बौंसी मेला सह मंदार महोत्सव ने देखा है बैलगाड़ी से लेकर स्कॉर्पियो तक का सफर

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बौंसी मेला सह मंदार महोत्सव ने देखा है बैलगाड़ी से लेकर स्कॉर्पियो तक का सफर

पौराणिक मंदार की तलहटी में आयोजित होने वाला वर्तमान समय का मंदार महोत्सव वर्षों से अपने ख्याति के अनुरूप सर्व धर्म संप्रदाय के लिए मनोरंजन के साथ व्यवसाय का एक मजबूत केंद्र रहा है.

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अजय कुमार झा, बाराहाट. पौराणिक मंदार की तलहटी में आयोजित होने वाला वर्तमान समय का मंदार महोत्सव वर्षों से अपने ख्याति के अनुरूप सर्व धर्म संप्रदाय के लिए मनोरंजन के साथ व्यवसाय का एक मजबूत केंद्र रहा है. वर्तमान मंदार महोत्सव मात्र पांच दिन में सिमट कर रह गया है. वर्षों पूर्व बौंसी मेले के नाम से चर्चित यह मेला एक माह तक अनवरत आयोजित होता था. इसमें बिहार के बांका जिले ही नहीं करीब एक दर्जन से अधिक जिले के साथ-साथ झारखंड, ओडिसा व बंगाल के लोग मनोरंजन के साथ व्यापार के लिए भी पहुंचते थे, जो यहां रुक कर अपने व्यवसाय के माध्यम से जीविका चलाते थे. खासकर सफा धर्म के साथ सनातन धर्म व जैन धर्म के अनुयायी अपने-अपने इष्ट देव को पूजने के लिए पहुंचते हैं. इस मेले ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. मेले की भव्यता और इसके प्रचार-प्रसार के लिए जहां जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत पिछले कुछ वर्षों से झोक रखी है. वहीं राज्य सरकार ने भी इस मेले को बृहद आयोजन करने के लिए इसे राजकीय मेले का दर्जा दिया हुआ है. इससे इस मेले की चमक और बढ़ गयी है. हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर इस बार तीन दिवसीय बौंसी मेला को पांच दिवसीय कर दिया है ताकि मेला की रौनक बढ़े, स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर मिले. एक समय था जब आस पड़ोस के लोग दिन का उजला होने के पूर्व ही अपने-अपने बैलगाड़ी पर खाने पीने के सामानों को लेकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ पड़ोस के भी सहयोगियों को लेकर मेला में शामिल होने के लिए पहुंचते थे, लेकिन धीरे-धीरे समय ने करवट बदली लोगों के पास में मनोरंजन के नए-नए तरीके उपलब्ध हो गये. इससे इस मेले का स्वरूप घटता चला गया. अब बैलगाड़ी की जगह लोगों के बीच नई-नई चमचमाती महंगी गाड़ियां आ गयी है और अब इन्हीं के माध्यम से लोग अपने सगे संबंधियों के साथ मेले में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन मेले से अब रौनक गायब हो गयी है. कुछ वर्ष पूर्व मेले की भव्यता के लिए जहां सर्कस, नौटंकी, थिएटर आदि को मेले में शामिल किया जाता था. वहीं अब जिला प्रशासन इन सभी के लिए सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इसे मेला में शामिल होने को लेकर पाबंदी लगा दी है. इससे आमजनों में भी मेला को लेकर आकर्षण घट सा गया है. जिसकी एक बानगी बुधवार को भी मंच से कई जनप्रतिनिधियों के संबोधन के दौरान भी दिखी. जब कई जनप्रतिनिधियों ने भी इन मनोरंजन के साधनों को आयोजित मेला में शामिल करने का अनुरोध जिला प्रशासन से किया.

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सुभाष वैद्य

लेखक के बारे में

By सुभाष वैद्य

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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