रोहणी ने धरती को भीगोया, खेतों की नमी देख लहलहा उठा किसानों का मन, बंपर पैदावार की उम्मीद

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 28 May 2026 2:38 PM

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Banka News : बांका जिले में रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश के साथ ही खेत-खलिहानों में एक बार फिर रौनक लौट आई है. किसानों ने धान और मक्का की खेती की तैयारी तेज कर दी है. ग्रामीण इलाकों में अन्नदाताओं के चेहरों पर अच्छी बारिश और बेहतर पैदावार की उम्मीद साफ दिखाई दे रही है.

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पंजवारा (बांका) से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News :

भारतीय कृषि परंपरा में खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश सोमवार से हो चुका है. इसके साथ ही बांका जिले के पंजवारा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं. चिलचिलाती गर्मी और उमस के बीच किसानों में नई उम्मीद जागी है.

खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है रोहिणी काल

कृषि जानकारों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का समय धान की नर्सरी तैयार करने और खेतों की जुताई के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है. यही कारण है कि इन दिनों किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं.ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर और हल की आवाजें फिर सुनाई देने लगी हैं. खेतों को तैयार करने के साथ-साथ किसान बीज और खाद की व्यवस्था में भी लगे हुए हैं.

बुजुर्ग किसानों ने बताया शुभ संकेत

बुजुर्ग किसानों का मानना है कि यदि रोहिणी नक्षत्र के दौरान अच्छी बारिश हो जाए तो यह पूरे मानसून सीजन के लिए शुभ संकेत माना जाता है.उनका कहना है कि इस समय होने वाली बारिश मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखती है, जिससे फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ जाती है.

कृषि विशेषज्ञों ने दी वैज्ञानिक खेती की सलाह

खेती की तैयारियों के बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मौसम या भाग्य के भरोसे रहने के बजाय समय पर सही तैयारी करना जरूरी है.किसानों को अभी से उच्च गुणवत्ता वाले बीज, खाद और कृषि संसाधनों की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बुआई के समय किसी तरह की परेशानी न हो.

जल संरक्षण पर दिया गया जोर

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से जल संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की है. विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे चेकडैम, मेड़बंदी और जल संचयन जैसे उपाय अपनाकर मानसून में देरी या कम बारिश की स्थिति में भी फसलों को बचाया जा सकता है.धान के अलावा मक्का और अरहर जैसी खरीफ फसलों के लिए मिट्टी की जांच और उचित जल निकासी वाली जमीन चुनने की सलाह भी दी गई है.

खेतों में दिखने लगी किसानों की मेहनत

पंजवारा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसान खेतों में हल चलाते नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि रोहिणी का प्रवेश शुभ माना जाता है और वे पूरी मेहनत के साथ खरीफ खेती की तैयारी में जुटे हुए हैं.मक्का और धान की खेती को लेकर किसानों ने अभी से कमर कस ली है और अब सभी की नजर अच्छी बारिश पर टिकी हुई है.

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