Begusarai News : कांवर टाल में 25 बीघे में हो रही मखाने की खेती

Updated:
विज्ञापन
Begusarai News : कांवर टाल में 25 बीघे में हो रही मखाने की खेती

जिले का चर्चित कांवर टाल, जो वर्षों से मृतप्राय स्थिति में था, अब एक नयी उम्मीद लेकर लौटा है. इस टाल की पानी से भरी बेकार पड़ी भूमि अब मखाना उत्पादन के लिए तैयार है. पहली बार यहां 25 बीघे में मखाने की खेती शुरू की गयी है.

विज्ञापन

विपिन कुमार मिश्र, बेगूसराय

जिले का चर्चित कांवर टाल, जो वर्षों से मृतप्राय स्थिति में था, अब एक नयी उम्मीद लेकर लौटा है. इस टाल की पानी से भरी बेकार पड़ी भूमि अब मखाना उत्पादन के लिए तैयार है. पहली बार यहां 25 बीघे में मखाने की खेती शुरू की गयी है. कटिहार जिले के मखाना उत्पादक अजय कुमार और सुभाष मंडल ने मंझौल गांव के किसानों बैजू सहनी, वीरेंद्र कुमार सिंह, अशोक प्रसाद सिंह और संजय सिंह की जमीन को लीज पर लेकर इस प्रयोग की शुरुआत की है. किसानों का कहना है कि कांवर टाल की भूमि और जलवायु मखाना की खेती के लिए उपयुक्त है. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में यह इलाका मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है. यह पहल न केवल बेकार पड़ी भूमि का सदुपयोग है, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए आमदनी का नया जरिया भी बन सकती है. विशेषज्ञों की मानें तो मखाना को ””हरित सोना”” कहा जाता है और इसकी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है.

एक बीघे में पांच-छह क्विंटल की उपज की संभावना

बाजारों में मखाने की काफी डिमांड है. इसी के तहत इसकी खेती शुरू की गयी है. बताया जाता है कि एक बीघे में पांच-छह क्विंटल की उपज की संभावना है. मांग के अनुरूप 12-14 हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य मिलते हैं. लीज पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों ने बताया कि कांवर की जमीन मखाने की खेती के लिए उपयुक्त है और इस क्षेत्र के किसान काबर के पानी में डूबे जमीन से अधिकाधिक लाभ ले सकते हैं.

खेती में पानी की गुणवत्ता और मात्रा का रखा जाता है ध्यान : मखाने की खेती में पानी की गुणवत्ता और मात्रा का ध्यान रखा जाता है. इसके लिए गर्म व आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है. समय समय पर पौधों को कीट रोगों से बचाने के लिए उचित प्रबंधन करना आवश्यक हैं. छह महीने में तैयार होने वाली इस फसल को लेकर सरकार भी जोर दे रही है. इसको बढ़ावा देने को लेकर काफी सब्सिडी दे रही है. सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मखाना उत्पादकों को वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है.

स्थानीय किसानों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता

स्थानीय किसानों को मखाने की खेती के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है, ताकि वे भी इस फसल का लाभ उठा सकें. कटिहार के मखाना उत्पादकों ने बताया कि वे स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं. कांवर टाल की जमीन में मखाने की खेती से किसानों की नयी उम्मीद जगी है. इस फसल से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है. मखाने की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है, जो किसानों आय प्रदान के साथ साथ जल संसाधनों की संरक्षण में भी मदद करती है जिसकी खेती मुख्य रूप से बिहार एवं पूर्वी राज्यों में की जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार मखाने में प्रोटीन फाइबर सहित कई पोषण तत्व पाये जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. फिलहाल कांवर के इलाके में मखाने की खेती शुरू होने से स्थानीय किसानों में काफी हर्ष देखा जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Shah Abid Hussain

लेखक के बारे में

By Shah Abid Hussain

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन