बेगूसराय : शहर को सुंदर व स्मार्ट बनाने का दावा करने वाली नगर निगम व जिला प्रशासन की उदासीनता की वजह से पूरा शहर अतिक्रमण व जाम का दंश झेलने को विवश है. वर्ष में एकाध बार अतिक्रमण हटाने व जाम से निबटने की खानापूर्ति तो जरूर होती है परंतु नतीजा वही ढाक के तीन पात वाली चरितार्थ होती है. आज तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं होने से लोगों की परेशानियां दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.
प्रतिदिन सड़क से गुजरते हैं आला अधिकारी,फिर भी नहीं जा रहा ध्यान : शहर के ट्रैफिक चौक से समाहरणालय तक जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की गाड़ी रोज गुजरती है. नगर निगम महापौर और नगर आयुक्त की भी गाड़ियां इसी मार्ग से गुजर कर नगर निगम कार्यालय तक पहुंचती है.
परंतु सड़क के दोनों तरफ तीन चौथाई सड़कों पर फुटकर दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजा रखी है. इनकी भी मजबूरी है. इनके लिए आज तक स्थायी जगहों का चयन नहीं किया जा सका है, जिससे समस्याएं विकराल होती जा रही है.
जाम से जल्दी निकलने की जल्दबाजी में होती है दुर्घटनाएं :घंटों जाम की त्रासदी शहर के लिए आम बात हो गयी है. मोटरसाइकिल चालक दाएं-बाएं से निकलने के चक्कर में आये दिन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं.
मंगलवार को ऐसी ही सड़क दुर्घटना लाखो में हुई जिसमें एक युवक हॉस्पिटल पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ दिया. ट्रैफिक चौक से जेल गेट तक सड़क के दोनों तरफ फ्लैंक भी नहीं हैं. ऊपर से सड़क के दोनों तरफ फुटकर दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है.
शहर को स्वच्छ बनाये रखना सभी की जिम्मेदारी :प्रभात खबर फुटकर दुकानदारों से अपील करती है कि ये शहर आपका है.
इसे सुंदर और स्वच्छ बनाये रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है. नगर निगम और जिला प्रशासन को इसे सुंदर और स्वच्छ बनाये रखने में अपना सहयोग दें. साथ ही सड़क पर वाहन चलाते वक्त ओवरटेक न करें अपनी लेन में चलें.
40 मिनट में पहुंचते हैं एक किलोमीटर
जाम में फंसते आमलोग, सायरन बजाते एंबुलेंस, स्कूली बच्चों को एक किलोमीटर की दूरी तय करने में तकरीबन चालीस मिनट लग जाता है.शहर के ह्वदय रोग विशेषज्ञ डॉ रंजन चौधरी बताते हैं कि स्कूल टाइम से चालीस मिनट पहले भी बच्चों को लेकर निकलता हूं तो जाम की वजह से स्कूल गेट पहुंचते-पहुंचते गेट बंद होने की गारंटी मिलती है.
विद्यालय का अनुशासन ऐसा की यदि एक मिनट लेट पहुंचे तो बच्चों को इंट्री नहीं मिलती है. इसके लिए किसे जिम्मेदार समझूं स्कूल गेट से लौटते बच्चों के मन मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता होगा.
रोजी -रोटी की दुहाई देते हैं दुकानदार
सड़क का अतिक्रमण कर दुकान सजाये दुकानदारों से जब नैतिकता की बात की जाती है तो वो रोजी-रोटी और गरीबी का रोना रोते हैं. वो कहते हैं कि हमें भी कोई शौक नहीं सड़कों पर दुकान लगाने का. अपना और अपने बच्चों का पेट पालने को लेकर जान को जोखिम में डाल सड़कों पर दुकान लगाते हैं.
हमारी रोजी-रोटी के लिए नगर निगम यदि स्थायी समाधान ढूंढे और उचित जगह दे .जब दुकानदार को सड़क पर दुकान नहीं लगाने की सलाह दी गयी तो उसने अपने ठेठ अंदाज में कहा कि डीएम, एसपी और उपेंद्र बाबू रोज ई दनी जाय छथिन उनखा कोई दिक्कतें न छय ते तोरा की दिक्कत छौ.
बोले पदाधिकारी
शहर में अतिक्रमण व जाम से निजात दिलाने के लिए पूर्व में भी अभियान चलाया गया था. पुन: जल्द ही शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर हुए अतिक्रमण मुक्त करने का कार्य किया जायेगा.
संजीव कुमार चौधरी ,सदर अनुमंडल पदाधिकारी,बेगूसराय
