दयानंद मालाकार के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उत्तर बिहार में नक्सलियों का नेटवर्क हुआ ध्वस्त

जिले के तेघड़ा थाना क्षेत्र का नोनपुर इलाका वर्षो से नक्सली गतिविधियों के लिए न सिर्फ चर्चित रहा है,
बेगूसराय. जिले के तेघड़ा थाना क्षेत्र का नोनपुर इलाका वर्षो से नक्सली गतिविधियों के लिए न सिर्फ चर्चित रहा है, वरन कई घटनाओं को अंजाम देकर जिला से लेकर राज्य पुलिस मुख्यालय तक सिरदर्द बना रहा है. इसी का नतीजा है कि पुलिस की इस इलाके पर हमेशा पैनी नजर बनी रहती है. तेघड़ा थाना क्षेत्र स्थित नोनपुर गांव में 31 दिसंबर की शाम भाकपा माओवादी उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी के सचिव दयानंद मालाकार उर्फ सनेश उर्फ इंद्रेश भारती उर्फ आकाश के एनकाउंटर के बाद तरह-तरह की चर्चा हो रही है. वहीं नक्सली दयानंद मालाकार के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उत्तर बिहार में नक्सलियों का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है. मृतक के पुत्र, भाई सहित परिजन एवं मुहल्ले के लोग पुलिस पर फेक एनकाउंटर का आरोप लगा रहे हैं. लोगों ने पुलिस पर दयानंद मालाकार का फेक एनकाउंटर करने के साथ उसकी पत्नी ममता देवी को भी बेवजह गिरफ्तार करने का आरोप लगाया है. भाकपा-माले की जांच कमेटी ने भी इस पर सवाल उठाये हैं, लेकिन जो सच सामने आये हैं, उसे स्पष्ट हो रहा है कि न तो दयानंद मालाकार का फेक एनकाउंटर किया गया और न ही उसकी पत्नी ममता देवी बेकसूर है. बल्कि ममता देवी भी अपने पति दयानंद के नक्शे कदम पर चलते हुए न सिर्फ चर्चित नक्सली रही है, वरन वह जेल भी जा चुकी है.
स्पेशल टीम ने की मोर्चाबंदी
मुठभेड़ में शामिल एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, एसटीएफ को सूचना मिली थी कि दयानंद अपने घर पर आया हुआ है और गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर किसी नक्सली घटना को अंजाम देने की फिराक में है. इसके बाद तुरंत एसटीएफ के एआरजी, एसओजी-3, कमांडो, बेगूसराय जिला डीआइयू, अभियान आदि की स्पेशल टीम बनाई गई. दयानंद के घर से करीब 1 किलोमीटर पहले मैदावभनगामा-पकठौल सड़क पर टीम दो हिस्सों में बंट गई. एक टीम के नौ पुलिसकर्मी तीन बाइक पर सवार होकर खेत के रास्ते से उसके घर के नजदीक पहुंचे. दूसरी टीम गांव होकर पहुंची. जिसके बाद पुलिस की टीम को सफलता मिली.1999 में नक्सली गतिविधियों में सक्रिय हुआ था दयानंद मालाकार
पुलिस सूत्रों के अनुसार 1999 में हामोडीह निवासी योगेंद्र मालाकार पुत्र दयानंद मालाकार पड़ोसी गांव नोनपुर में सक्रिय नक्सली गतिविधि में शामिल लोगों के संपर्क में आया और उनके साथ रहने लगा था. 1999 में मात्र 19 वर्ष की उम्र में हत्या कर सुर्खी में आये दयानंद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और नक्सली संगठन में शामिल हो गया. इसी साल उसने खगड़िया के अलौली में हत्या को अंजाम दिया. उसके बाद लगातार हत्या, लेवी वसूली, रंगदारी और जमींदार की जमीन पर कब्जा करना ही उसका काम रह गया.दूसरी जाति की ममता से किया था प्रेम विवाह
इसी दौरान नक्सली गतिविधि में शामिल रामभरोसी साहनी के संपर्क में आया तो उसके घर पर आना-जाना शुरू हो गया. रामभरोसी की पुत्री ममता कुमारी भी नक्सली गतिविधि में शामिल थी. दोनों के बीच जब लगातार मुलाकात होने लगी, तो प्यार हो गया और दयानंद ने अपनी जाति से हटकर सहनी परिवार की ममता के साथ शादी कर ली तथा दोनों नक्सली गतिविधि में साथ-साथ काम करने लगे. वह नोनपुर में ही जमींदार की जमीन पर अपने सहयोगियों के साथ जबरदस्ती लाल झंडा गाड़ करके घर बनाकर रहने लगा. नक्सली संगठन में इतना सक्रिय हो गया कि उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी की कमान मिल गई और वह बेगूसराय से लेकर खगड़िया और मुजफ्फरपुर आसपास के जिलों में घटना को अंजाम देने लगा. उत्तर बिहार में नक्सलियों का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है.एनकाउंटर के बाद हिसाब-किताब का बरामद कागजात कई बातों का करता है खुलासा
