बिहार का 'मिनी देवघर' है बेगूसराय का बाबा हरिगिरि धाम? सावन में दर्शन मात्र से चमक उठती है किस्मत, जानें इसका इतिहास

Author Vikash Kumar|Edited by Sakshi Kumari
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हरिगिरि धाम गढ़पुरा

हरिगिरि धाम गढ़पुरा

Begusarai Baba Harigiri Dham : बेगूसराय के गढ़पुरा में स्थित बाबा हरिगिरि धाम सावन में आस्था का केंद्र है. यहां के स्वयंभू शिवलिंग, सप्तकूप और त्रिदंडी ऋषि की समाधि का पौराणिक महत्व श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. जानें कैसे पहुंचें और क्या है इसका विशेष महत्व.

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Begusarai Baba Harigiri Dham : बेगूसराय जिले के गढ़पुरा स्थित बाबा हरिगिरि धाम सावन महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. स्वयंभू शिवलिंग, सप्तकूप, त्रिदंडी ऋषि की समाधि और पुराणों में वर्णित मान्यताओं के कारण इस शिवधाम का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है.

सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था

श्रावण मास के दौरान बेगूसराय के गढ़पुरा स्थित बाबा हरिगिरि धाम में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन में श्रद्धालु सिमरिया गंगा घाट से कांवर में गंगाजल लेकर 'बोल बम' के जयघोष के साथ पैदल यात्रा करते हुए बाबा हरिगिरि धाम पहुंचते हैं.

बाबा हरिगिरि धाम का पौराणिक महत्व

गढ़पुरा के विद्वान पंडित दिनेश झा 'इंदु' के अनुसार बाबा हरिगिरि धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में संकेत रूप में मिलता है. उन्होंने बताया कि वेदों और पुराणों में वर्णित कई तीर्थस्थलों की तरह इस धाम की धार्मिक मान्यताएं भी पौराणिक प्रमाणों से जुड़ी हुई हैं.

पुराणों में मिलता है इस क्षेत्र का उल्लेख

पंडित दिनेश झा 'इंदु' के अनुसार ब्रह्मवैवर्त पुराण में कमल दल से आच्छादित सरोवर में विराजमान मंगला देवी का उल्लेख मिलता है, जिसे वर्तमान कावर झील और जयमंगला माता से जोड़ा जाता है. वहीं मंगला देवी के दक्षिण में बहने वाली चंद्रभागा नदी का भी वर्णन मिलता है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है.

सप्तकूप और त्रिदंडी ऋषि की समाधि बनी आस्था का केंद्र

रुद्रयामल तंत्र और कालिका पुराण में मिथिला और अंग प्रदेश की सीमा पर चंद्रभागा नदी के तट पर भगवान शिव के निवास का उल्लेख मिलता है. शास्त्रों में वर्णित सप्तकुंड और त्रिदंडी ऋषियों के निवास को स्थानीय लोग वर्तमान बाबा हरिगिरि धाम परिसर में स्थित सात प्राचीन कूप और त्रिदंडी ऋषि की समाधि से जोड़ते हैं. श्रद्धालु इन्हें पौराणिक वर्णनों का जीवंत प्रमाण मानते हैं.

जलाभिषेक और महामंत्र जाप की विशेष मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा हरिगिरि धाम में श्रद्धा के साथ 'ॐ नमः शिवाय' महामंत्र का जाप करने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इसी विश्वास के चलते सावन महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु

बाबा हरिगिरि धाम रेल और सड़क दोनों मार्गों से सुगमता से पहुंचा जा सकता है. समस्तीपुर–सहरसा रेलखंड पर स्थित डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा रेलवे स्टेशन से यह धाम करीब एक किलोमीटर पश्चिम में स्थित है. इसके अलावा बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, रोसड़ा और हसनपुर से सड़क मार्ग के जरिए भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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