बीहट. सिमरिया घाट में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व पूरी भक्ति व श्रद्धा के साथ मनाया गया. सुबह 4 बजे से ही विभिन्न स्नान घाटों पर गंगा मैय्या की जयकारे के साथ श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया. 25 हजार श्रद्धालु स्नान के बाद दान, ध्यान और पूजा-पाठ कर घाट किनारे सभी देवी-देवताओं का दर्शन कर परिवार के सुख, शांति की मंगलकामना की. सिमरियाधाम सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज कहते हैं कि पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी.इस दिन किया गया जप, तप,ज्ञान,स्नान,दान,होम आदि अक्षय रहते हैं.इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है.ज्योतिषियों ने इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा है.इस दिन भगवानपरशुराम का जन्म हुआ था.इसलिए इसे परशुराम तीज भी कहते हैं.इसी दिन भगवान विष्णु ने नर और नारायण के रूप में अवतार लिया था.स्थानीय पंडा-पुरोहितों की मानें तो अक्षय तृतीया के मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.घाट पर मूलभूत सुविधाओं का टोटा दिखा,बावजूद लोगों ने गंगा स्नान जारी रखा.वहीं वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण जाम का भी असर आवागमन पर पड़ा.खास करके राजेन्द्र पुल आनेजाने में लोगों को काफी असुविधा हुई.
पितरों की तृप्ति का पर्व
अक्षय तृतीया पर तिल सहित कुश के जल से पितरों को जलदान करने से उनकी अनंत काल तक तृप्ति होती है.इस तिथि से ही गौरी व्रत की शुरुआत होती है.इसे करने से अखंड सौभाग्य और समृद्धि मिलती है.अक्षय तृतीया पर गंगास्नान का भी बड़ा महत्व है. इस दिन गंगा स्नान करने या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं.अन्न-जल दान का महत्व
इस शुभ पर्व पर तीर्थ में स्नान करने की परंपरा है. ग्रंथों में कहा गया है कि अक्षय तृतीया पर किया गया तीर्थ स्नान जाने-अनजाने में हुए हर पाप को खत्म कर देता है.इससे हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं.इसे दिव्य स्नान भी कहा गया है.तीर्थ स्नान न कर सकें तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर नहा सकते हैं.ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है.इसके बाद अन्न और जलदान का संकल्प लेकर जरुरतमंद को दान दें.ऐसा करने से कई यज्ञ और कठिन तपस्या करने जितना पुण्य फल मिलता है.इन चीजों के दान से मिलता है अक्षय पुण्य
अक्षय तृतीया पर घड़ी, कलश, पंखा, छाता, चावल, दाल, घी, चीनी, फल, वस्त्र, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा और दक्षिणा सहित धर्मस्थान या ब्राह्मणों को दान करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है.अबूझ मुहूर्त होने के कारण नया घर बनाने की शुरुआत, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कामों के लिए भी ये दिन खास माना जाता है.अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने की है परंपरा
अक्षय तृतीया के दिन सोना, चांदी आदि चीजों को खरीदने की परंपरा है.कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन धातुओं के लाने के साथ माता लक्ष्मी भी इसके साथ आती हैं और वह वस्तु कभी समाप्त नहीं होती है.अर्थात अक्षय तृतीया के दिन प्राप्त की गई संपत्ति, धन दौलत और पुण्य फल का कभी क्षय नहीं होता.इसके अलावा इस दिन चार धाम यात्रा का शुभारंभ होता है. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी खोले जाते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं. संगम स्नान से शरीर और आत्मा दोनों पवित्र होते हैं. विवाह,निवेश,दान या धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्य जीवन को सकारात्मक दिशा देते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

