है.
बेगूसराय. नगर निगम द्वारा बेगूसराय शहर का वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक बजट तैयार किया जा रहा है. नगर निगम प्रशासन द्वारा बेगूसराय शहर के नागरिकों से अनुरोध किया है कि अपना बहुमूल्य सुझाव आइडी बीएमसीबीजी एट दी रेट जी मेल डाॅट काॅम पर दे सकते हैं अथवा डाक के माध्यम से अथवा स्वयं लिखित रूप से 10 फरवरी तक बेगूसराय नगर निगम कार्यालय में उपलब्ध कराया जा सकता है. जिससे कि बेगूसराय शहर के लिए विकासोन्मुखी बजट तैयार किया जा सके. बेगूसराय शहर के नागरिकों द्वारा अपना बहुमूल्य सुझाव प्रदान किये जाने हेतु निर्धारित बिंदु भी तय किये गये हैं. जिनमें शहर में प्रदूषण नियंत्रण पर सुझाव, शहर को स्वच्छ बनाने हेतु सुझाव, शहर में सौंदर्याकरण हेतु सुझाव, पार्कों और हरित क्षेत्रों के विकास हेतु सुझाव,बेगूसराय में सड़कों एवं नालियों आदि चुनयादी ढ़ाचों का विकास हेतु सुझाव,जल जमाव से मुक्ति एवं जल निकासी से संबंधित सुझाव के साथ साथ अन्य कोई बहुमूल्य सुझाव भी देना शामिल है. हर वर्ष बजट पूर्व शहरवासियों से सुझाव लेकर विकास योजनाओं को महापौर के द्वारा तैयार की जाती है. उस पर बजट भी तैयार की जाती है. पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 571 करोड़ 33 लाख 71 हजार रुपये का बना था : विदित हो कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 571 करोड़ 33 लाख 71 हजार रुपये का बना था. यहां बताते चलें कि घोषित योजना एवं खर्च से काफी अधिक की राशि बजट में रखी जाती है. जिससे कि साल भर के अंदर कोई बड़ा प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिलती हो तो बजट में राशि का प्रावधान रहने पर योजना ली जा सकती है. वित्तीय वर्ष 25-26 में बजट में शहर के आधुनिकीकरण करने को लेकर विशेष रुप से राशि का प्रावधान किया गया था. इसके साथ ही कम्यूनिटी सेंटर, ओल्ड-एज होम, वृद्धजनों के लिए आश्रय स्थल, सार्वजनिक शौचालयों, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय, महिलाओं के लिए पिंक टायलेट(चाइल्ड फिडिंग के साथ), सबके लिए आवास,पार्क एवं ओपन जिम, मल्टिस्ट पार्किंग एरिया,बस स्टैंड का आधुनिकीकरण,पीसीसी सड़क,ब्लैक टैप्ड सड़क,फेवर ब्लाॅक निर्मित मार्ग, जलनिकासी के लिए ड्रैनेज, पुल-पुलिया, हैंडपंप, जलाशय पोखर, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरा, वेलकम द्वार, कचरा निकासी, बाढ़ जल निकासी के लिए भी अच्छी खासी राशि का प्रावधान किया गया था. इसके अलावे प्रदूषण नियंत्रण, सौंदर्यीकरण,संक्रामक रोग रोकथाम,एंटी लार्वा,स्प्रे एवं फाॅगिंग के लिए भी राशि की व्यवस्था बजट में की गयी थी. इसके साथ ही वाहन की मरम्मत तथा महिला सशक्तिकरण भी शामिल था. बुडको की कार्यशैली तथा नगर विकास विभाग पटना की विभागीय उदासीनता के कारण शहरवासी हो रहे हलकान : वर्ष 2025-26 के बजट में नगर निगम द्वारा कई छोटे बड़े विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा गया. नगर निगम द्वारा धरातल पर उतारी गयी बहुत से योजना के कारण नागरिक सुविधाओं में बढ़ोतरी भी हुई. परंतु शहरवासियों के बीच बुडको की कार्यशैली तथा नगर विकास विभाग पटना की विभागीय उदासीनता के कारण शहरवासी आज भी काफी परेशानी उठा रहें हैं. जिससे लोगों में नाराजगी भी है. यहां यह भी बताते चलें कि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड ( बुडको) बिहार सरकार की एक एजेंसी है जिसे बिहार सरकार द्वारा शहरी बुनियादी ढांचे के विकास, योजना और क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारी दी गयी है. बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज व नलजल योजना का क्रियान्वयन के लिए विभाग द्वारा बुडको को ही जवाबदेही दी गयी है. दो वर्षों से भी अधिक समय से स्ट्राॅम वाटर ड्रेनेज जैसी महत्वाकांक्षी योजना स्वीकृति के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग में फंसे रहने के कारण काफी परेशानी झेल रहे हैं. दूर हो सकती थी जलनिकासी की समस्या : स्ट्राम वाटर ड्रेनेज योजना से शहर के रेलवे लाइन से उत्तर तरफ बसे शहरवासियों की जलनिकासी की समस्या दूर हो सकती थी. शहर के उत्तर तरफ सिंघौल, हर्रख नागदह, आनंदपुर, बाघा, बाघी,पनहांस व लोहिया नगर जैसे बड़े सघन आबादी वाला क्षेत्र है. इस तरफ जलनिकासी की समस्या लंबे समय से है. जिसका हल नगर विकास एवं आवास विभाग की उदासीनता के वजह से नहीं हो पा रहा है. महापौर पिंकी देवी के द्वारा विभागीय मंत्री व मुख्यमंत्री को भी योजना की स्वीकृति के लिए बार बार आग्रह की जा रही है, परंतु मामला फाइलों में दबा पड़ा है. जिसका असर टैक्स वसूली पर भी पड़ रहा है. जलजमाव से बचाव नहीं तो टैक्स नहीं देने की कर रहे हैं बात : पंचायत क्षेत्र से काट कर नगर निगम में जोड़े गए वार्डों के लोग जलजमाव से बचाव नहीं तो टैक्स नहीं देने की बात कर रहें हैं, होल्डिंग टैक्स माफ करने की मांग कर रहें हैं. टैक्स वसूली एंजेसी को भी कहीं कहीं जनाक्रोश का सामना करना पड़ रहा है.वहीं पांच वर्षों से शहर में चल रही नमामी गंगे परियोजना के तहत सीवरेज योजना वर्ष 2025 में भी अटक कर रह गयी. वहीं अमृत नलजल योजना का कार्य भी कथित रुप से संपन्न तो कर दी गयी लेकिन शहरवासियों को समुचित रुप से नल जल योजना का भी लाभ नहीं मिल सका. दोनों ही योजना बिहार सरकार की कार्य एजेंसी बुडको द्वारा क्रियान्वयन की जा रही है. शहरवासियों को योजना का लाभ नहीं मिलने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. लोगों के बीच बुडको की कार्यशैली को लेकर काफी चर्चा है. बिहार सरकार द्वारा जब तक बुडको को सदृढ़ नहीं की जाती तब तक शहर में राज्य की बड़ी परियोजनाओं को लेकर शहरवासियों में काफी संशय बना हुआ है. सीवरेज योजना उद्घाटन के बावजूद भी शहरवासियों के लिए बन गया है सिरदर्द : शहर में बिहार सरकार की कार्य एजेंसी बुडको द्वारा नगर विकास विभाग व जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के नमामि गंगे परियोजना का लगभग 236 करोड़ की सीवरेज योजना का क्रियान्वयन का कार्य पांच वर्षों से चल रहा है. धरातल पर उतरने में हो रहे साल दर साल विलंब से यह योजना शहरवासियों के लिए सिर-दर्द बनकर रह गया है. अक्टूबर माह से सीवरेज का क्रियान्वयन ठप पड़ा हुआ है जिससे लोग परेशान हो रहें है. वर्ष 2019 में जब सीवरेज योजना का शिलान्यास किया गया था. उस समय के बाद निर्धारित एरिया में जो भी नये भवन बने हैं. भवन मालिकों ने शौचालयों के बड़े बड़े सेफ्टी टैंक का निर्माण न कराकर छोटा छोटा चैंबर के आकार का ही टंकी बनवाया है. लोगों को यह आशा थी कि दो वर्षों तक में योजना धारातल पर उतर जायेगा. घर का सभी गंदा पानी पंप स्टेशन के जरिए अंडरग्राउंड पाइप के माध्यम से