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दिल्ली बम ब्लास्ट में जिले के कारोबारी की मौत, एंबुलेंस से पहुंचा शव

Updated at : 15 Nov 2025 10:11 PM (IST)
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दिल्ली बम ब्लास्ट में जिले के कारोबारी की मौत, एंबुलेंस से पहुंचा शव

दिल्ली में 10 नवंबर की शाम हुए बम ब्लास्ट में बेगूसराय के भी एक व्यक्ति की मौत हुई है.

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बेगूसराय. दिल्ली में 10 नवंबर की शाम हुए बम ब्लास्ट में बेगूसराय के भी एक व्यक्ति की मौत हुई है. शुक्रवार की रात पोस्टमार्टम के बाद मृतक की लाश दिल्ली से एंबुलेंस द्वारा बेगूसराय पहुंच गयी है. मृतक की पहचान बेगूसराय के पोखरिया मोहल्ला में रहने वाले हलीम के पुत्र मोहम्मद लुकमान (60 वर्ष) के रूप में की गई है. मोहम्मद लुकमान का घर मूल रूप से खगड़िया जिला में पड़ता है, लेकिन यहां वे लंबे समय से किराए के मकान में पोखरिया में रहते थे और कचहरी रोड में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान चलाते थे. ज्वेलरी लाने के लिए ही दिल्ली गए थे, जहां बम ब्लास्ट के शिकार हो गए. मृतक के छोटे पुत्र मोहम्मद इमरान ने बताया कि पिताजी 7 नवंबर शुक्रवार को महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली गए थे. हम उन्हें ट्रेन पर बैठा दिए थे और आठ दिसंबर की रात में वह दिल्ली पहुंच गए थे. 10 दिसंबर को यह घटना हुआ, शाम में पापा को फोन किए तो स्वीच ऑफ बता रहा था. फिर हम लोग कुछ सोचे नहीं, 11 नवंबर की सुबह भी फोन किया था तो स्वीच ऑफ था. 11 नवंबर को दोपहर में फोन आया कि आपका जो आदमी है, वह हादसे में जख्मी हो गया. हम लोगों ने पता लगाना शुरू किया तो कुछ पता नहीं चल रहा था. 12 नवंबर को पता चला कि लोकनायक अस्पताल में हैं. मेरे भाई और रिश्तेदार पहुंचे तो वहां उनकी बॉडी रखी हुई थी. जहां से कागजी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद प्रशासन द्वारा बॉडी भेजा जा रहा है. सरकार ने सभी कागज तैयार करवाया है. पिताजी आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम करते थे और वही सामान लाने गए थे. तीन-चार जगह सदर बाजार, लाल किला, जामा मस्जिद, चांदनी चौक के पास से सामान खरीदते थे. जामा मस्जिद के पास जहां वह रुकते थे, वहां पर सदर से बाजार से माल लाकर रख थे. वहां उन्होंने कहा था कि चांदनी चौक से जलेबी खाकर आ रहे हैं और चांदनी चौक पर गए थे कि बम विस्फोट हो गया. फोन मेरे नंबर पर हीं आया था, मेरे भैया दिल्ली में रहते हैं, उनको फोन किया फिर थाना में जाकर पता लगाए तब अस्पताल में रहने की जानकारी मिली. कल शुक्रवार को शाम 7:00 बजे बॉडी चला है. हम चार भाई एक बहन हैं, पापा आर्टिफिशियल ज्वेलरी का कारोबार करते थे और उन्हीं के सहारे हमारा परिवार चलता था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANISH KUMAR

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