अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो रहे कल्पवासी
Updated at : 15 Nov 2019 8:12 AM (IST)
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बीहट : 13 अक्तूबर से शुरू कल्पवास में आये साधु-संत,महात्मा तथा कल्पवासी कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान करने लगे हैं. इसी के साथ सिमरियाधाम में प्रवचन,आरती और शंखों की गूंज के स्वर मद्धिम पड़ने लगे हैं. कल्पवासी अपने दिलों में कल्पवास के दौरान हुए खट्टे-मीठे संस्मरण दिल में संजोयें पुन: […]
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बीहट : 13 अक्तूबर से शुरू कल्पवास में आये साधु-संत,महात्मा तथा कल्पवासी कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान करने लगे हैं. इसी के साथ सिमरियाधाम में प्रवचन,आरती और शंखों की गूंज के स्वर मद्धिम पड़ने लगे हैं. कल्पवासी अपने दिलों में कल्पवास के दौरान हुए खट्टे-मीठे संस्मरण दिल में संजोयें पुन: अगले साल आने के लिए मां गंगा से क्षमायाचना सहित अनुमति लेकर विदा लेने लगे हैं.
खख्खड़ बाबा खालसा के महंत श्री विष्णुदेवाचार्य, राम निहोरा खालसा के बौआ हनुमान समेत अन्य संत-महात्माओं ने बताया कि यहां दो प्रकार का विधान प्रचिलत है. कुछ लोग पूर्णिमा से पूर्णिमा तक कल्पवास परंपरा का निर्वहण करते हैं, वे सभी कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के बाद घर लौट रहे हैं. वहीं कुछ लोगा 17 नवम्बर को संक्रांति स्नान के बाद घर लौटेंगे.
दरभंगा की उमा दासी, गीता देवी, अवध किशोर ठाकुर, जयनारायण दास, रामरित देवी ने कहा कि एक माह तक चलने वाले कल्पवास मेले में गंगा तट पर रह कर कल्पवास करने से सुख तथा आनंद की अनुभूति प्राप्त हुई. वहीं सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा कि यहां हर साल सिमरियाधाम में कल्पवास मेला की शुरुआत विधिवत वैदिक विधि से ध्वजारोहण होता है. कल्पांत में सारे देवी-देवताओं का विसर्जन तथा ध्वजा विसर्जन के साथ 17 नवंबर को किया जायेगा.
संगोष्ठी के दूसरे दिन जारी रहा वर्तमान परिवेश में वेद का महत्व पर परिचर्चा:आदिकुंभ स्थली सिमरिया धाम कार्तिक कल्पवास के पावन पर सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन भी वर्तमान परिवेश में वेद का महत्व विषय पर विशद चर्चा-परिचर्चा जारी रहा.
सर्वमंगला अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सान्निध्य में मुख्य अतिथि डॉ हितलाल पाठक,रामकिंकर सिंह,अशोक पाठक, मुन्ना सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके पूर्व सर्वमंगला के व्यवस्थापक रवींद्र ब्रह्मचारी ने अतिथियों को माला, पाग व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.
इसके बाद संगोष्ठी विषयक चर्चा में भाग लेते हुए मुख्य अतिथि डॉ पाठक ने कहा कि वेद विश्व पुस्तकालय का प्रथम ग्रंथ एवं वैश्विक वांग्मय का अनंत ज्ञानकोष है. वेद परम विभू परमात्मा द्वारा सृष्टि के लिए दिया गया अनुपम उपहार है तो प्रकृति पावन शृंगार और मानवता के लिए परिष्कृत संस्कार है.
वैदिक मंत्र निरंतर जीवन की व्याख्या में विद्यमान रहनेवाला एक नैसर्गिक कोष है. वैदिक ऋचाएं कोई ठहरा हुआ ज्ञान नहीं है अपितु जीवन में निरंतरता और अखंडता का अनुभव प्रदान कराने वाली ज्ञान यात्रा है.रामकिंकर सिंह ने कहा कि ज्ञानवर्द्धक वेद शब्द की व्याख्या विद्यातु से उत्पन्न होता है.वेद शब्द बहुव्यापक अर्थ का प्रतिपादक है.
अंतरराष्ट्रीय मैथिली-मिथिला विकास परिषद के महामंत्री अशोक पाठक ने कहा कि वेद के अंतर्गत तिहास,पुराण,व्याकरण,गणित,उत्पत्ति विज्ञान, तर्कशास्त्र, देव विद्या, ज्योतिष विद्या जैसे तमाम ज्ञान वर्णित हैं.कार्यक्र म के पूर्व स्वस्ति वाचन आचार्य नारायण झा, मंगलाचरण रंजना देवी द्वारा प्रस्तुत किया गया. मंच संचालन डॉ घनश्याम झा ने किया.
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