बाराहाट और पंजवारा पशु चिकित्सालय में डॉक्टर नदारद, पशुपालकों में भारी आक्रोश

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प्रभार का आदेश पत्र एवं अस्पताल का मुख्य गेट बंद और गेट को खोलने कर्मचारी | Prabhat Khabar Network

प्रभार का आदेश पत्र एवं अस्पताल का मुख्य गेट बंद और गेट को खोलने कर्मचारी | Prabhat Khabar Network

बाराहाट और पंजवारा पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही से पशुपालक परेशान हैं। अस्पताल में ताले लटके होने से मवेशियों का इलाज भगवान भरोसे है।

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बाराहाट (बांका). प्रखंड क्षेत्र के बाराहाट और पंजवारा पशु चिकित्सालय में इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्था और चिकित्सकों की लापरवाही का दंश झेल रहा है. हालात ऐसे हैं कि दोनों अस्पतालों के मुख्य गेट पर अधिकांश समय ताला लटका रहता है, और डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं. नतीजतन दर्जनों गांवों के पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. ग्रामीणों और पशुपालकों का आरोप है कि पंजवारा पशु चिकित्सालय में पूर्व पदस्थापित डॉ. विनय भारती का तबादला हो चुका है. उनकी जगह विभाग ने डॉ. निशा भारती की प्रतिनियुक्ति की गई है. विभागीय आदेश के अनुसार उन्हें 10 जुलाई को ही अस्पताल का कार्यभार संभाल लेना था, लेकिन तबादले के आठ दिन बाद भी उन्होंने अस्पताल में योगदान नहीं दिया. जिसके कारण अस्पताल पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है.

ग्रामीणों का आरोप अस्पताल खुलने का कोई निर्धारित समय नहीं


ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल खुलने का कोई निर्धारित समय नहीं है. यदि कभी अस्पताल का गेट खुला भी मिल जाए तो वहां डॉक्टर की कुर्सी खाली मिलती है. मरीजों को केवल निराशा ही हाथ लगती है. कमोबेश यही स्थिति बाराहाट पशु चिकित्सालय की भी है. यहां तबादले के बाद मुकेश कुमार को प्रभारी चिकित्सक बनाया गया है, लेकिन उनके कार्यभार संभालने के बाद से अस्पताल में नियमित रूप से ताला लटका रहता है. अस्पताल की पूरी व्यवस्था एक चपरासी के भरोसे छोड़ दी गई है, जिसे न तो पशुओं के इलाज की तकनीकी जानकारी है और न ही वह किसी गंभीर मामलों में कोई सहायता कर सकता है.


पशुपालकों में है आक्रोश

पशुपालकों का कहना है कि क्षेत्र में गाय, भैंस, बकरी सहित अन्य मवेशी लगातार बीमार पड़ते हैं. आपातकालीन स्थिति में जब वे अस्पताल पहुंचते हैं तो डॉक्टर का कहीं अता-पता नहीं रहता. जिसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश का माहौल है. समय पर इलाज नहीं मिलने से यहां कई बार मवेशियों की जान तक चली जा रही है.

अस्पताल मे नहीं है कोई दवा

चिकित्सक के नहीं रहे की स्थिति में यहां कोई दवा भी उपलब्ध नहीं है.पशुपालकों को मजबूरी में निजी मेडिकल दुकानों से झोलाछाप चिकित्सक की राय पर मेडिकल स्मटोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. पशुपालकों ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से दोनों अस्पतालों की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने, चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों में दवा और उपचार की समुचित व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.


कहते हैं डॉक्टर


डॉक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपना प्रभार अस्पताल में तैनात डॉक्टर बबलू को सौंप दिया है ,लेकिन प्रभार के लिए चिकित्सक भी शनिवार को उपस्थित नहीं थे और ना ही उनसे कोई संपर्क हो पा रहा था.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला पशुपालन पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि विभागीय आदेशानुसार चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है डॉ. निशा भारती एवं मुकेश कुमार शीघ्र ही अस्पताल में अपना योगदान देकर नियमित रूप से अपनी सेवाएं शुरू करेंगी.पशुपालकों को समस्या नहीं होगी.

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अजय कुमार झा

लेखक के बारे में

By अजय कुमार झा

अजय कुमार झा प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बाराहाट (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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