ePaper

बौंसी मेला सह मंदार महोत्सव ने देखा है बैलगाड़ी से लेकर स्कॉर्पियो तक का सफर

Updated at : 14 Jan 2026 9:39 PM (IST)
विज्ञापन
बौंसी मेला सह मंदार महोत्सव ने देखा है बैलगाड़ी से लेकर स्कॉर्पियो तक का सफर

पौराणिक मंदार की तलहटी में आयोजित होने वाला वर्तमान समय का मंदार महोत्सव वर्षों से अपने ख्याति के अनुरूप सर्व धर्म संप्रदाय के लिए मनोरंजन के साथ व्यवसाय का एक मजबूत केंद्र रहा है.

विज्ञापन

अजय कुमार झा, बाराहाट. पौराणिक मंदार की तलहटी में आयोजित होने वाला वर्तमान समय का मंदार महोत्सव वर्षों से अपने ख्याति के अनुरूप सर्व धर्म संप्रदाय के लिए मनोरंजन के साथ व्यवसाय का एक मजबूत केंद्र रहा है. वर्तमान मंदार महोत्सव मात्र पांच दिन में सिमट कर रह गया है. वर्षों पूर्व बौंसी मेले के नाम से चर्चित यह मेला एक माह तक अनवरत आयोजित होता था. इसमें बिहार के बांका जिले ही नहीं करीब एक दर्जन से अधिक जिले के साथ-साथ झारखंड, ओडिसा व बंगाल के लोग मनोरंजन के साथ व्यापार के लिए भी पहुंचते थे, जो यहां रुक कर अपने व्यवसाय के माध्यम से जीविका चलाते थे. खासकर सफा धर्म के साथ सनातन धर्म व जैन धर्म के अनुयायी अपने-अपने इष्ट देव को पूजने के लिए पहुंचते हैं. इस मेले ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. मेले की भव्यता और इसके प्रचार-प्रसार के लिए जहां जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत पिछले कुछ वर्षों से झोक रखी है. वहीं राज्य सरकार ने भी इस मेले को बृहद आयोजन करने के लिए इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया हुआ है. इससे इस मेले की चमक और बढ़ गयी है. हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर इस बार तीन दिवसीय बौंसी मेला को पांच दिवसीय कर दिया है ताकि मेला की रौनक बढ़े, स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर मिले. एक समय था जब आस पड़ोस के लोग दिन का उजला होने के पूर्व ही अपने-अपने बैलगाड़ी पर खाने पीने के सामानों को लेकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ पड़ोस के भी सहयोगियों को लेकर मेला में शामिल होने के लिए पहुंचते थे, लेकिन धीरे-धीरे समय ने करवट बदली लोगों के पास में मनोरंजन के नए-नए तरीके उपलब्ध हो गये. इससे इस मेले का स्वरूप घटता चला गया. अब बैलगाड़ी की जगह लोगों के बीच नई-नई चमचमाती महंगी गाड़ियां आ गयी है और अब इन्हीं के माध्यम से लोग अपने सगे संबंधियों के साथ मेले में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन मेले से अब रौनक गायब हो गयी है. कुछ वर्ष पूर्व मेले की भव्यता के लिए जहां सर्कस, नौटंकी, थिएटर आदि को मेले में शामिल किया जाता था. वहीं अब जिला प्रशासन इन सभी के लिए सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इसे मेला में शामिल होने को लेकर पाबंदी लगा दी है. इससे आमजनों में भी मेला को लेकर आकर्षण घट सा गया है. जिसकी एक बानगी बुधवार को भी मंच से कई जनप्रतिनिधियों के संबोधन के दौरान भी दिखी. जब कई जनप्रतिनिधियों ने भी इन मनोरंजन के साधनों को आयोजित मेला में शामिल करने का अनुरोध जिला प्रशासन से किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SHUBHASH BAIDYA

लेखक के बारे में

By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन