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जीआरपी ने बरौनी जंक्शन से 30 किलो वजन के तीन कछुए किये बरामद

Updated at : 14 Dec 2025 9:29 PM (IST)
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जीआरपी ने बरौनी जंक्शन से 30 किलो वजन के तीन कछुए किये बरामद

बरौनी जीआरपी पुलिस ने रविवार की सुबह प्लेटफार्म चेकिंग के दौरान लगभग तीस किलो का तीन कछुआ लावारिस हालत में बरामद किया है.

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बरौनी. बरौनी जीआरपी पुलिस ने रविवार की सुबह प्लेटफार्म चेकिंग के दौरान लगभग तीस किलो का तीन कछुआ लावारिस हालत में बरामद किया है. इस दौरान तस्कर फरार होने में सफल रहा. इस संबंध में जीआरपी बरौनी इंस्पेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि बरौनी जंक्शन पर राजकीय रेल पुलिस बरौनी द्वारा तीन कछुआ लावारिस हालत में बरामद किया गया. जिसे वन विभाग बेगूसराय को विधिवत सुपुर्द जर दिया गया है. और अज्ञात तस्कर के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. बताते चलें कि इस समय बरौनी जंक्शन पर शराबबंदी एवं रेल परिसर में अपराध नियंत्रण को लेकर प्रतिदिन रेल पुलिस के द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलया जा रहा है. ट्रेनों व स्टेशन परिसर की लगातार चेकिंग की जा रही है. जानकारों के मुताबिक दुर्लभ प्रजाति के कछुए होने से इसकी अंतराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा डिमांड है और इसकी बंगाल सहित विदेशों में सर्वाधिक डिमांड है. कछुआ की तस्करी कोलकाता तक होने की बात सामने आ रही है. कही जाती है. एक तरफ जहां सरकार कछुआ को बचाने की मुहिम चला रही है तो तस्कर उसके जान के पीछे पड़े हैं. वहीं जानकार बताते हैं कि कछुओं की तस्करी करने का मुख्य उद्देश्य है दवाओं के लिए इनका होने वाला इस्तेमाल. दरअसल बॉडी की रेजिस्टिविटी एवं सेक्सुअल पॉवर को बढ़ाने वाली दवा निर्माण में कछुआ के खोल और मांस का उपयोग होता है. यही वजह है कि तस्कर हर साल बोरा व झोलों में कछुओं को भरकर चोरी-छुपे तस्करी के अन्य राज्यों में जाते हैं. जबकि कछुआ को सुख समृद्धि और शुभ का प्रयाय माना जाता है.

बंगाल से तस्करों की मदद से अन्य देश भेजा जाता है कछुआ

जानकार बताते हैं कि कछुआ ज्यादातर उत्तरप्रदेश राज्य के गोंडा, बहराईच, लखीमपुर आदि जगहों से ज्यादा संख्या में पकड़ा किया जाता है. फिर इसे इकठ्ठा कर तस्करों की मदद से ट्रेनों के माध्यम से बिहार के रास्ते बंगाल ले जाया जाता है. तस्कर पहले से ही इस कारोबार से जुड़े बंगाल के तस्करों के संपर्क में रहते हैं और डिमांड के अनुसार तय जगह पर सप्लाई देते हैं. वहां से कछुआ को बड़ी चालाकी से म्यांमार एवं बंगाल के रास्ते मलेशिया, चीन और हांगकांग आदि देशों में भेजा जाता है.

नवंबर, दिसंबर व जनवरी महीने में कछुआ की ज्यादा होती है तस्करी

जानकारों के मुताबिक कछुओं से जुड़ी मान्यताएं और शक्तिवर्धक दवा में उपयोग उसकी जान का दुश्मन बन गयी हैं. इसलिए बड़े पैमाने पर उसकी तस्करी होती है. कछुए को नवंबर, दिसंबर एवं जनवरी में पकड़ा जाता है .कछुए के लिए नवंबर-दिसंबर से लगभग तीन महीने का हाइबरनेशन पीरियड शुरू होता है. इस दौरान कछुआ खाना-पीना बंद कर देते हैं और सुस्त हो जाते हैं. इसी का फायदा उठाकर तस्कर उन्हें इस माह में पकड़कर ईकठ्ठा करते हैं और सप्लाई करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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