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रिहायशी इलाके में घुसा बाढ़ का पानी, भोजन-पानी के लिए मचा हाहाकार

Updated at : 25 Aug 2024 9:42 PM (IST)
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रिहायशी इलाके में घुसा बाढ़ का पानी, भोजन-पानी के लिए मचा हाहाकार

गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से बाढ़ का पानी प्रखंड के कई रिहायशी इलाके में फैल गया है. इससे सलेमाबाद दियारा एवं तटीय इलाके के गांवों में दहशत व्याप्त है.

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साहेबपुरकमाल. गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से बाढ़ का पानी प्रखंड के कई रिहायशी इलाके में फैल गया है. इससे सलेमाबाद दियारा एवं तटीय इलाके के गांवों में दहशत व्याप्त है.सलेमाबाद के दो दर्जन से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से लोग घर को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो गये हैं.चारो तरफ बाढ़ के पानी से घिर चुके लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ का पानी संदलपुर पंचायत के ज्ञानटोल , बहलोरिया, रघुनाथपुर बरारी पंचायत के श्रीनगर और हीरा टोल गांव के मोहानी तक पानी फैल गया है. समस्तीपुर एवं संदलपुर पंचायत के दियारा क्षेत्र स्थित सलेमाबाद गांव के वार्ड सदस्य टापू बन गया है गांव के चारों तरफ पानी फैलने से प्रखंड मुख्यालय से संपर्क खत्म हो गया है. ग्रामीणों के अनुसार अगर गंगा नदी के जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो दो से तीन दिन में बाढ़ का पानी बाढ़ से घिरे इलाकों के घरों में पानी प्रवेश कर जायेगा. जिसका भय लोगों को सता रहा है. सलेमाबाद गांव के बाढ़ प्रभावित परिवारों को घर से पलायन के बाद जलावन, खाद्यान्न के अभाव में भूखे रहने की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.लोगों को पीने का पानी की किल्लत हो गयी है. सलेमाबाद गांव के वार्ड सदस्य प्रकाश यादव, राजन कुमार, संदीप कुमार आदि लोगों ने बताया है कि बाढ़ से घिर जाने के कारण गाय, भैंस, बकरी, अनाज, बीमार आदि को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए प्रशासन द्वारा कोई उपाय नहीं किया जा रहा है.जब खतरा बढ़ जाएगा तो लोगों को बचाना मुश्किल हो जायेगा. प्रतिदिन नये घरों में पानी प्रवेश कर रहा है और लोग घर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं.युवा समाज सेवी दिलखुश कुमार ने बताया कि अधिकांश लोग खेती एवं पशुपालन पर ही निर्भर हैं. सनहा पश्चिम, सनहापूर्वी, समस्तीपुर ,संदलपुर फुलमलिक, रघुनाथपुर करारी, रघुनाथपुर बरारी पंचायत क्षेत्र के किसानों के जीविका के लिए खेती एवं पशुपालन पर ही निर्भर रहते हैं. मुख्य खेती दियारा क्षेत्र के हजारों एकड़ भूमि में होती है जो बाढ़ की चपेट में आने से नष्ट हो गया है.इन क्षेत्रों के किसान बड़ी मात्रा में पशुपालन कर दुग्ध उत्पादन करते हैं. और पशुचारा के अभाव में पशु के समक्ष भी भखमरी की नौबत आ गयी है.समस्तीपुर पंचायत का मुखिया संजय यादव का कहना है कि हमारे पंचायत के सलेमाबाद गांव बाढ़ की चपेट में आ गया है और लोग अब गाँव से बाहर निकलना चाहते हैं लेकिन पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं होने की वजह से नाव पर चढ़ने के लिए मारा मारी हो रही है और क्षमता से अधिक लोग नाव पर सवार होकर यात्रा करते हैं. इसलिए कमसे कम 5 नाव की जरूरत है जबकि स्थानीय प्रशासन द्वारा मात्र तीन नाव सलेमाबाद के लिए और एक नाव समस्तीपुर गांव के लोगों को पशुचारा लाने के लिए उपलब्ध कराया गया है. मुखिया ने आवागमन के लिए पर्याप्त सरकारी नाव की व्यवस्था करने, चिकित्सा के लिए चिन्हित स्थल पर चिकित्सा कैंप लगाने और बाढ़ पीड़ितों को भोजन, पानी उपलब्ध कराने का मांग सरकार की है.

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