ठनका से कैसे बचें? बेगूसराय के स्कूलों में बच्चों को दी गई आपदा सुरक्षा की ट्रेनिंग

Author Sakil beg|Edited by Sakshi Kumari
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सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम में मौजूद बच्चे

सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम में मौजूद बच्चे

Begusarai Safe Saturday Program : बेगूसराय के नावकोठी प्रखंड के स्कूलों में 'सुरक्षित शनिवार' के तहत बच्चों को वज्रपात और ठनका से बचने के तरीके सिखाए गए. आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया. बच्चों को प्राथमिक उपचार की भी जानकारी दी गई.

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Begusarai Safe Saturday Program : बेगूसराय के नावकोठी प्रखंड के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 'सुरक्षित शनिवार' का आयोजन किया गया. इस दौरान विद्यार्थियों को वज्रपात और ठनका से बचाव के उपायों की जानकारी देकर आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक किया गया.

विद्यालयों में आयोजित हुआ सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम

आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर नावकोठी प्रखंड के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में शनिवार को मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत 'सुरक्षित शनिवार' का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान फोकल शिक्षकों ने जुलाई माह के तीसरे शनिवार के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा निर्धारित विषय 'वज्रपात एवं ठनका से बचाव' पर विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी.

बच्चों को बताए गए आपदा से बचाव के उपाय

कार्यक्रम में छात्रों को वज्रपात के दौरान होने वाले संभावित खतरों और उनसे बचने के सुरक्षित तरीकों की जानकारी दी गई. शिक्षकों ने बताया कि वर्षा के मौसम में तड़ित बिजली यानी ठनका गिरने से हर वर्ष जान-माल की क्षति होती है. ऐसे में मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

खेत, बगीचे और पेड़ों के नीचे रहने से बचने की सलाह

बच्चों को बताया गया कि खेतों में काम करने वाले मजदूर, खुले मैदान में मौजूद लोग तथा पेड़ों के नीचे शरण लेने वाले लोग ठनका की चपेट में अधिक आते हैं. इसलिए वज्रपात के दौरान सुरक्षित भवन में शरण लेनी चाहिए और पेड़, बिजली के खंभे, तार या ऊंचे खजूर के पेड़ों के पास नहीं रुकना चाहिए.

प्राथमिक उपचार की भी दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि ठनका की चपेट में आए व्यक्ति की सहायता के लिए तुरंत प्रयास करना चाहिए और समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए. साथ ही आपदा के समय घबराने के बजाय सतर्कता और सही जानकारी के साथ काम करने की सीख दी गई.

आपदा जागरूकता बढ़ाने पर रहा जोर

फोकल शिक्षकों ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों में आपदा के प्रति सजगता विकसित करना और उन्हें जोखिम कम करने के व्यवहारिक उपायों से परिचित कराना है. कार्यक्रम में स्कूली बच्चे, सहायक शिक्षक और विद्यालय के अन्य कर्मी उपस्थित रहे.

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