एनकाउंटर के बाद छापेमारी में इसके पास से नक्सली गतिविधि से जुड़ा हिसाब किताब भी बरामद किया गया है, जो कि बड़ा खुलासा करता है. दिनकर नाम से 27 दिसंबर 2025 को लिखे गए तीन पेज के हिसाब को ऊपरी कमेटी के कामरेड घुटु जी एवं जोनल सेक्रेटरी शंभू जी को लाल सलाम करते हुए लिखा गया था. जिसमें दिनकर के 4 सितंबर 2025 को जेल से बाहर आने और चुनाव के दौरान पुलिस की गतिविधि तेज होने के कारण जेल से निकलने में देरी होने के लिए माफी मांगी गई है. लेटर में कहा गया था जेल से आने के बाद पार्टी के काम को जिम्मेदारी पूर्वक करना चाहता हूं और हमें काम की जिम्मेदारी देते हुए हथियार और गोली दिया जाए. इलाका में चलने के लिए अधिक सहयोग किया जाए, बीमारी में भी इलाज की जरूरत है। इस हिसाब में जेल जाने से पहले वाला कर्ज 190000 बताया गया है. 14 अप्रैल 2024 से 4 सितंबर 2025 तक जेल का खर्च, कोर्ट का खर्च, पेट्रोल, मोबाइल और गाड़ी रिलीज करवाने का खर्च 225000 बताया गया है. वहीं, जेल के अंदर 120000 रुपए खर्च करने की बात कही गई है. इस दौरान पुलिस ने भाकपा माओवादी उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी के सचिव सनेश का प्रिंटेड एक देवी पर्चा भी बरामद किया है, जो 22 जून 2025 को क्रमांक 771 के माध्यम से बुधौरा के रहने वाले ईंट भट्ठा संचालक उमेश को लिखा गया था और इसमें 100000 लेवी मांगी गई थी. पर्चा में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि प्रिय बंधु आप जानते हैं कि भारतीय क्रांति के मौजूदा दौड़ में बड़े-बड़े जोतदार-जमींदार तथा भूस्वामी और भारतीय दलाल पूंजीपति भारतीय जनता का दुश्मन है. यही लोग भारतीय जनता और क्रांति के जानी दुश्मन के रूप में सुनिश्चित हैं. छोटे व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर, राष्ट्रीय पूंजीपति और तमाम प्रगतिशील बुद्धिजीवी, जनवाद पसंद लोग तथा तमाम खटने-कमाने वाले जनता हमारे मित्र वर्ग हैं, क्रांति के मुख्य वाहक हैं. इनकी भागीदारी के बिना क्रांति सफल नहीं हो सकती, उसी तरह भारतीय जनता मुक्त व स्वाधीन भी नहीं हो सकती. इसी संदर्भ में हमारा संगठन आपसे अपील करती है कि आप हमारे मित्र वर्गों की श्रेणी में हैं. आपके सहयोग के बिना हम क्रांति और संगठन की समस्याओं को हल नहीं कर सकते हैं. आप जानते हैं कि भारतवर्ष के घर प्रतिक्रियावादी शोषण-शासक वर्ग के खिलाफ हम युद्ध लड़ रहे हैं. युद्ध और पार्टी संचालन अर्थ के बिना संभव नहीं है. इसलिए भारतीय जनता क्रांति की जिम्मेदारी का एक आशिक हिस्सा आपको अपने कंधे पर उठाना ही होगा. पार्टी आपको निर्देशित करती है कि एक लाख रुपए लेवी के रूप में जमा कर देना अनिवार्य होगा. पार्टी के परमिशन के बिना काम चालू करना अवैध माना जाएगा. बावजूद इसके मित्रतापूर्ण अपील को ठुकराने पर, आनाकानी करने पर अथवा लेट-लतीफ करने पर हमारी मित्रता शत्रुता में बदल सकती है, इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे, पार्टी नहीं. पत्र पाते ही संपर्क करें, इसे अति आवश्यक समझें. नक्सली दयानंद मालाकार के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद न सिर्फ पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है, वरन उत्तर बिहार में नक्सलियों का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हुआ है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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