फेसबुक पर बाइक को नया बनाने का सपना पड़ा भारी, 20 हजार देकर 20 हजार देकर फंसा बेगूसराय का युवक, बिहार से राजस्थान-मध्यप्रदेश तक जुड़ा मामला
बरामद बाइक के साथ माला पहने पीड़ित अमित एवं भोपाल पुलिस
फेसबुक पर बाइक को नया बनाने का झांसा देकर युवक से 20 हजार की ठगी हुई. भोपाल पुलिस ने कार्रवाई कर बाइक बरामद की और आरोपी को गिरफ्तार किया.
Social Media Scam : बेगूसराय : सोशल मीडिया पर चमचमाती पुरानी बाइकों को नया रूप देने का वीडियो देखकर एक युवक को ऐसा भरोसा हुआ कि उसने अपनी बाइक के साथ 20 हजार रुपये भी भोपाल भेज दिए.वादा था,सिर्फ 12 दिन में बाइक का कायाकल्प कर वापस कर देंगे. लेकिन 12 दिन देखते-देखते 12 महीने में बदल गए. बाइक तो वापस नहीं मिली,उल्टे उसे छुड़ाने के लिए 18 से 20 हजार रुपये और मांगे जाने लगे.आखिरकार परेशान युवक ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बाइक बरामद कर ली और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.
मामला बेगूसराय निवासी अमित कुमार से जुड़ा है,जो फिलहाल राजस्थान के जयपुर में रहते हैं. अमित ने फेसबुक पर बाइक रेस्टोरेशन का वीडियो देखा था. वीडियो में पुरानी बाइक को बेहद आकर्षक अंदाज में नया जैसा बनाकर दिखाया गया था. वीडियो देखकर अमित ने भोपाल में रेस्टोरेशन का काम करने वाले समीर खान से संपर्क किया.
बातचीत के बाद अमित ने अपनी बाइक और करीब 20 हजार रुपये ट्रेन के माध्यम से भोपाल भेज दिए.बताया गया कि बाइक को महज 12 दिन में तैयार कर वापस कर दिया जाएगा. अमित ने भरोसा किया,लेकिन 12 दिन बाद भी बाइक नहीं आई.इसके बाद शुरू हुआ तारीख पर तारीख का सिलसिला.
राजस्थान से भोपाल तक लगाते रहे चक्कर
बाइक वापस लेने के लिए अमित कई बार राजस्थान से भोपाल पहुंचे.हर बार उन्हें जल्द बाइक देने का भरोसा मिला,लेकिन नतीजा वही रहा,बाइक नहीं मिली और अमित को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा.धीरे-धीरे मामला इतना लंबा खिंच गया कि 12 दिन की जगह करीब 12 महीने बीतने को आ गए.अमित के मुताबिक, बाइक वापस करने के नाम पर उनसे करीब 18 से 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने की मांग भी की जाने लगी. एक तरफ हजारों रुपये पहले ही खर्च हो चुके थे और दूसरी तरफ उनकी बाइक भी उनके पास नहीं थी. आखिरकार परेशान अमित ने भोपाल पुलिस से मदद की गुहार लगाई.
डीएसपी को मिला मैसेज,थाना प्रभारी को मिला एक्शन का निर्देश
मामले की जानकारी मिलने के बाद अमित ने भोपाल के डीएसपी संतोष पटेल से संपर्क किया.डीएसपी संतोष पटेल ने मामला पहले जुडिक्शन क्षेत्र में नहीं आने के कारण बात को टालते गए.लेकिन पीड़ित अमित के बारंबार फोन कॉल और मैसेज के कारण डीएसपी का इस मामले में रूचि बढ़ने लग गई.मामले को गंभीरता से लेते हुए हनुमानगंज थाना प्रभारी अवधेश भदौरिया से कार्रवाई करने को कहा.इसके बाद थाना प्रभारी अवधेश भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने संबंधित ठिकाने पर छापेमारी की.पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमित की बाइक बरामद कर ली और उसे वापस सौंप दिया.मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी अमीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया.इस पूरी कार्रवाई की जानकारी डीएसपी संतोष पटेल ने अपने फेसबुक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की है.
दूसरे राज्य के हैं तो क्या हुआ
डीएसपी संतोष पटेल ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति भले ही किसी दूसरे राज्य का रहने वाला हो,लेकिन यदि वह अपनी वास्तविक परेशानी लेकर पुलिस के पास पहुंचता है तो पुलिस उसकी मदद के लिए पूरी तरह तत्पर रहती है.उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी व्यक्ति या सेवा पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए. किसी को अपनी कीमती बाइक या बड़ी रकम सौंपने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करनी चाहिए.यदि किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी या अन्याय होता है तो उसे बिना संकोच पुलिस के पास पहुंचकर अपनी समस्या बताएं.
बाइक मिली तो चेहरे पर लौटी मुस्कान
करीब एक साल तक बाइक के लिए परेशान रहने वाले अमित को जब उनकी बाइक वापस मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.राजस्थान लौटते समय भोपाल पुलिस ने भी अमित को खास अंदाज में विदाई दी.डीएसपी संतोष पटेल और संबंधित क्षेत्र के एसीपी राकेश बघेल ने अमित को माला पहनाकर राजस्थान के लिए विदा किया.पुलिस के इस मानवीय व्यवहार ने अमित को भावुक कर दिया.इस दौरान पुलिस और आम जनता के बीच भरोसे के रिश्ते को और मजबूत करने का संदेश दिया गया.
बिहार से राजस्थान-मध्यप्रदेश तक जुड़ी भरोसे की कहानी
फेसबुक के एक वीडियो से शुरू हुई यह कहानी आखिरकार पुलिस की कार्रवाई के बाद राहत पर खत्म हुई.बिहार के बेगूसराय के रहने वाले अमित राजस्थान के जयपुर में रहने वाले पीड़ित और मध्यप्रदेश के भोपाल की पुलिस तीन राज्यों से जुड़ा यह मामला पुलिस-पब्लिक के भरोसे की अनोखी मिसाल बन गया. करीब एक साल तक बाइक के लिए दर-दर भटकने के बाद अमित को आखिरकार उनकी बाइक वापस मिल गई.भोपाल पुलिस की कार्रवाई ने न सिर्फ पीड़ित को राहत दी,बल्कि यह संदेश भी दिया कि मुसीबत में फंसे इंसान की मदद के लिए राज्य की सीमा पुलिस के रास्ते में दीवार नहीं बनती.
सोशल मीडिया पर भरोसा करने से पहले सावधान
यह मामला सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक वीडियो और ऑनलाइन दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने वालों के लिए भी सबक है.चमकदार वीडियो देखकर किसी व्यक्ति को अपनी कीमती बाइक या बड़ी रकम सौंपने से पहले उसके काम,पते,पहचान और पूर्व ग्राहकों के अनुभव की जांच करना जरूरी है.फेसबुक के एक वीडियो से शुरू हुई कहानी में बेगूसराय के अमित ने करीब एक साल तक अपनी बाइक के लिए चक्कर काटे.आखिरकार भोपाल पुलिस की कार्रवाई ने उनकी बाइक तो वापस दिलाई ही,साथ ही पुलिस-पब्लिक के बीच भरोसे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई,जिसकी चर्चा अब बिहार से राजस्थान तक हो रही है.
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