निकल ही जायेगा. परंतु कार्य शुरु हुए लगभग पांच वर्ष हो गये परंतु आज तक सीवरेज का लाभ मिलना शुरु नहीं हो पाया. वैसे नये भवन मालिक जिन्होंने घरों में बड़ा सेंप्टी टैंकी नहीं बनवाया है मानसिक परेशानी से गुजर रहें हैं. बुडको और नगर निगम में सही समन्वय नहीं रहने के कारण भी की समस्याएं पैदा हो रही है. नगर निगम प्रशासन भी बुडको की कार्यशैली से लगातार परेशान हैं. जगह जगह जो पुराना रिस्टोरेशन कराया गया था. वहां सड़क धंसने लगा था. सड़के उबड़-खाबड़ हो गयी थी. वैसे कुछ सड़कों को नगर निगम प्रशासन द्वारा समतलीकरण का कार्य कर दिया गया है. परंतु आज भी कई सड़क टूटी-फूटी अवस्था में है. नगर निगम महापौर द्वारा भी जिला पदाधिकारी से लेकर विभागीय मंत्री तक सीवरेज व नल-जल योजना को लेकर बुडको व ठेका कंपनी के कार्यशैली को लेकर शिकायतें की गयी. इसके बावजूद भी सीवरेज योजना को धरातल पर उतरने का लोग इंतजार ही कर रहें हैं और कई तरह की परेशानियां झेल रहें हैं. अभी तक 23 वार्डों में सीवरेज नेटवर्क से घरों का कनेक्शन भी नहीं हुआ है. पांच साल के बाद भी समुचित रूप से नल जल योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं शहर के लोग : नगर निगम क्षेत्र में अटल नवीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन अमृत के तहत वर्ष 2019 में जब शहर के लोगों के लिए घर तक फिल्टर्ड पेय जल पहुंचाने की योजना का क्रियान्वयन बुडको द्वारा शुरु की गयी तो शहर के लोगों में यह आस जगी थी कि अब उन्हें शुद्ध पेयजल पीने को मिलेगा. परंतु योजना शुरु होने के पांच वर्षों के बाद भी योजना समुचित रूप से धरातल पर नहीं उतर सकी है. हालांकि उक्त योजना का अक्तूबर माह 2024 में उद्घाटन भी कर दी गयी है. विभिन्न वार्डों में रहने वाले लोगों का कहना है कि नल-जल का जो कनेक्शन किया गया है. उसमें काफी संख्या में घरों का आज तक कनेक्शन नहीं हुआ है. पानी का सप्लाई भी बहुत ही अनियमित तरीके से होती है. कुछ मोहल्ले में तो पानी पहुंचाया भी नहीं जा रहा है. भूमिगत पाइप से लगातार लीकेज होने के कारण अक्सर सड़कों पर पानी बहने की शिकायत होती रहती है. जिससे शहर के लोग काफी परेशान हैं. शहर के लोग योजना का समुचित लाभ नहीं ले पा रहें हैं. 1.25 अरब की लागत से नगर निगम के 34 वार्डों में अमृत नलजल योजना का क्रियान्वयन किया गया. इसके बावजूद भी शहर वासियों को समुचित रुप से नल जल का लाभ नहीं मिल रहा है. जगह जगह लीकेज की समस्या होने से बार बार पानी सड़कों पर बहती रहती है. पूर्व में बनी अमृत नल जल योजना से वंचित निगम क्षेत्र के अन्य 11 वार्डों में भी योजना पहुंचाने की स्वीकृति भी अब मिल गयी है. अब अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत-02) अंतर्गत 132 करोड़ 84 लाख 73 हजार रुपये की स्वीकृति हुई है. इस योजना के तहत वार्ड नंबर तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ, नौ, 14, 15, 18 व 19 सहित कुल ग्यारह वार्डों में भी पाइप बिछाकर जल पहुंचाने का कार्य शुरु हो जायेगा. पूर्व के नल जल योजना क्रियान्वयन की कार्य शैली में बदलाव करने को लेकर महापौर ने मंत्री और मुख्यमंत्री से भी मिलकर लगातार आग्रह की है. परंतु बड़े-बड़े योजना सही तरीके से धरातल पर उतरेगी अथवा नहीं लोगों में यह संशय बना हुआ ही है.
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