पतिव्रता स्त्री का धर्म होता है अपने पति की सेवा करना : माधवाचार्य

Updated at : 03 May 2025 10:33 PM (IST)
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पतिव्रता स्त्री का धर्म होता है अपने पति की सेवा करना : माधवाचार्य

जहां नारी का सम्मान नहीं होता, वहां ईश्वर का वास अर्थात कभी लक्ष्मी नहीं रहते हैं, लेकिन जहां नारी का सम्मान होता है,वहां हमेशा ईश्वर का निवास होता है.

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बछवाड़ा. जहां नारी का सम्मान नहीं होता, वहां ईश्वर का वास अर्थात कभी लक्ष्मी नहीं रहते हैं, लेकिन जहां नारी का सम्मान होता है,वहां हमेशा ईश्वर का निवास होता है. इसलिए नारी का हमेशा सम्मान करना चाहिए. उक्त बातें प्रखंड क्षेत्र के गोविंदपुर तीन पंचायत के मुरलीटोल गांव स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को वृंदावन से पधारे कथा वाचक माधवाचार्य जी महराज ने कथा के दौरान कहा. उन्होंने कहा कि पतिव्रता स्त्री का धर्म होता है कि अपने पति की सेवा करें. पति जैसा भी हो चाहे वो वृध,बीमार,बदसुरत किसी भी प्रकार का हो उसके अनुसार रहन सहन के साथ साथ उनके आज्ञा का पालन करना पत्नी का धर्म होता है. पतिव्रता स्त्री वही है जो सपने में भी पर पुरुष के बारे में नहीं सोचती है और हमेशा पति की सेवा करना पति को परमेश्वर के रूप में देखती है वहीं पतिव्रता स्त्री है. उन्होंने कहा किए वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि महिलाएं शादी के बावजूद इस तरीके से सिंदुर लगाती है जैसे शादी हुआ ही नहीं हो, जो धर्म के विरुद्ध है महिलाओं अपने मांग में सिंदूर अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पूजा पाठ का अपना एक अलग ही महत्व है. माता अनुसुइया ने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए ब्रह्मा, विष्णु व महेश जो तीनों लोकों के सृजनहार,पालनहार व संहारक है, वैसे तीनों विभूति को तप के बल पर बालक रूप में बना दिया. इसलिए महिलाओं को हमेशा अपने पतिव्रत धर्म का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है. मनुष्य को अपने गुरू में परब्रह्म का दर्शन करना चाहिए. उन्होंने बताया कि जब किसी मनुष्य से समक्ष ईश्वर व गुरु दोनों सामने हो तो गुरु के प्रणाम के उपरांत ईश्वर को प्रणाम करना चाहिए, उन्होंने सत्संग पर चर्चा करते हुए कहा कि सत्संग के माध्यम से हम आम लोगो को पारिवारिक पृष्ठ भूमि पर सनातन संस्कृति के द्वारा समस्त जन मानस को धर्म से जोड़े रखने की प्रेरणा प्राप्त होता है. जीवन में जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है हमें उनका सम्मान व आदर करना चाहिए. यही सत्संग में आने वाले लोगो को प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि जीवन में माता पिता भाई बहन समाज के दिन दुखी के प्रति त्याग,आदर की भावना होना चाहिए. वही शनिवार को हनुमान जी के प्रतिमा स्थापित को लेकर कुंवारी कन्याओं को खीर भोजन कराया गया तथा प्रसाद का वितरण किया गया. मौके पर नव युवक दुर्गापूजा समिति मुरलीटोल के सदस्य मनोज कुमार चौधरी, सुजीत कुमार, विट्टु पोद्धार,गणेश पंडित, दीपक कुमार, वंदन पोद्दार, शिव योगेन्द्र पंडित, सुभम कुमार, मृत्युंजय कुमार, आशुतोष कुमार, भीम सहनी समेत सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष उपस्थित थे

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