बेगूसराय के सुजा गांव का दुर्लभ निर्मली वृक्ष बना आकर्षण का केंद्र, संरक्षण की उठी मांग

निर्मली वृक्ष की तस्वीर
Begusarai News : बेगूसराय जिले के सुजा गांव में स्थित वर्षों पुराना निर्मली वृक्ष इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह वृक्ष अपनी विशालकाय संरचना, धार्मिक आस्था और औषधीय गुणों के कारण चर्चा में है. ग्रामीणों ने इसे प्राकृतिक धरोहर घोषित कर संरक्षण की मांग की है.
Begusarai News : जिले के सुजा गांव में स्थित कई वर्ष पुराना बताया जाने वाला निर्मली का विशाल वृक्ष इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. अपनी विशालकाय बनावट, घनी हरियाली और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह वृक्ष न केवल ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर के रूप में भी देखा जा रहा है. हालांकि इसकी आयु को लेकर स्थानीय स्तर पर कई दावे किए जाते हैं,लेकिन इसकी वैज्ञानिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
चबूतरे के साथ संरक्षित निर्मली वृक्ष, ग्रामीणों की आस्था से जुड़ी पहचान
बरसात के मौसम में यह वृक्ष अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण और भी मनमोहक दिखाई देता है.इसके चारों ओर बना चबूतरा इस बात का प्रमाण है कि वर्षों से ग्रामीण इसकी देखभाल करते आ रहे हैं और इसे श्रद्धा के साथ पूजते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वृक्ष कई पीढ़ियों का साक्षी रहा है और गांव की पहचान बन चुका है.इसे देखने के लिए बेगूसराय ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग पहुंच रहे हैं. निर्मली का वैज्ञानिक नाम है, जिसे शुद्धिकरण का बीज भी कहा जाता है.
पुराने समय में पानी साफ करने के लिए उपयोग होता था निर्मली का बीज
पारंपरिक भारतीय जीवन में इसके बीजों का विशेष महत्व रहा है.पुराने समय में लोग निर्मली के बीज को पानी से भरे बर्तन की भीतरी सतह पर रगड़ते थे. बीज में मौजूद प्राकृतिक तत्व पानी में मौजूद मिट्टी एवं अन्य अशुद्ध कणों को नीचे बैठा देते थे, जिससे पानी काफी हद तक साफ हो जाता था. इसी कारण इसे प्राकृतिक जल शुद्धिकरण के लिए उपयोगी वृक्ष माना जाता है. आयुर्वेद में निर्मली के बीज, छाल, पत्ते और अन्य भागों का उपयोग विभिन्न औषधीय तैयारियों में किया जाता रहा है.
मधुमेह से लेकर आंखों की बीमारी तक में उपयोगी माना जाता है निर्मली
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका उल्लेख मधुमेह,दस्त,मूत्र संबंधी समस्याओं तथा आंखों के कुछ रोगों के उपचार में मिलता है. कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल और सूजनरोधी गुणों का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दावों की व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है. इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
प्रशासन और वन विभाग से निर्मली वृक्ष के संरक्षण की मांग
इधर पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस दुर्लभ वृक्ष का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर इसे संरक्षित किया जाए तो यह बेगूसराय की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ पर्यटन और पर्यावरण शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है. लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से इस वृक्ष को प्राकृतिक धरोहर घोषित कर इसके संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की मांग की है.
सुजा गांव में निर्मली वृक्ष संरक्षण को लेकर जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन
इस अवसर पर सुजा पंचायत की मुखिया किरण देवी,भाजपा नेता मंटुन मिश्रा, अजय शाह,जदयू प्रखंड अध्यक्ष अवध शर्मा, सीताराम मेहता तथा पूर्व पंचायत समिति सदस्य सुरेश तांती सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक वृक्ष के संरक्षण पर जोर दिया.
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